22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मंदिरों की जमीन का व्यवसायिक इस्तेमाल करेगी सरकार

देव कोष बनाकर सुधारेगी आस्था केंद्रों की स्थिति] तेरा तुझको अर्पण करने की नीति पर विचार    

3 min read
Google source verification

भोपाल

image

Arun Tiwari

Jun 16, 2019

temple

शहर के इस मंदिर में 11 दिनों तक रहेगी धार्मिक कार्यक्रमों की धूम

भोपाल : प्रदेश के जर्जर देवस्थानों को भव्य बनाने के लिए सरकार भगवान के जरिए ही पैसों का इंतजाम कर रही है। देवस्थानों के लिए फंड जुटाने अब सरकार मंदिरों की जमीन का व्यवसायिक इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है। सरकार के अध्यात्म विभाग ने मठ-मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए नई नीति तैयार की है।

इस नीति में तेरा तुझको अर्पण के सिद्धांत पर सरकार काम करेगी। जिन मंदिरों के पास करीब पचास एकड़ या उससे ज्यादा जमीन है, उन मंदिरों की भूमि का उपयोगिता के आधार पर व्यवयायिक इस्तेमाल कर सरकार देव कोष बनाएगी। इस देव कोष की राशि से ही प्रदेश के सभी मठ-मंदिरों का पुनरोद्धार कर भव्य बनाया जाएगा। ये नीति फिलहाल वित्त विभाग के पास विचाराधीन है। नीति को मंजूरी मिलने पर इसकी शुरुवात उज्जैन और इंदौर जैसे धार्मिक शहरों से की जाएगी।

इस तरह से बनेगा देव कोष
प्रदेश में 100 से ज्यादा ऐसे मंदिर हैं जिनके पास पचास एकड़ से ज्यादा जमीन हैं। इस जमीन पर सरकार उस क्षेत्र की उपयोगिता और संस्कृति के अनुरुप काम करेगी। जमीन पर दुकानें बनाई जा सकती हैं, उनको किराए पर भी दिया जा सकता है। गौशाला का संचालन कर वहां दूध और दुग्ध उत्पादों का व्यवसाय किया जा सकता है।

तीन हिस्सों में बांटा जाएगा
गोबर या गौ मूत्र के उत्पादों का विक्रय भी किया जा सकता है। यदि जमीन ज्यादा है या कृषि योग्य है तो वहां फसल भी पैदा की जा सकती है। मंदिर की जमीन से जो आमदनी होगी उसे तीन हिस्सों में बांटा जाएगा।

संचालन में खर्च किया जाएगा
उस फंड का 20 फीसदी मंदिर देव कोष में जाएगा, 30 फीसदी जिला देव कोष में जाएगा जिसे जिले के मंदिरों पर खर्च किया जा सकेगा। बाकी 50 फीसदी हिस्सा राज्य देव कोष के पास आएगा, इस देव कोष से प्रदेश के मंदिरों को भव्य बनाने, उनकी मरम्मत करने और उनके संचालन में खर्च किया जाएगा।

50 हजार से ज्यादा मंदिर :
प्रदेश में छोटे-बड़े सब मिलाकर 50 हजार से ज्यादा मठ-मंदिर और देवस्थान हैं। इनमें 21 हजार ऐसे हैं जिनको सरकारी अनुदान मिलता है लेकिन बाकी मंदिर भगवान के भरोसे ही हैं। गांवों में छोटे मंदिर भी लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र माने जाते हैं। इन मंदिरों को चलाने की व्यवस्था गांव के लोग ही मिलकर करते हैं।

आर्थिक मदद करना चाहती
इन मंदिरों के पास छोटी सी जमीन भी बमुश्किल होती है और इनकी माली हालत खराब होती है। पुजारी का खर्च भी लोगों के चंदे से चलता है। ऐसे ही मंदिरों का जीर्णोद्धार कर सरकार संचालन के लिए भी आर्थिक मदद करना चाहती है।


ये हैं प्रदेश के बड़े मंदिर :

- दुर्गा विनायक गणपति मंदिर,धार - 714 एकड़
- बिल्वामृतेश्वर महादेव मंदिर,कसरावद - 255 एकड़
- श्रीराम मंदिर, देवास - 203 एकड़
- गोवर्धन मंदिर,श्योपुर - 198 एकड़
- कालाजी महाराज चबूतरा,शाजापुर - 195 एकड़
- श्रीठाकुरजी मंदिर,मुरैना - 184 एकड़
- श्री विजय राघव मंदिर,सिरमौर - 162 एकड़
- गंगाबाई की बगीची, ग्वालियर - 157 एकड़
- श्रीराम मंदिर,बदनावर - 121 एकड़
- श्रीनरसिंह मंदिर,बदनावर - 121 एकड़


हमारी कोशिश है कि आस्था के केंद्र मठ-मंदिरों की माली हालत ठीक हो और बदहाल मंदिरों को भव्य बनाया जा सके। इसके लिए मंदिरों की जमीनों का उपयोग कर देवकोष बनाने पर विचार किया जा रहा है। भगवान की जमीन का पैसा भगवान पर ही खर्च किया जाएगा।
मनोज श्रीवास्तव एसीएस,अध्यात्म विभाग