
लघु उद्योगों को बढ़ाने 12 इंच तक की आरा मशीने को लाइसेंस-फ्री करेगी सरकार
भोपाल। कमलनाथ सरकार लघु और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 12 इंच तक की आरा मशीनों को लाइसेंस फ्री करने जा रही है। इससे जहां लकड़ी की कीमतें बढ़ेंगी, वहीं प्रदेश में लकड़ी उद्योगों का निवेश भी बढ़ेगा। इसके के लिए सरकार काष्ठ चिरान अधिनियमों में संशोधन करने की तैयारी कर रही है। मध्य प्रदेश में करीब साढ़े ३ हजार आरा मशीनें हैं। इन आरा मशीनों को 1996 से पहले पहले लाइसेंस दिया गया है। इसके बाद से सुप्रीम कोर्ट ने आरा मशीनों के नए लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी थी।
केन्द्र सरकार के लाइसेंस देने के अवेदन पर सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2016 में इस संबंध में राज्य सरकारों को यह आदेश जारी किया कि वे स्टेट स्तर की इंपावर कमेटी बनाकर आरा मशीन के लिए लाइसेंस दे सकते हैं। आदेश के बाद पिछले दो साल से प्रदेश में आरा मशीनों के बेंचने, खरीदने और एक जगह से दूसरी जगह पर स्थानांतरित करने के लिए अनुमति सरकार देती रही है। कामलनाथ सरकार बनने बाद आरा मशीनों को लाइसेंस फ्री करने के लिए पूरी रूप रेखा तैयार कर ली है। सरकार इस प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में पास इस पर अमल शुरू कर देगी।
क्यों लगी थी लाइसेंस देने पर रोक
गोधा बर्मन ने सुप्रीम कोर्ट में भूमि उपयोग परिवर्तन को लेकर एक केस सुप्रीम कोर्ट में लगाया गया था। इसी केस के साथ किसी ने सुप्रीमकोर्ट में यह अंतरित एप्लीकेशन लगा दिया कि प्रदेश में जितनी आरा मशीनें हैं, उतना पेड़ों का उत्पादन ही नहीं है। इसको लेकर कोर्ट ने कहा कि सभी राज्य अपने-अपने यहां पेड़ों के उत्पादन और आरा मशीनों की रिपोर्ट तैयार करें। रिपोर्ट में यह आंकलन करें कि जिनता जंगल काटे जा रहे हैं, उसके चिराई के लिए पार्याप्त मशीनें हैं अथवा कम हैं।
कटाई के अनुपात से ज्यादा हैं प्रदेश में मशीनें
प्रदेश सरकार ने आरा मशीन और जंगल कटाई का आंकलन राज्य वन अनुसंधान केन्द्र (एसएफआरआई) जबलपुर से 2015 कराया था। एसएफआरआई ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया था कि प्रदेश में जितनी आरा मशीनें हैं उनके लिए भी प्रदेश में उत्पादन नहीं है। जंगल की कटाई काम हो रही है और आरा मशीनें उसके अनुसार से अधिक हैं। इसके चलते तत्कालीन सरकार ने आरा मशीन के नए लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा रखी थी।
अवैध कटाई का मिलेगा बढ़ावा
प्रदेश में हर महीने लाइसेंसी आरा मशीनें से जितनी लकड़ी चीरी जाती है उनका हिसाब-किताब उन्हें वन विभाग को देना पड़ता है। इसके साथ ही वह यह भी रिपोर्ट देना होता है कि उन्होंने लकड़ी किससे खरीदी और किसे बेंचा है। लाइसेंस फ्री होने के बाद उन्हें इसका हिसाब-किताब नहीं देना पड़ेगा। इसके साथ ही वे कहीं भी आरा मशीन लगाकर चिराई करने लेंगे। इससे लोग अवैध कटाई कर इन आरा मशीनों के माध्यम से सामान तैयार कर उसे बाजार में खपा देंगे।
Published on:
22 Dec 2019 08:52 am

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