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भोपाल. गोविंदपुरा इंडस्ट्रीयल एरिया में कई फैक्ट्रियां हैं, जिनमें देश को ऊर्जा देने वाले बड़े कम्पोनेंट बनते हैं, फिर भी सड़कें 10 साल में नहीं बनीं। ए से ई सेक्टर तक रोड जर्जर हैं। बिजली के खंभे आड़े-तिरछे हैं। एच सेक्टर में भारतीय एयर प्रोडक्ट कंपनी है, जिसमें मेडिकल व अन्य क्षेत्रों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडरों का काम होता है। फैक्ट्री मालिक अशोक गुप्ता बताते हैं कि लाइट बड़ी समस्या है। प्रोसेसिंग का काम नहीं हो पाता। मीत इंडस्ट्री के संचालक जसबीर सिंह बताते हैं कि बरसात में पानी फैक्ट्री में घुस जाता है। 10 साल में सुधार नहीं हुआ। इससे तीन सेक्टर प्रभावित होते हैं। कई फैक्ट्रियों का गंदा पानी खाली प्लॉटों में जाता है। स्ट्रीट लाइट आधी से ज्यादा खराब हैं। डी सेक्टर से कोलुआ गांव तक अंधेरा छाया रहता है। लोहा कारोबारी एबी शाह बताते हैं कि रात में यह क्षेत्र एक्सीडेंट जोन बन जाता है। शिवम इंटरप्राइजेस के संचालक सुनील दुबे बताते हैं कि बुनियादी काम नहीं हुए। जेके रोड पर पानी निकासी के कोई इंतजाम नहीं हैं।
सिर्फ कागजों में ही हुआ विकास
इंडस्ट्रीयल एरिया के विकास को लेकर दो साल में संभागायुक्त कार्यालय में छह से ज्यादा बैठकें हुईं, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। अतिक्रमण हटाए, लेकिन फिर से जम गए। इसकी वजह से ट्रक मुड़ नहीं पाते और पार्किंग के लिए जगह नहीं मिल पाती। पुलिस चौकी के लिए जगह चिह्नित की गई, वह भी नहीं खुल पाई। आपराधिक तत्व सक्रिय हैं।
30 हजार को रोजगार
इंडस्ट्रीयल एरिया के 1021 उद्योगों से सालाना 200 करोड़ से ज्यादा का टैक्स मिलता है, फिर भी सुविधाएं ऊंट के मुंह में जीरे बराबर दी हैं। यहां 30 हजार लोगों को रोजगार मिला है। बड़ी संख्या में आवागमन होता है, लेकिन क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट के साधन तक नहीं हैं।
यहां 2015 के बाद सड़कें नहीं बनीं। बिजली के तार झूल रहे हैं, जो ट्रकों से उलझकर टूट जाते हैं। अतिक्रमण बड़ी समस्या है। प्रशासन के साथ बैठकों में बात हुई, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ।
एसके पाली, अध्यक्ष, गोविंदपुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
Published on:
23 Oct 2018 04:04 am
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