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गांधीसागर में चीतों की बसाहट के लिए बनेेंगे घास के मैदान, सुरक्षा के लिए फेंसिंग

-चीता इंट्रोडक्शन प्रोग्राम के तहत 20 करोड़ का रखा गया फंड

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भोपाल। कूनो नेशनल पार्क के बाद अब गांधीसागर अभयारण्य चीतों का नया घर होगा। 368.62 वर्ग किमी में फैले इस अभयारण्य को चीतों के अनुकूल बनाने के लिए इस साल कई काम किए जाएंगे। चीता इंट्रोडक्शन प्रोग्राम के तहत 20 करोड़ का फंड रखा गया है। इससे यहां नए घास के मैदान बनेंगे तो सुरक्षा के लिए फेंसिंग भी की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि अगले दो साल में चीतों को यहां बसाया जा सकता है।

देहरादुन स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान टीम की रिपोर्ट के बाद गांधीसागर को चीतों के लिए उपयुक्त माना गया था। वन विभाग ने केंद्र को भेजे प्रस्ताव में यहां तैयारी शुरू करने के लिए 20 करोड़ रुपए का फंड मांगा है। नए वित्तीय वर्ष में फंड मिलते ही योजनाबद्ध तरीके से काम शुरू हो जाएंगे। यहां नरसिंहगढ़ से चीतल लाए जा रहे हैं। गांधीसागर में 56 चीतल छोड़े जा चुके हैं। 444 चीतल लाने की योजना है। यहां सांभर, हिरण और नीलगाय भी पाए जाते हैं।

प्रदेश में अभी 20 चीते
भारत का दक्षिण अफ्रीका के साथ हुए करार के अनुसार, अब यहां हर साल 12 चीते भेजे जाएंगे। 18 फरवरी को 12 चीते कूनो आ चुके हैं, जिन्हें क्वॉरंटीन किया गया है। नामीबिया से आए चीतों को मिलाकर यहां इनकी संख्या 20 हो गई है। वहीं, नामीबिया से लाए गए चीतों को खुले में छोडऩे का मामला बाघ मूवमेंट के चलते अटक गया है। रणथंबौर से आए बाघ का मूवमेंट सेवढ़ा और देवगढ़ तक होने की बात सामने आई है, जिसके बाद वन विभाग अलर्ट मोड पर है।

चीता इंट्रोडक्शन प्रोग्राम के तहत 20 करोड़ रुपए गांधीसागर अभयारण्य को दिए जाएंगे। इसके लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा गया है। यहां नए घास के मैदान तैयार किए जाएंगे। चीता को घास के मैदान में शिकार करना पसंद है।
- सुनील अग्रवाल, पीसीसीएफ (कैंपा)

सुरक्षा के लिए 60 स्क्वायर किलोमीटर में फेंसिंग
अभयारण्य में तीन नर और पांच मादा चीता बसाए जाने की योजना है। अभयारण्य का एक बड़ा इलाका राजस्थान में भी आता है। इसका करीब 181 वर्ग किमी मंदसौर व 187 वर्ग किमी नीमच जिले में फैला है। इसकी सीमा रावतभाटा वन क्षेत्र और मुकंदरा नेशनल पार्क से लगती है। रावतभाटा की 30 किमी वन क्षेत्र की सीमा कम आबादी वाली है। गांधीसागर वन्य क्षेत्र चंबल का बड़ा क्षेत्र है।

यहां पानी की भी कमी नहीं है। पीसीसीएफ (वन्य प्राणी) जेएस चौहान के अनुसार यहां सुरक्षा व्यवस्था हमारी पहली प्राथमिकता है। इसके लिए करीब 60 वर्ग किलोमीटर में तार फेंसिंग की जाएगी। इससे चीता प्रदेश की सीमा में रहकर ही शिकार कर सकेंगे। सुरक्षा में तैनात अमले के लिए हाईटेक वायरलेस इक्यूपमेंट्स खरीदे जाएंगे। सड़क दुर्घटनाओं से जंगली जानवरों को बचाने के लिए सड़क के दोनों तरफ बाउंड्रीवाल बनाने का भी काम होगा। रावलकुंडी क्षेत्र में बाड़ा बनाने का काम शुरू हो गया है।

33 साल बाद अब माधव नेशनल पार्क में सुनाई देगी बाघों की दहाड़-पार्क में छोड़े जाएंगे तीन बाघ
माधव नेशनल पार्क में एक बार फिर बाघों की दहाड़ सुनाई देगी। शुक्रवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मंत्री विजय शाह और महेन्द्र सिंह सिसौदिया दोपहर 3 बजे इन्हें छोड़ेंगे। पार्क में दो मादा बाघिन पन्ना और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से तथा नर बाघ सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से शिफ्ट किया जा रहा है। यहां कुल 5 बाघ लाए जाने की योजना है। पार्क के बलारपुर जंगल में बनाए गए तीन बाड़ों में तीन बाघों को छोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री पार्क के बलारपुर जंगल हेलीकॉप्टर से पहुंचेंगे। इसके लिए पार्क में ही हेलीपैड बनाया गया है।

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