प्रेमनारायण दांगी, रामकिशोर यादव, गुडि़या कुमारी सहित 50 से अधिक संविदा शिक्षकों ने याचिकाएं दायर की थीं। कहा गया था कि सभी को राज्य सरकार ने अनुभव व पात्रता परीक्षा में चयनित होने के आधार पर संविदा अंतिम शिक्षक वर्ग-3 पर नियुक्ति दी है। इस नियुक्ति की शर्तों में से एक शर्त थी कि चयनित उम्मीदवार को राज्य में शिक्षक पद के लिए अनिवार्य डीएलएड कोर्स करना होगा। दो साल के इस कोर्स को याचिकाकर्ता निर्धारित अवधि में पूरा नहीं कर सके। इस पर उन्हें एक और मौका मिला। इस अवसर में भी वे सफल नहीं हो पाए। इसके बाद उन्होंने तीसरा अवसर देने की मांग की, जिसे माध्यमिक शिक्षा मंडल ने ठुकरा दिया। इसके खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट की शरण ली थी।