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गुरुजी से संविदा शिक्षक बने कई लोगों की नौकरी खतरे में

हाईकोर्ट ने तीसरा अवसर देने से किया मना, अध्यापक संवर्ग में नहीं हो पाएंगे शामिल

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Krishna singh

Jul 03, 2016

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जबलपुर/भोपाल. स्कूल शिक्षा विभाग में गुरुजी से संविदा शाला शिक्षक बनाए गए लोगों की नौकरी पर खतरे की तलवार लटक गई है। मप्र हाईकोर्ट ने इन्हें डीएलएड (डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन) कोर्स की परीक्षा के लिए तीसरा अवसर देने से दो टूक इनकार कर दिया है। जस्टिस एसके गंगेले व जस्टिस एके जोशी की युगलपीठ ने कहा है कि माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा लिया गया फैसला पूर्णत: वैधानिक है। प्रदेश में इनकी संख्या करीब 7000 है।

यह होगा परिणाम
स्कूल शिक्षा विभाग के जानकारों का कहना है कि याचिकाकर्ताओं को इस पद पर बने रहने के लिए अब कोई अवसर बाकी नहीं रह गया है। वहीं इनके अध्यापक संवर्ग में शामिल होने की संभावनाएं धूल-धूसरित हो गई हैं।

यह है मामला
प्रेमनारायण दांगी, रामकिशोर यादव, गुडि़या कुमारी सहित 50 से अधिक संविदा शिक्षकों ने याचिकाएं दायर की थीं। कहा गया था कि सभी को राज्य सरकार ने अनुभव व पात्रता परीक्षा में चयनित होने के आधार पर संविदा अंतिम शिक्षक वर्ग-3 पर नियुक्ति दी है। इस नियुक्ति की शर्तों में से एक शर्त थी कि चयनित उम्मीदवार को राज्य में शिक्षक पद के लिए अनिवार्य डीएलएड कोर्स करना होगा। दो साल के इस कोर्स को याचिकाकर्ता निर्धारित अवधि में पूरा नहीं कर सके। इस पर उन्हें एक और मौका मिला। इस अवसर में भी वे सफल नहीं हो पाए। इसके बाद उन्होंने तीसरा अवसर देने की मांग की, जिसे माध्यमिक शिक्षा मंडल ने ठुकरा दिया। इसके खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट की शरण ली थी।