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कुत्तों का निवाला बनने से बचा नवजात, कड़ाके की ठंड में खुले में छोड़ गए परिजन

Rajgarh- जन्म होते ही गांव के सुनसान इलाके में नवजात को छोड़ गए परिजन, अस्पताल पहुंचाया

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Newborn rescued from being devoured by dogs in the open in Rajgarh

Newborn rescued from being devoured by dogs in the open in Rajgarh

Rajgarh- MP के राजगढ़ में बर्फीली हवाओं और कड़ाके की ठंड के बीच एक नवजात ठिठुरता हुआ गमछे में लिपटा मिला। उसके रोने की आवाज आई तो ग्रामीणों की नजर पड़ गई। उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। नवराज का अब उपचार चल रहा है और उसकी हालत ठीक बताई जा रही है। जिले के खिलचीपुर थाना क्षेत्र के बरुखेड़ी गांव में यह घटना हुई। शनिवार सुबह कड़ाके की ठंड के बीच गांव के बाहर एक सुनसान स्थान पर खुले में जमीन पर एक नवजात शिशु पड़ा मिला। मासूम शाॅल और पीले गमछे में लिपटा हुआ था, जबकि उससे करीब 50 फीट की दूरी पर दो कुत्ते बैठे हुए थे। किसी अनहोनी के पहले ही वहां से गुजर रहे एक ग्रामीण को नवजात के तेज रोने की आवाज सुनाई दी। आवाज की दिशा में जाकर देखा तो मासूम अकेला पड़ा मिला। ग्रामीण ने तत्काल अन्य लोगों को सूचना दी। कुछ ही देर में मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। इसी दौरान एक महिला ने आगे बढ़कर नवजात को गोद में लिया और सुरक्षित किया, जिससे उसकी जान बच सकी।

पुलिस पहुंची, सिविल अस्पताल में किया भर्ती

घटना की सूचना तुरंत डायल-112 पर दी गई। सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और नवजात को अपने साथ खिलचीपुर सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसका प्राथमिक उपचार कराया गया। इसके बाद बेहतर देखरेख और इलाज के लिए उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। घटना के बाद पूरे गांव में इसी पर चर्चा होती रही। इस अमानवीय कृत्य को लेकर चर्चा है कि किसी ‘कलयुगी मां’ ने यहां छोड़ दिया। समय रहते बच्चे की आवाज नहीं सुनाई देती, तो ठंड या आवारा जानवरों के कारण बड़ा हादसा हो सकता था।

हाल ही में पैदा हुआ बच्चा

खिलचीपुर अस्पताल के डॉ. विशाल सिसोदिया ने बताया कि नवजात का जन्म हाल ही में हुआ प्रतीत होता है। उन्होंने बताया कि बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है। एहतियातन बेहतर इलाज और निगरानी के लिए उसे जिला अस्पताल भेजा गया है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। आसपास के क्षेत्रों में पूछताछ की जा रही है और नवजात को छोड़ने वाले व्यक्ति की तलाश की जा रही है।

2012 से आज तक मिल चुके हैं 35 नवजात-
यह पहला मौका नहीं है जब नवजात ऐसे पड़ा मिला हो। वर्ष-2012 से लेकर आज तक यानी 14 साल में करीब 35 ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। कहीं झाडि़यों में तो कहीं कचरे के ढेर में मासूम पड़े मिलते रहे हैं। इनमें कई नवजात की जान भी चली गई।

हाल ही में छापीहेड़ा क्षेत्र में हुए एक ऐसे ही मामले में पुलिस ने नवजात के मामले में उसकी मां के खिलाफ एफआइआर दर्ज की थी। एक अन्य मामले में माचलपुर थाना क्षेत्र में भी पुलिस ने इस घटना को अंजाम देने वाली मां और उसके पति के खिलाफ मामला दर्ज किया था। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिसके पीछे के कारण पुलिस ढूंढ़ती है। मानवता को शर्मसार करने वाले ऐसे मामलों में लोग इस हद तक आ जाते हैं कि नवजात को पानी में गड्ढों में, जानवरों के बीच तक छोड़ जाते हैं।