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व्यवस्था नहीं हो रही दुरुस्त, इसलिए हमीदिया में झगड़े हुए आम

हमीदिया को हरारत... तीन दिन में तीन बार विवाद, डॉक्टर्स-मरीजों के परिजन आमने-सामने

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Hamidia Hospital

Hamidia Hospital

भोपाल. हमीदिया अस्पताल में डॉक्टरों और मरीज के परिजनों के बीच आए दिन होने वाले विवादों की वजह व्यवस्थाओं में कमी है। अगर शासन इन्हें दुरुस्त करवा दे तो मरीजों और डॉक्टरों के बीच संघर्ष कम हो जाएगा। हमीदिया अस्पताल में तीन दिन में तीन बार मारपीट हुई है। पहली घटना में जूनियर डॉक्टर ने मरीज के परिजन को पीटा तो दूसरी में परिजन को ड्यूटी रूम में बंद कर दिया। विरोध में परिजनों ने अस्पताल में तोडफ़ोड़ की। पिछले साल यहां ऐसे 17 मामले सामने आए थे। पत्रिका ने पड़ताल की, तो कई कमियां सामने आईं, जिन्हें दूर किया जाए, तो विवादों पर अंकुश लग सकता है।

पंखा खरीदना पड़ा
कई वार्डों में कूलर नहीं है। सबसे ज्यादा दिक्कत पटेल वार्ड में है। एक मरीज को 600 रुपए का पंखा खरीदना पड़ा। यहां भर्ती ब्यावरा के जगदीश लोधी ऐसे हालात को विवाद की जड़ बताकर नाराजगी जाहिर करते हैं।

सर्जरी का सामान नहीं
अस्पताल में अकसर हड्डी और हार्ट के ऑपरेशन का सामान नहीं मिलता। पटेल वार्ड में भर्ती मरीज के परिजन रोहित शाक्य बताते हैं कि 15 दिन से सर्जरी का इंजतार कर रहे हैं। दो बार डॉक्टरों से बहस भी चुकी है।

जरूरी दवाएं ही नहीं मिलती
हृदय रोग, मधुमेह और ब्लड प्रेशर सहित अन्य बीमारियों की दवाएं नहीं मिलती हैं। डॉक्टर पांच दवा लिखें, तो दो-तीन ही मुहैया हो पाती हैं। बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।

परिजन तुरंत इलाज चाहते हैं
मरीजों के परिजन चाहते हैं कि सबसे पहले उन्हें इलाज मिले। जरा सी देर होने पर वे हंगामा करने लगते हैं, जिसका विरोध करने पर मार-पीट की नौबत आती है।

एसडीएम तलाश रहे झगड़े की वजह
हमीदिया अस्पताल में जूनियर डॉक्टर और मरीज के परिजनों के बीच आए दिन झगड़े होते हैं। ऐसा बार-बार क्यों होता है, इस संबंध में संभागायुक्त कल्पना श्रीवास्तव ने कलेक्टर को जांच कराने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने शनिवार को एसडीएम हुजूर राजकुमार खत्री को हमीदिया भेजा। एसडीएम ने डॉ. अमन और डॉ. मनोज के साथ तीन अन्य के बयान लिए। उन्होंने एसडीएम को पूरा घटनाक्रम बताया। एसडीएम का कहना है कि हाल ही में हुए झगड़े के संबंध में 20 लोगों के बयान लिए जाएंगे। कैमरे भी देखे जाएंगे। इसके बाद रिपोर्ट संभागायुक्त को सौंपी जाएगी।

डॉक्टर्स समझें पीड़ा
विवाद बढ़े, लेकिन सुविधाएं नहीं। डॉक्टरों को मरीजों की पीड़ा समझनी चाहिए।
डॉ. एनआर भंडारी, पूर्व डीन, गांधी मेडिकल कॉलेज
सुविधाएं बढ़ा रहे हैं
विवाद की स्थिति न बने, इसके लिए कोशिश की जाती है। सुविधाओं में इजाफा हो रहा है।
डॉ. अरुणा कुमार, डीन, गांधी मेडिकल कॉलेज