
भोपाल। शहर में एटीएम तोड़ने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन इस बार एक नया ही मामला सामने आया है, जहां आरोपी करीब 15 मिनट तक बिना किसी खौफ के हथोड़ी से एटीएम तोड़ने का प्रयास करता रहा। जानकारी के अनुसार गोविंदपुरा पुलिस ने रात करीब एक बजे चेतक ब्रिज के पास यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम को हथौड़े से तोड़ रहे बदमाश को पकड़ा है।
आरोपी चेहरे पर रुमाल बांधे हुए था। वह एटीएम का ऊपरी हिस्सा तोड़ चुका था। कैश बॉक्स (सेफडोर) पर हथौड़ा चला ही रहा था कि एक राहगीर ने उसका वीडियो बनाकर पुलिस को सूचना दे दी। मौके पर पहुंची क्राइम ब्रांच, गोविंदपुरा पुलिस की टीम ने बदमाश को दबोच लिया। आरोपी की पहचान बरेली, रायसेन निवासी अवनीश दीक्षित के रूप में हुई है। सब-इंस्पेक्टर रमेश राय ने बताया कि अवनीश ऑनडोर कंपनी में सेल्समैन है।
वह ईडब्लूएस-7 कस्तूरबा नगर में अपने दो भाइयों के साथ रह रहा है। उसके पिता प्रकाश दीक्षित गांव में पंडिताई करते हैं। कंपनी से उसे एक डिलेवरी पहुंचाने में 15 रुपए मिलते हैं। इतनी कमाई में उसका खर्च भी नहीं चल पाता था। हाल ही में उसने चाय-नाश्ते की होटल खोलने का प्लान बनाया था। धंधे के लिए पैसों की व्यवस्था नहीं हो पाने की वजह से उसने चोरी की साजिश रची।
एटीएम में नहीं था कोई गार्ड :
सब-इंस्पेक्टर राय का कहना कि एटीएम में कोई गार्ड नहीं था। ऐसे में आरोपी बेफिक्र होकर एटीएम में तोडफ़ोड़ करता रहा। उसने एटीएम की लाइट तक नहीं बंद की थी। करीब 15 मिनट तक एटीएम में तोडफ़ोड़ करता रहा। राय का कहना कि पुलिस बैंक को लापरवाही बरतने का नोटिस देगी। एटीएम चेतक ब्रिज के पास कस्तूरबा नगर के सी-सेक्टर में एक गल्र्स होस्टल की बिल्डिंग में चल रहा है। नोटबंदी के दौरान इस एटीएम को बैंक ने स्थापित किया था।
घटना से बैंक बेखबर :
पुलिस का कहना कि बैंक की तरफ से उन्हें कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। बैंक का कोई कर्मचारी पुलिस से घटना के बारे में जानकारी लेने नहीं पहुंचा। राय ने बताया कि एटीएम में कैश कितना था इसका फिलहाल खुलासा नहीं हो सका है।
जिम्मेदारों ने इन घटनाओं से नहीं लिया सबक :
केस-1 (सितंबर 2017): पिपलानी इलाके के आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम के सेफडोर का पासवर्ड डालकर एसएसएफ जवान व उसके साथी ने सवा तेरह लाख चोरी किए।
केस-2(जुलाई 2017): एमपी नगर जोन-2 से एटीएम कैश वैन के पास सड़क पर नोट गिराकर कैशवैन में रखे 43 लाख रुपए लेकर छह आरोपी फरार हो गए। अब तक आरोपी नहीं पकड़ाए।
केस-३ (जनवरी 2017): मेट्रो प्लाजा स्थित डाक विभाग के एटीएम में बदमाश तोडफ़ोड़ कर रकम निकालने का प्रयास किया। हालांकि लोगों के शोर मचाने पर वह भाग निकले।
एटीएम की सुरक्षा के लिए अब एटीएम में इलेक्ट्रॉनिक सर्विलेयर सिस्टम भी लगाए जाने लगे हैं। इस सिस्टम में एटीएम में छेड़छाड़ होने या किसी प्रकार की तोडफ़ोड़ होने या कि वाइब्रेशन भी हुआ तो तुरंत कॉल सेंटर को पता चल जाता है। तुरंत संबंधित थाना को भी सूचना मिल जाती है। जहां तक सुरक्षा बढ़ाने की बात है तो इससे ऑपरेशन कॉस्ट बढ़ जाएगी। इसका भार ग्राहकों के ऊपर ही आएगा। ज्यादातर घटनाएं कम भीड़भाड़ वाले सुनसान जगहों पर लगे एटीएम में होती है। बैंक इसके लिए टेक्नोलॉजी को और मजबूत कर रहे हैं।
- अजय व्यास, फील्ड महाप्रबंधक सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया
एटीएम में कोई सुरक्षा गार्ड नहीं था। सुरक्षा को लेकर बैंक, संबंधित निजी सुरक्षा की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- संतोष कुमार सिंह, डीआईजी
इधर,ओटीपी मिला नहीं, निकल गए 93 हजार :-
सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी के मालिक के बैंक खाते से हाईटेक जालसाजों ने 93 हजार रुपए का ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर लिया। इसका खुलासा तब हुआ जब कंपनी के मालिक के मोबाइल फोन पर ट्रांजेक्शन का मैसेज आया। यह खुलासा नहीं हो सका कि ट्रांजेक्शन किस खाते में हुआ है। श्रवण स्टेट फेस-२ दुर्गेश विहार भोपाल निवासी अमर लाल वाधवानी सॉफ्टवेयर कंपनी के मालिक हैं। उनका आईसीआईसीआई बैंक में खाता है।
अमर ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब 11 बजे उनके मोबाइल फोन पर एक ट्रांजेक्शन होने का मैसेज आया। उन्होंने बैंक के कॉल सेंटर में कॉल किया। जवाब मिला कि आपने ही ट्रांजेक्शन किया है। उन्होंने बैंक पहुंचकर खाता लॉक कराया। अमर का कहना कि बैंक उन्हें यह जानकारी नहीं दे सका कि किस खाते में यह रकम ट्रांसफर हुई है। सिर्फ इतना बताया गया कि ट्रांजेक्शन इंटरनेशनल सर्वर से हुआ है। जबकि, अमर का कहना कि इंटरनेशनल सर्वर की वह किसी वेबसाइट से ट्रांजेक्शन नहीं करते हैं। यह बैंक की लापरवाही है।
Published on:
11 Oct 2017 10:27 am
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