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गौहर महल में हस्तशिल्प महोत्सव: देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कारीगर

- हस्तशिल्प कलाकार राम यादव ने जूट से भोपाल का प्रसिद्ध लेक प्रिंसेस क्रूज बनाया - 13 साल नौकरी करने के बाद शुरू किया अपना बिजनेस, राजधानी के एक्जीबीशन में लगाते हैं अपनी दुकानें - 13 साल की उम्र में पिता का निधन हुआ तब पेट पालने के लिए मां के साथ गोंड पेंटिंग सीखी, आज विदेशों में बिक रही

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भोपाल. गौहर महल में 7 जनवरी से चल रहे हस्तशिल्प महोत्सव में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कारीगर अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनी मे स्वसहायता समूहों द्वारा उत्पादित सामान जूट बेग, जरी वर्क, एम्ब्राइडरी, ज्वैलरी, सजावट के सामान, पेंटिंग आदि सामान हैं।

13 साल नौकरी करने के बाद शुरू किया अपना बिजनेस, राजधानी के एक्जीबीशन में लगाते हैं अपनी दुकानें

गौहर महल में चल रही एक्जीबीशन में भोपाल के वरूण राय सम्मी अपने मां के सपने को पूरा कर रहे हैं। 13 साल तक विदेश में सेल्स और मार्केटिंग में जॉब करने के बाद अब हैंडलूम का बिजनेस शुरू किया है। राजस्थान की हैंड-ब्लॉक प्रिटिंग को बढ़ावा दे रहे हैं।

7 अलग-अलग भाषाओं का जानने वाले वरूण ने बताया कि 6 साल पहले नौकरी छोड़कर ये बिजनेस शुरू किया था। इससे आज अजमेर और भोपाल के करीब 200 कारीगरों को रोजगार दे रहे हैं। जब मैंने जॉब छोड़कर इस दुकान पर बैठना शुरू किया तो कई लोग हसंते थे। लेकिन मैं ग्रांउड पर रहकर कस्टमर की जरूरत महसूस कर अपना बिजनेस आगे ले जाना चाहता हूं। शुरूआत में कई बार फेल भी हुआ लेकिन पूरे परिवार के साथ से हैंडलूम को एक नई पहचान देने की कोशिश कर रहे हैं।

13 साल की उम्र में पिता का निधन हुआ तब पेट पालने के लिए मां के साथ गोंड पेंटिंग सीखी, आज विदेशों में बिक रही

खुबसूरत गोंड पेंटिंग बेचती डिंडोरी जिले की दीपिका धुर्वे ने बचपन में इसकी शुरूआत मजबूरी में की लेकिन अब इसी ने एक नई पहचान दिलाई है। ये अब दुपट्टे, कपड़ों, ग्लास, पेपर मेशे, स्कूल, ऑफिस, घरों में पेंटिंग करती हैं। 24 साल की उम्र में वे अब तक 21 के ज्यादा शहर घूम चुकी हैं। ये पिछले 5 साल से यही बिजनेस कर रही हैं।

कई अलग-अलग राज्यों में घूमकर तैयार होती है एक साड़ी

चंदेरी से आए शाहनवाज अंसारी इस बार खास अड्डेदार बॉर्डर की साड़ी लेकर आए हैं। इसे बनने में करीब 1 महीना लगता है। उन्होंने बताया कि जब से मैंने आंखें खोली तब से यही देख रहा हूं। एक साड़ी के लिए पहले कपड़ा चंदेरी में तैयार होता है। उसके बाद पेंटिंग के लिए वो संबंधित राज्य में जाती है। ऐसे में एक साड़ी कई राज्यों में घूमने के बाद ग्राहक तक पहुंचती हैं।