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देश के कई राज्यों के हैंडीक्राफ्ट अब मप्र में भी, राजस्थानी, यूपी की पॉटरी से 150 करोड़ का कारोबार

- उद्योगों को बढ़ाना देने कई प्रकार के क्लस्टर के साथ हैंडीक्राफ्ट के लिए भी अन्य राज्यों से आ रहे कारोबारी, दो को मिली जगह

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देश के कई राज्यों के हैंडीक्राफ्ट अब मप्र में भी, राजस्थानी, यूपी की पॉटरी से 150 करोड़ का कारोबार

देश के कई राज्यों के हैंडीक्राफ्ट अब मप्र में भी, राजस्थानी, यूपी की पॉटरी से 150 करोड़ का कारोबार

प्रवेंद्र तोमर. राजस्थानी हैंडीक्राफ्ट अब भोपाल में भी बनेगा, इसके लिए फंदा ब्लॉक के बीनापुर रोड पर गोलखेड़ी में 50 एकड़ जमीन राजस्थान की स्पोक आर्ट स्टूडियो को दी गई है। ये कंपनी बड़े स्तर पर राजस्थानी हैंडीक्राफ्ट बनाने के साथ, कई प्रकार के बर्तन और सजावटी सामान बनाती है, जिसकी मांग देश ही नहीं विदेशों में भी है। इस कंपनी ये जमीन लेकर प्लांट का काम शुरू कर दिया है। वहीं उत्तर प्रदेश में खुर्जा के पॉटरी उद्योग के लिए बगरोदा में जमीन आवंटित की गई है। इन दो उद्योगों को औद्योगिक क्लस्टर में शामिल हो गई है। यूके्रन, चीन, अमेरिका से आने वाले केमिकल और कई प्रकार की मिट्टी के मिश्रण से तैयार की जाने वाली क्रॉकरी मप्र में पहली बार भोपाल में तैयार की जाएगी। इससे लोगों के रोजगार की राह खुलेगी।

राजस्थान की जाे कंपनी यहां 50 एकड़ में प्लांट लगा रही है, वह यहां कई चरणों में निवेश करेगी। मप्र में आने वाले टूरिस्टों को राजस्थान और उत्तर प्रदेश का फेमस हैंडीक्राफ्ट यहां के बाजारों में भी उपलब्ध होगा। यहां से बनकर बाहर भी जाएगा। इंदौर और भोपाल के ही कई कारोबारी जो हैंडीक्राफ्ट खरीदकर बाहर भेजते हैं या अपने क्लाइंटों तक पहुंचाते हैं। उन्हें मप्र में ही दो राज्यों का फेमस हैंडीक्राफ्ट उपलब्ध होगा।
राजस्थान का प्रसिद्ध हैंडीक्राफ्ट
- नीले मिट्टी के बर्तन, कालीन, पत्थरों पर मीनाकारी, संगमरमर की कलाकृतियां और मोजारिस जैसे चमड़े के बर्तन भी प्रसिद्ध हैं। इनको राजस्थान के कारीगर ही बनाते हैं। जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बाड़मेर कुछ प्रसिद्ध स्थान हैं जो पारंपरिक चमड़े के जूते, हैंडबैग, टोपी भी यहां तैयार की जाएगी।

उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध हैंडीक्राफ्ट

उप्र की फेमस पॉटरी में फूलदान और गमले फ्रांस, यूएस, इंग्लैंड और कनाडा तक जाते हैं, वे यहां बनाए जाएंगे। कप, प्लेट, मग, कई प्रकार के स्टैंड भी खास प्रकार की मिट्टी से मशीन के द्वारा बनाए जाते हैं। यहां के सामान का चाइना के प्रॉडक्ट से मुकाबला होता है।
बढ़ेगा रोजगार और कारोबार
राजधानी के क्लस्टरों में अभी तक 1093 करोड़ के निवेश का खाका तैयार हो चुका है। इसमें छोड़ी बड़ी 434 से ज्यादा इकाई हैं जो अलग-अलग स्थानों पर 200 हेक्टेयर जमीन में स्थापित की जाएंगी। अब इनमें से कुछ ने जमीनें आवंटित कराने के बाद अपने प्लांट लगाने शुरू कर दिए हैं। जैसे की राजस्थान की हैंडीक्राफ्ट कंपनी ने शुरू कर दिया है। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के अनुसार इन यूनिट में 19462 लोगों को रोजगार मिलेगा।

अभी 50 करोड़ सालाना का बाजार

शहर में फुटपाथों पर कई जगह कांच के बड़े-बड़े गमले, फूलदान, कई प्रकार के सजावटी सामान बिकते दिखाई देते हैं। दिवाली पर इनकी काफी मांग है। सांची दुग्ध संघ के सामने, बिट्टन, 11 मील, पुराने शहर, अरेरा में कई जगह दिख जाते हैं। जानकार बताते हैं कि ये माल उप्र और चाइना से आता है। ये पॉटरी भोपाल में बनेगी तो ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बचेगा। ये और सस्ती पड़ेगी, यहां के लोगों को रोजगार भी मिलेगा। अभी मप्र में इस तरह के उत्पादों का करीब 150 करोड़ का अनुमानित कारोबार है।
वर्जन
गोलखेड़ी में राजस्थान का फेमस हैंडीक्राफ्ट बनाने वाली एक कंपनी को 50 एकड़ जमीन दी गई है। उनका काम भी शुरू हो गया है। बगरोदा में भी पॉटरी उद्योग को जमीन दी गई है। इससे यहां रोजगार और निवेश दोनों बढ़ेंगे।

आकाश श्रीवास्तव, कार्यकारी संचालक, एमपीआइडीसी