ओबीसी आरक्षण पर फिर बढ़ी तारीख, अटकी हुई है चयनित शिक्षकों की ज्वाइनिंग

30 सितंबर को आ सकता है फाइनल फैसला, कांग्रेस ने भी उतारे अपने दो बड़े वकील...।

By: Manish Gite

Published: 20 Sep 2021, 02:28 PM IST

 

भोपाल/जबलपुर। मध्यप्रदेश में ओबीसी के 27% आरक्षण पर रोक अब भी बरकरार रखी गई है। अगली सुनवाई 30 सितम्बर को तय की गई है। कांग्रेस की ओर से भी दो बड़े वकीलों को इस मामले में उतारा है, वहीं सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता और महाधिवक्ता पुरुषेंद्र कौरव ने अपना पक्ष रखा। वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जय सिंह और अभिषेक मनु संघवी दिल्ली से वर्चुअल रूप से इसमें शामिल हुए।

 

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में ढाई साल चल रहे ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर सोमवार को मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और जस्टिस वीके शुक्ला की डबल बेंच ने याचिकाओं की सुनवाई करते हुए ओबीसी आरक्षण में लगी रोक को हटाने से इनकार कर दिया। सभी पक्षों को सुनने के बाद एक बार फिर तारीख आगे बढ़ा दी। अब सुनवाई 30 सितंबर को होगी।

 

इधऱ, राज्य सरकार चयनित शिक्षकों को ज्वाइनिंग देने के लिए तैयार है। संभवतः 21 सितंबर को इन शिक्षकों को सामूहिक रूप से ज्वाइनिंग करवाई जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में सोमवार शाम को होने वाली कैबिनेट बैठक में भी अहम फैसले लिए जा सकते हैं।

 

क्या हुआ था पिछली सुनवाई में

इससे पहले पिछली सुनवाई 1 सितंबर को हुई थी, जिसमें मध्यप्रदेश सरकार को हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया था। राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण पर लगे स्टे को हटाने से इनकार कर दिया था। इस मामले में सरकार की तरफ से सालिसिटर जनरल तुषार मेहता वर्चुअल, महाधिवक्ता पुरुषेंद्र कौरव ने अपना पक्ष रखा। राज्य सरकार ने 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण कर दिया था, इसके बाद से यह स्टे चल रहा है। राज्य सरकार ने आरक्षण स्टे हटाने का अनुरोध किया था।

 

महाअधिवक्ता ने दिया था अभिमत

पुरुषेंद्र कौरव ने इस मामले में अभिमत दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोर्ट में चल रहे छह मामलों को छोड़कर सभी मामलों में 27 फीसदी आरक्षण लागू करने के लिए स्वतंत्र है। इसलिए सभी शासकीय नियुक्तियों और प्रवेश परीक्षाओं में राज्य सरकार ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण दे सकती है।

कमलनाथ सरकार ने बढ़ाया था आरक्षण

मध्यप्रदेश की तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने मार्च 2019 में ओबीसी को दिए जाने वाला आरक्षण 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी कर दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट में इस वृद्धि के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने इस वृद्धि पर रोक लगाते हुए 14 फीसदी आरक्षण ही रखने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के मुताबिक किसी भी राज्य में कुल 50 फीसदी से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता।

 

कांग्रेस भी लड़ेगी ओबीसी की लड़ाई

इसी मामले में कांग्रेस भी ओबीसी के लिए लड़ाई लड़ रही है। कांग्रेस ने कहा था कि वे ओबीसी मामले में बढ़े हुए आरक्षण का जल्द लाभ दिलाने के लिए उनकी मदद और कोर्ट में मजबूती से पैरवी करने के लिए अपनी तरफ से नामी वकील खड़े करेगी। इसके लिए वकील अभिषेक मनु सिंघवी और इंदिरा जय सिंह से पैरवी कराने की बात कही थी।

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