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भोपाल। जाने-माने लेखक एवं हिन्दी अकादमी के उपाध्यक्ष विष्णु खरे का बुधवार को नई दिल्ली में निधन हो गया। 78 वर्षीय खरे को ब्रेन हेमरेज के कारण जीबी पंत सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
जाने-माने कवि, पटकथा लेखक विष्णु खरे का बुधवार को निधन हो गया। पिछले सप्ताह ही उन्हें अचानक ब्रेन स्ट्रोक के कारण जीबी पंत सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती किया गया था। उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। दो अधिकारियों की निगरानी में डाक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही थी। बुधवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में जन्मे विष्णु खरे हिन्दी अकादमी के उपाध्यक्ष बनने के बाद दिल्ली में रह रहे थे। वे दिल्ली के मयूर विहार के एक अपार्टमेंट में किराए के एक कमरे में अकेले रहते थे।
इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में एमए करने के बाद हिन्दी पत्रकारिता में से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की। वे कुछ समय तक समाचार पत्रों में उपसंपादक भी रहे। बाद में दिल्ली, लखनऊ और जयपुर में भी समाचार पत्रों से जुड़े रहे।
कई पुरस्कार भी किए अपने नाम
अपनी लेखनी के दम पर उन्होंने नाइट आफ द व्हाइट रोज सम्मान, हिन्दी अकादमी साहित्य सम्मान, शिखर सम्मान, रघुवीर सहाय सम्मान, मैथिलीशरण गुप्त सम्मान से भी नवाजा गया था।
साहित्य जगत में शोक की लहर
खरे के निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई। कई कवि और साहित्यकारों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। जबकि कई लोगों ने उनकी कविता के जरिए भी उनके कार्यों को याद किया है। कई लोग सोशल मीडिया पर भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
खरे की यादगार कविताएं
विष्णु खरे विश्व प्रसिद्ध रचनाओं के अनुवादक के रूप में हमेशा याद किए जाते रहेंगे। उन्होंने ब्रिटिश कवि टीएस इलियट का हिन्दी अनुवाद किया था। जो काफी चर्चित रही। जिसका नाम मरु प्रदेश और अन्य कविताएं है। उनकी रचनाओं में काल और अवधि के दरमियान, खुद अपनी आंख से, पिछला बाकी, लालटेन जलाना, सबकी आवाज के पर्दे में, आलोचना की पहली किताब आदि शामिल हैं।
एक नजर
-9 फरवरी 1940 को मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में जन्म।
-युवावस्था में इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ाई की।
-1963 में अंग्रेजी साहित्य में उन्होंने स्नातकोत्तर की डिग्री ली।
-1962-63 तक वे एक स्थानीय अखबार में उप-सम्पादक रहे।
-1963 से 1975 तक मध्यप्रदेश तथा दिल्ली के कॉलेजों में प्राध्यापक रहे।
-खरे ने जवाहरलाल नेहरू स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय में दो साल तक वरिष्ठ अध्येता के रूप में काम किया।
-‘द पीपुल्स एण्ड द सेल्फ’ खरे का अंग्रेजी अनुवादों का निजी संग्रह है।
Updated on:
19 Sept 2018 07:21 pm
Published on:
19 Sept 2018 07:20 pm
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