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Diwali 2022: पर्व एक-रंग अनेक, हिंदू-सिख, बौद्ध-जैन सभी करते हैं इन देवी-देवताओं की पूजा

दीपावली पर्व एक, रंग अनेक, हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन धर्म अपने तरीके से मनाते हैं त्यौहर...

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भोपाल। दिवाली प्रमुख और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इस त्योहार को हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन धर्म के सभी लोग अपने-अपने तरीके से बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं। ज्यादातर लोगों को लगता है कि दिवाली पर सिर्फ लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है, लेकिन ऐसा नहीं है। दिवाली पर और भी कई देवी-देवाताओं की पूजा भी पूरे विधि-विधान के साथ की जाती है। दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश के अलावा भाई-दूज, भगवान कृष्ण, चित्रगुप्त व गोवर्धन की भी पूजा की जाती है।

देवी लक्ष्मी

दिवाली पर हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी की पूजा पूरे रीति-रिवाज के साथ की जाती है। क्योंकि देवी लक्ष्मी धन और समृद्धि का प्रतीक हैं। देश के पूर्वी हिस्से में, कई लोग देवी के स्वागत के लिए अपने दरवाजे खुले रखते हैं। जिससे वे उनके घरों में प्रवेश कर सकें। असम, ओडिशा और बंगाल में, लक्ष्मी पूजा दशहरा या विजया दशमी के पांच दिन बाद आयोजित की जाती है।

गणेश जी

इस दिन भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की एक साथ पूजा की जाती है। माना जाता है कि देवी लक्ष्मी ने देवी पार्वती के पुत्रों में से एक को गोद लिया था क्योंकि वह मां बनने के सुख का अनुभव करना चाहती थी और उसकी देखभाल करने का वादा किया था। उन्होंने कहा था कि उनके साथ हमेशा उनके पुत्र की पूजा की जाएगी। इसलिए दिवाली पर गणेश- लक्ष्मी की पूजा सौभाग्य, धन, समृद्धि का प्रतीक है।

भगवान कृष्ण

दिवाली को लेकर कई मिथक और किंवदंतियां बनी हुई हैं जो बुराई पर अच्छाई की जीत की कहानी बयां करती हैं। ऐसी ही एक कहानी भगवान कृष्ण की है। जिनकी पूजा दिवाली पर की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन, भगवान कृष्ण ने राक्षस नरकासुर को हराया था और उस राज्य के लोगों का भय दूर करने के लिए भगवान कृष्ण ने उन्हें हरा दिया और यह दिन नरक चतुर्दशी व छोटी दिवाली के रूप में मनाया जाता है।

भाई दूज

दिवाली के दो दिन बाद भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। इस पर्व की पौराणिक कथा सूर्य पुत्र, यम व पुत्री यमुना से जुड़ी है। कहा जाता है कि यमुना के आदर सत्कार से प्रसन्न होकर यम ने वरदान दिया था कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन का आतिथ्य स्वीकार करेगा। उसके भाई को यम का भय नहीं रहेगा।

चित्रगुप्त पूजा

हिंदू धर्म में यमराज के खास सहयोगी चित्रगुप्त की पूजा कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को की जाती है। चित्रगुप्त ब्रह्मा के मानस पुत्र हैं। यम द्वितीया में शुभ मुहूर्त में कलम, दवात या फिर लेखनी को चित्रगुप्त के रूप में पूजा जाता है। कहा जाता है कि इस दिन कारोबार करने वाले लोग आय-व्यय को भगवान चित्रगुप्त के सामने रखते हैं और बिजनेस में तरक्की की कामना करते हैं।

गोवर्धन पूजा

दिवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है, इसे अन्नकूट महोत्सव भी कहते हैं। गोवर्धन पूजा भगवान श्री कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारंभ हुई है। जब श्रीकृष्ण ने ब्रज वासियों को मूसलाधार वर्षा से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया था। इस दिन छप्पन भोग बनाए जाते हैं और परिवार के लोग इकट्ठे होकर गोवर्धन और श्री कृष्ण की पूजा के बाद एकसाथ भोजन करते हैं।

गाय पूजन

हिंदू धर्म में गोवत्स द्वादशी पर दिवाली के दौरान गायों की पूजा की जाती है। जो विशेष रूप से महाराष्ट्र में मनाया जाता है। इसे वासु बरस के नाम से भी जाना जाता है। यह एक धन्यवाद उत्सव है जिसमें गायों को मानव जाति को पोषण प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया जाता है। कुछ राज्यों में इसे वाघ भी कहा जाता है। इसे नंदिनी व्रत भी कहा जाता है और गायों और बछड़ों को गेहूं के उत्पाद खिलाए जाते हैं।

गुरु हरगोविंद

सिखों के लिए, दिवाली अक्सर उनके त्योहार-बंदी छोर दिवस के साथ मेल खाती है। माना जाता है कि इस दिन सिखों के छठें गुरु, गुरु हरगोविंद ने ग्वालियर किले से 52 राजाओं को रिहा कराया था। उन्हें कई माह तक मुगल सम्राट जहांगीर ने कैद कर रखा था। इससे पहले, गुरु हरगोविंंद साहिब के पिता गुरु अर्जन देव को गिरफ्तार कर लिया गया था और जहांगीर ने उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए कहा था।

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