
भोपाल। यूनेस्को ने पर्यटन विभाग के साथ मिलकर ग्वालियर और ओरछा की हिस्टोरिक अर्बन लैंडस्केप प्लान तैयार किया है। देश में पहली बार किसी शहर की इस तरह की प्लानिंग की गई है। टीम ने करीब दो साल तक इसे लेकर स्टड की। इसका फाइनल ड्राफ्ट अगले माह शासन को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद ऐतिहासिक इमारतों के आसपास निर्माण का अलग से मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। धरोहरों के आसपास निर्माण के लिए विशेष अनुमति लेना होगा। गगनचुंबी इमारतों का भी एक निश्चित दायरे में निर्माण नहीं हो पाएगा। यूनेस्को ने पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर इन दो शहरों का चुनाव किया था। इससे शहर के ऐतिहासिक, पौराणिक महत्व को ध्यान में रखकर विकास और पर्यटन गतिविधियां होंगी।
सांस्कृतिक धरोहरों के बचाव की पहल
यूनेस्को की टीम ने दोनों शहरों के पुराने गली-मोहल्लों के एतिहासिक घर और अन्य इमारतों का देखा। वहां समय के साथ विकास के लिए किस तरह से परिवर्तन हो रहा है, इसे नोट किया गया। यूनेस्को के सलाहकार निशांत उपाध्याय ने बताया कि ग्वालियर के सराफा क्षेत्र में कई ऐतिहासिक इमारतें हैं। वहां अब जो नए निर्माण किए जा रहे हैं, इसमें आधुनिक बिल्डिंग बनने लगी है। इससे नई और पुरानी इमारतों का सांमजस्य अलग ही दिखाई देता है। यहां साइन बोर्ड भी सुंदरता को ध्यान में रखकर नहीं लगाए गए। यदि इमारतों की ऐतिहासिकता को ध्यान में रखकर निर्माण होगा तो उसकी खूबसूरती बनी रहेगी।
हेरिटेज इंपैक्ट एसेसमेंट के बाद मंजूर
निशांत ने बताया कि हमने सुझाव दिया है कि नए निर्माण के लिए हेरिटेज इंपैक्ट एसेसमेंट के बाद भी विकास कार्यों के लिए मंजूरी मिले। पूरे शहर के लिए एक जैसा मास्टर प्लान लागू ना हो। क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों को देखते हुए मास्टर प्लान तैयार किया। हेरिटेज एरिया बेस्ड डेलवपमेंट प्लान लागू करना होगा। तभी सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित रखा जा सकेगा। इनके आसपास की इमारतों में उपयोग होने वाले मटेरियल की भी जांच की जानी होगी, इससे पता चल सकेगा कि कहीं ये धरोहरों को नुकसान तो नहीं पहुंचा रही। वहीं, मूर्त के साथ अमूर्त कला और जंगल को भी सुरक्षित रखने के लिए गाइडलाइन बनाने का सुझाव दिया है।
संगीत बनेगा पहचान
पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि ग्वालियर को विश्व स्तर पर अलग पहचान दिलाने के लिए यूनेस्को की कि्रएटिव सिटी नेटवर्क में शामिल करने के लिए भी प्रस्ताव तैयार किया गया है। ग्वालियर घराने का संगीत विश्व प्रसिद्ध है। इससे यहां की ध्रुपद गायन शैली को अलग पहचान मिलेगी। अभी इस लिस्ट में देश के 6 शहर शामिल हैं। वहीं, वर्ल्ड हेरिटेज हिस्टोरिक सिटी में शामिल कराने के लिए भी प्रस्ताव तैयार किया गया है।
Published on:
18 Apr 2023 10:16 pm
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