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इतिहास बन चुकी छोला मैदान की रामलीला, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी निभाते थे किरदार

बंसत पंचमी पर 63 सालों से चली आ रही छोला मैदान पर रामलीला, दस दिन बाद होगा रावण का अतिशबाजी के साथ दहन।

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इतिहास बन चुकी छोला मैदान की रामलीला, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी निभाते थे किरदार

भोपाल। बसंत के आगमन पर पंचमी के दिन व पंचमी से प्रदेश में कुछ स्थानों पर रामलीला या रावण दहन किया जाता है। जिसमें विदिशा की रामलीला की तरह ही भोपाल के छोला मैदान पर पिछले ६३ सालों से रामलीला ही नहीं हो रही है, बल्कि इसके समापन पर परम्परागत तरीके से अतिशबाजी के साथ रावण दहन भी किया जाता है। छोले से लेकर सूखी सेवनिया व इससे लगे गांव की हजारो की संख्या में श्रद्धालु रामलीला सुनने आते है। जिसका शुभारंभ बसंत पंचमी के दिन से होगा। सूखी सेवनिया के पूर्व सरपंच विक्रम मीना ने बताया कि इसकी शुरूआत हमारे दादा व सूखी सेवनिया गांव के पटेल स्व. जगन्नाथ सिंह मीना ने १९५६ में किया था। इसके बाद मेरे पिता व सूखी सेवनिया के पूर्व संरपच स्व, श्यामसिंह मीना ने १९७३ से इसकी जिम्मेदारी उठाई। उनके बाद मैंने २००६ से इसकी जिम्मेदारी ली है, जो अब भी निरंतर जारी है। इस आयोजन को लेकर बसंती रामलीला मेला समिति के नाम से १९७९ से पंजीकृत समिति है।
-इकलौता आयोजन के बाद भी उपेक्षा का शिकार
विक्रम मीना बताते है कि ६३ साल से निरंतर इसका आयोजन बसंत पंचमी से हो रहा है। इसके बाद भी शासन से इस दस दिन के आयोजन दशहरा पर्व व मेला आयोजन के लिए शासन से कोई आर्थिक मदद नहीं दी गई है, जबकि विजय दशमी आयोजन को लेकर शहर के दो दर्जन से अधिक रावण दहन आयोजन को स्थानीय शासन से लेकर जिला सरकार आयोजन के लिए राशि दी जाती रही है। विदिशा के बाद सिर्फ यहीं परम्परागत यह आयोजन चला आ रहा है।

-स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी निभाते रहे किरदार
हिंदू उत्सव समिति के पूर्व अध्यक्ष व कुशवाह समाज के प्रांतीय अध्यक्ष नारायण सिंह कुशवाह ने बताया कि यह शहर की सबसे पुरानी रामलीला है। भेल और जुमेराती में भी सत्तर के दशक में रामलीला शुरू हुई थी। जबकि यह १९५६ से हो रही है। बचपन से हम इसे देखते ही नहीं आ रहे, बल्कि समिति की व्यवस्था में सक्रिय भी रहे है। इसमें स्वंतत्रता संग्राम सेनानी स्व, बाबूलाल भानपुर हनुमान का किरदार निभाते थे, वहीं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व.धन्ना लाल कुशवाह रावण, मेधनाथ व कुंभकरण के किरदार निभाते थे।
-ऐसे शुरू होगा आयोजन
बसंत पंचमी पर रविवार को दोपहर झंडा चढ़ेगा और शाम दो बजे से छह बजे तक रामालीला मंचन शुरू हो जाएगा। बीस फरवरी को रावण दहन धूमधाम के साथ होगा। जिसमें मेला लगने के साथ ही आतिशबाजी का आयोजन भी किया जाएगा।