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 कूलर के हनी पैड में छिपा है डेंगू

सावधान रहिए 2 खस की ठंडक लेना ही मुफीद, नकली घास में पनपता है लार्वा

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Krishna singh

Apr 16, 2016

kular

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प्रवीण श्रीवास्तव. भोपाल.
सावधान रहिए, आपके कूलर में खस की जगह हनी पैड लगे हैं तो घर में डेंगू का लार्वा दुबका होने की आशंका है। हनी पैड के बीच में जानलेवा लार्वा पनपने की स्थितियां ज्यादा मुफीद रहती हैं। यह तथ्य शहर में तमाम मोहल्लों में जांच के बाद सामने आया है। दरअसल कूलर में लगाए जाने वाले घास या खस के पैड एक बरस में खराब हो जाते हैं, लेकिन हनी पैड कई साल तक काम करते हैं। ऐसे में लोगों ने हनी पैड को तरजीह देना शुरू कर दिया है। यह बचत घातक है। वजह यहकि सामान्य पैड के मुकाबले हनी पैड में नमी ज्यादा होती है। एेसे में हनी पैड में डेंगू के लार्वा खस और सामान्य घास के पैड की तुलना में आसानी से विकसित होते हैं। उपयोग के बाद जब कूलर बंद कर रखते हैं तो लार्वा पैड में दुबका रहता है और अगले बरस पानी मिलते ही सक्रिय हो जाता है।


गत्ते और नकली घास से बनते हैं हनी पैड

हनी पैड को विशेष प्रकार के गत्ते और फाइबर रेशों (कृत्रिम घास) से तैयार किया जाता है। सामान्य घास के पैड जहां दो सेंटीमीटर चौड़े होते हैं वहीं हनी पैड की मोटाई दो से तीन इंच तक होती है। एक बार लगाने पर पांच साल तक यह खराब नहीं होने के साथ ही महंगे भी होते हैं।


दो और मरीज मिले

शुक्रवार को हुए लार्वा सर्वे के दौरान एक दर्जन घरों में डेंगू का लार्वा पाया गया। वहीं दो मरीजों में डेंगू पॉजीटिव पाया गया। दोनों का उपचार निजी अस्पतालों में चल रहा है। शहर में डेंगू मरीजों की संख्या छह हो गई है।


घरों में डेंगू के लार्वा सबसे ज्यादा कूलर में ही पाया जाता है। लोग कई कई दिनों तक कूलर को साफ नहीं करते, इससे मच्छर पनपने लगते हैं। हनी पैड में मच्छर ज्यादा बड़े होते हैं, जिस कारण डेंगू के लार्वा पनपने की संभावना बढ़ जाती है।

-डॉ. वीणा सिन्हा, सीएमएचओ