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हनीट्रैप हसीना केस – 5 आरोपियों से पूछताछ, हसीनाओं के जाल में फंसे नेता और अफसर

honey trap sit investigation : श्वेता विजय जैन, आरती दयाल, बरखा भटनागर और श्वेता स्वप्निल जैन से SIT ने की पूछताछ, हसीनाओं के जाल में फंसे नेता और अफसर

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भोपाल. हनीट्रैप मामले Honeytrap case में SIT प्रमुख संजीव शमी ने 5 आरोपी श्वेता विजय जैन, आरती दयाल, बरखा भटनागर और श्वेता स्वप्निल जैन ( Shweta Vijay Jain, Shweta Swapnil Jain, Barkha, Aarti Dayal and Monika Yadav ) से जुड़े लोगों से पूछताछ की। शनिवार को हनीट्रैप मामले में पांचों आरोपियों को इंदौर से भोपाल लाया गया। यहां एसआईटी प्रमुख संजीव शमी ने श्वेता विजय जैन की कुंडली खंगालने के लिए उसे देर शाम सागर ले जाया गया।


एसआईटी Special Investigation Team उसे लेकर राहतगढ़ के एक फॉर्म हाउस पहुंची, फिर खुरई रवाना हो गई । वहां टीम को एक एनजीओ संचालक से पूछताछ करनी थी। दूसरी टीम आरती दयाल को लेकर छतरपुर जाने वाली थी, लेकिन देर रात छतरपुर नहीं पहुंची। हनी ट्रैप में रूपा अहिरवार का भी नाम आया है। वह आरती के जरिए उनके गिरोह में आई थी। बरखा भटनागर और श्वेता स्वप्निल जैन को भोपाल में ही रखा गया है।

डीजी बोले- हनी टै्रप की जांच के सुपरविजन से डीजीपी को हटाएं

Madhya Pradesh honeytrap case - हनीट्रैप मामले में पुलिस महानिदेशक वीके सिंह के साथ टकराव की स्थिति में आए एसटीएफ और सायबर सेल के डीजी पुरुषोत्तम शर्मा ने केरल से लौटने के बाद शनिवार को भी खुलकर बयानबाजी जारी रखी। उन्होंने मीडिया से कहा, हनी टै्रप की जांच के लिए गठित एसआईटी के सुपरविजन से डीजीपी सिंह को हटाया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने इसे व्यक्तिगत मत बताया, लेकिन कहा कि एसआईटी का गठन शुरुआत से ही विवादित रहा है।

एसटीएफ प्रमुख ने केरल से लौटने पर फिर लगाए आरोप, कहा- एसआईटी शुरुआत से ही विवादों में

पहले आईजी सीआईडी को एसआईटी प्रमुख बनाया। इसके बाद एडीजी स्तर के अधिकारी को कमान सौंपी गई। इसके सदस्य भी बदल दिए गए। इससे डीजीपी की भूमिका विवाद में आ जाती है। एसआईटी की जिम्मेदारी किसी डीजी स्तर के अफसर को दी जाए। इससे निष्पक्ष जांच संभव होगी। उधर, एसआईटी अपनी जांच मध्यप्रदेश तक सीमित रखेगी। पहले जांच का दायरा प्रदेश से बाहर भी बढ़ाने पर विचार हुआ था, लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देशों के बाद जांच प्रदेश तक सीमित रहेगी। दायरा बढ़ाने से जांच सीबीआई के पास जा सकती है। बताया जाता है कि राज्य सरकार नहीं चाहती कि जांच केन्द्रीय एजेंसी के पास जाए।

एसोसिएशन अध्यक्ष के घर भेजी चिट्ठी

स्पेशल डीजी शर्मा ने कहा, सायबर और एसटीएफ के सभी काम संवेदनशील होते हैं। वे कहां रहते हैं, क्या करते हैं, उनकी लोकेशन सार्वजनिक नहीं करना चाहिए। इसे सार्वजनिक किया तो टीम के सदस्यों को खतरा हो सकता है। गाजियाबाद में लिए गए फ्लैट को लेकर डीजीपी सिंह की आपत्ति हो सकती है, लेकिन उसको हनीट्रैप से जोडऩा कहां तक सही है। डीजीपी की आपत्ति के बाद उस फ्लैट को मैंने खाली भी कर दिया है। इसकी आड़ में मेरी चरित्र हत्या की साजिश हो रही है। डीजीपी ने मेरे खिलाफ मुख्यालय में पर्चे भी बंटवाए हैं, मेरे पास इसके सबूत भी हंै। मैंने अपनी आपत्ति के साथ आईपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय यादव के घर पर अपनी चिट्ठी भेज दी है। कल मेल किया था, जो वापस आ गया था। आज मैंने चिट्ठी उनके घर भेज दी है।

पत्र विधिवत आएगा तो करेंगे विचार

आईपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय यादव ने पत्रिका से कहा, डीजी शर्मा की चिट्ठी वाट्सएप पर मुझे मिली थी। विधिवत रूप से आएगी तो उस पर विचार किया जाएगा। पुलिस के अन्य अधिकारी इस मामले में बोलने से कतरा रहे हैं। गृह विभाग के प्रमुख सचिव एसएन मिश्रा से जब इस विवाद के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। डीजीपी सिंह ने भी इस मामले में चुप्पी साध रखी है। उन्होंने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी।