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बेरोक-टोक दौड़ रहे रसूखदारों के हूटर-सायरन लगे वाहन

- प्रतिबंध के बावजूद गाडिय़ों में लगाई जा रही काली फिल्म, हूटर, सायरन- पुलिस की नजर से बचने के लिए हूटर, सायरन लगवा रहे बोनट के अंदर- अचानक तेज आवाज से बहक जाते दूसरे वाहन चालक, बिदकते मवेशी- ऐसे वाहनों का आपराधिक तत्व कर सकते दुरुपयोग, नहीं की जाती जांच

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बेरोक-टोक दौड़ रहे रसूखदारों के हूटर-सायरन लगे वाहन

बेरोक-टोक दौड़ रहे रसूखदारों के हूटर-सायरन लगे वाहन

भोपाल. एक ओर तो दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट और दस्तावेज को जगह-जगह चेक कर वसूली करना धंधा सा बना लिया है, लेकिन दूसरी तरफ रसूखदारों पर हाथ डालने की पुलिस, परिवहन विभाग की हिम्मत नहीं होती। प्रतिबंधित होने के बाद भी राजधानी में हूटर सायरन व काली फिल्म लगी गाडिय़ां जगह-जगह घूम रहीं हैं और इनका कारोबार भी धड़ल्ले से चल रहा है।

वैसे तो शहर के कई क्षेत्रों में यह कारोबार चलता है, लेकिन मुख्य रूप से एमपी नगर, पुराना भोपाल और गोविंदपुरा व सिटी एरिया में किया जा रहा है। दुकानों पर हूटर-सायरन और काली फिल्म कोई भी जाकर गाड़ी में लगवा सकता है। इसके लिए दुकानदार कुछ भी नहीं मांगते। प्रतिबंधित काली फिल्म और बिना पात्रता हूटर-सायरन लगाने के पीछे यह भी एक बड़ा कारण है। पत्रिका संवाददाता ने राजधानी में हूटर-सायरन व काली फिल्म लगी गाडिय़ों और इसके कारोबार की पड़ताल की।

एमपी नगर जोन-2 स्थित अम्बर कॉम्पलेक्स में एक हूटर-सायरन वाले से बात की तो उसने बताया कि एसयूवी 500 गाड़ी के लिए हूटर-सायरन, डंडा, एम्पलीफायर, माइक सब सामान लगाने के लिए 8500 रुपए बताए। गाड़ी के ऊपर और बोनट के अंदर हूटर-सायरन लगाने के रेट अलग होते हैं। हूटर-सायरन को फिट करने के लिए पहले ऊपर एक रॉड लगाई जाएगी, जिसपर हूटर-सायरन लगाया जाएगा।

नीचे एक एम्पलीफायर लगाया जाएगा। चुनाव आदि में संबोधित करने के लिए माइक काम आएगा। बोनट वाला सादा हूटर-सायरन 1200-1500 रुपए में लग जाता है। उसमें रॉड, एम्पलीफायर, माइब किसी की जरूरत नहीं पड़ती है। बोनट के अंदर हूटर-सायरन फिट करके केवल एक स्विच गाड़ी के अंदर लगाना पड़ता है।

ये मिला हाल
- मालवीय नगर स्थित एक विधायक के बंगले पर वाहन संख्या एमपी-04 सीक्यू-5600 और दूसरी गाड़ी एमपी-04-सीएन-0245 पर हूटर-सायरन लगे हुए।
- भाजपा प्रदेश कार्यालय पर सफेद रंग की गाड़ी पर रजिस्ट्रेशन नम्बर की जगह अध्यक्ष, कर्मचारी संघ नगर परिषद, अमरकंटक लिखा था, हूटर-सायरन भी लगे थे।
- आरटीओ कार्यालय परिसर में बाहर एमपी-04-सीपी-2367, एमपी सीएफ 0664 पर काले रंग की फिल्म चढ़ी हुई थी।
- आरटीओ कार्यालय के बाहर लाल रंग की मारुति ओमनी वैन एमपी04एचसी 8515 पर बड़ी एलईडी लाइट लगी थी।
- सिंधु भवन, शिवाजी नगर के पास सफेद रंग की गाड़ी संख्या एमपी 04 सीएस 5026 पर अध्यक्ष अधिमान्य पत्रकार महासंघ की तख्ती और ऊपर सायरन-हूटर व लाइट्स लगी थीं।

इसी तरह इसी क्षेत्र में एक काली फिल्म लगाने वाले से बात की तो उसने बताया कि काली फिल्म भी अलग-अलग क्वालिटी और कलर में फिल्म आती हैं। कम डार्कनेस वाली में कोरियन एक हजार रुपए और गरवारे की 1500 रुपए में आती है। हल्की क्वालिटी की डार्क ब्लैक फिल्म तो 750 रुपए में भी लगा देते हैं। एक गाड़ी में फिल्म ब्लैक लगाने में कम से कम दो घंटे का समय लगता है। सुबह दस बजे से लेकर शाम चार-पांच बजे तक काम चलता है।

इन पर भी डालें नजर
- एमपी नगर में हूटर-सायरन बेचने वाले प्रतिष्ठान : 35
- पुराने शहर में हूटर-सायरन बेचने वाले प्रतिष्ठान : 15
- गोविंदपुरा क्षेत्र में हूटर-सायरन बिक्री की दुकानें : 10
- एमपी नगर में काली/डार्क फिल्म बिक्री वाली दुकानें : 35
- पुराने शहर में काली/डार्क फिल्म बिक्री वाली दुकानें : 35
- गोविंदपुरा क्षेत्र में काली/डार्क फिल्म बिक्री वाली दुकानें : 35
- एक दुकान पर वर्तमान में हूटर-सायरन की औसत बिक्री : 2-4
- एक दुकान पर वर्तमान में डार्क/डिजायनर फिल्म का काम : 4-5

अंडर बोनट हूटर-सायरन की डिमांड अधिक
वैसे तो रुतबे-रुसूख दिखाने वाले वाहन पर ऊपर बड़ी-बड़ी लाइट व हार्न लगाना पसंद करते हैं, लेकिन अब हाइटेक युवा बोनट के अंदर लगने वाला हूटर-सायरन ज्यादा पसंद करते हैं। इसका एक तो यह फायदा है कि यह ऊपर लगने वाले हूटर से कई गुना सस्ता है। दूसरा, यह बोनट के अंदर होने से दिखाई नहीं देता, जिससे चेकिंग के दौरान भी आराम से निकल सकते हैं। इसको अंदर लगे स्विच के जरिए ऑपरेट किया जाता है।

निजी वाहन पर नहीं लगा सकते हूटर-सायरन
हूटर-सायरन कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकृत वाहनों पर ही लगाए जा सकते हैं। निजी वाहनों पर इन्हें कोई भी नहीं लगा सकता। डार्क फिल्म को सन कंट्रोल फिल्म के नाम बेचने वाले रख लेते हैं। वाहनों में प्रतिबंधित डार्क फिल्म व अनाधिकृत हूटर-सायरन को हटाने अभियान चलाकर इनके विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। गत वर्ष एक सप्ताह के विशेष अभियान में 1004 वाहनों पर कार्रवाई करते हुए 9.67 लाख रुपए की वसूली की गई थी। अभी मीटिंग में हूं, इस वर्ष के आंकड़े बाद में दे सकता हूं।
- संजय तिवारी, आरटीओ