
How are the symptoms of viral meningoencephalitis in children
भोपाल. एमपी में कोरोना से राहत मिली है और इंफ्लुएंजा के मामले भी अभी सामने नहीं आ रहे हैं लेकिन बच्चों के लिए नई दिक्कत खड़ी हो गई है। बच्चे वायरल मेनिगोएन्सेफेलाइटिस जैसी खतरनाक बीमारी से ग्रस्त हो रहे हैं। सीजनल फ्लू और टाइफाइड के मरीज भी बढ़ रहे हैं जिससे ओपीडी में भीड़ लग रही है।
राजधानी में लगातार बारिश के चलते वायरस व बैक्टीरिया सक्रिय हैं। ऐसे में मौसम और गंदा पानी मिलकर लोगों को बीमार कर रहा है। वायरल के मरीज एक सप्ताह के अंदर 25 फीसदी तक बढ़े हैं। वहीं टाइफाइड के भी मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है।
एम्स, हमीदिया और जेपी में गुरुवार को 7 हजार से ज्यादा मरीज पहुंचे। साथ ही सीजनल फ्लू के मरीज भी तीन से चार दिन में ठीक हो रहे हैं।
पीडियाट्रिक विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शर्मिला रामटेके ने बताया कि किसी भी तरह की वायरल बीमारी के उपाय साफ सफाई है। पानी उबाल कर पीना चाहिए। साथ ही अभी भी बाहर व भीड़ वाले क्षेत्रों में जाने पर मास्क का प्रयोग करना चाहिए।
अस्पतालों के बाल रोग विभाग में भी सीजनल बीमारियों से ग्रस्त बच्चों की संख्या डेढ़ गुना तक बढ़ गई है। इसमें बच्चों के दिमाग पर प्रभाव डालने वाली जानलेवा बीमारी वायरल मेनिगोएन्सेफेलाइटिस भी शामिल है। इस सप्ताह की शुरूआत से रोजाना इस बीमारी के पांच से छह मरीज सामने आ रहे हैं।
इससे ग्रसित बच्चों में हल्का फीवर, अचेत होना और दौरे पडऩे जैसे लक्षण नजर आते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इसके इलाज के लिए समय कम मिलता है। यह बेहद तेजी के साथ बच्चों के शरीर में गंभीर नुकसान पहुंचाता है।
मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. योगेन्द्र श्रीवास्तव के अनुसार उल्टी दस्त, तेज बुखार, खांसी और टाइफाइड के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। टाइफाइड पानी और खाने में गंदगी से होता है। वायरल से मरीजों को सर्दी, नाक बहना, बुखार या थकान जैसे लक्षण तीन दिन से एक हफ्ते में ठीक हो जाते हैं।
Published on:
21 Jul 2023 10:47 am
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