
चित्रकूट में श्रीरामचंद्र पथगमन न्यास की बैठक बुलाई गई है।
रामलला प्राण प्रतिष्ठा के दिन का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। मध्य प्रदेश की सरकार भी राज्य को राममय बनाने की तैयारी में लगी है। राज्य की सभी पंचायतों में श्रीराम कथा सप्ताह मनाने की कवायद की जा रही है।
इसके साथ ही राज्य सरकार ने श्रीरामचंद्र पथगमन न्यास की पहली बैठक चित्रकूट में करने का निर्णय लिया है। खास बात यह है कि चित्रकूट में भगवान राम ने अपने वनवास का सबसे ज्यादा वक्त बिताया था। यही कारण है कि भगवान श्रीराम की कर्मभूमि चित्रकूट में श्रीरामचंद्र पथगमन न्यास की बैठक बुलाई गई है।
न्यास की बैठक 16 जनवरी को होगी जिसमें सीएम डॉ. मोहन यादव के साथ 33 न्यासी मंथन करेंगे। इसी के साथ ही राम वन गमन पथ की परिकल्पना 15 साल बाद आकार लेने की उम्मीद भी जागी है। राम वन गमन पथ की परिकल्पना को साकार करने की कवायद वर्ष 2008 से शुरू हुई थी।
बैठक में पांच बिंदुओं का एजेंडा तय किया गया है। इसमें न्यास से संबंधित संक्षिप्त जानकारी पेश की जाएगी। इसके बाद न्यास के क्षेत्र में किए जाने वाले कार्यों के अंतर्गत हो रहे कामों की जानकारी दी जाएगी। इन कामों में अमरकंटक (प्रसाद योजनांतर्गत) में प्रस्तावित काम, चित्रकूट में कामदगिरि परिक्रमापथ एवं अन्य प्रस्तावित काम, बृहस्पतिकुण्ड के प्रस्तावित काम, चित्रकूट (पवित्र मंदाकिनी) के घाटों का विकास कार्य, घाटों के विकास कार्यों के डीपीआर का प्रस्तुतिकरण, लीला गुरुकुल प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना के प्रस्ताव का प्रस्तुतिकरण होगा। इसके बाद न्यासी सदस्यों के सुझाव भी लिए जाएंगे।
प्रभु श्रीराम ने वनवास के साढ़े 11 साल चित्रकूट में गुजारे हैं। इन वर्षों के दौरान रामचरित्र से जुड़े कई स्थल विकास की बाट जोह रहे हैं। वर्ष 2008 में भाजपा सरकार के समय राम वन गमन पथ की परिकल्पना की गई थी।
अल्प समय के लिए कांग्रेस की सरकार में एमपीआरडीसी ने आठ फीट कच्चे रास्ते की डिजाइन तय की थी, जिसे बाद में भाजपा सरकार आने पर पर्यटन मंत्री ने निरस्त कर दिया था। अब न्यास की बैठक के बाद यह उम्मीद जागी है कि राम-वन-गमन पथ का रोडमैप और डिजाइन पर फैसला हो सकेगा।
Published on:
14 Jan 2024 01:30 pm
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