शरीर छोड़ने के बाद अपने गंतव्य स्थान तक जाने के लिए आत्मा को वैतरणी नदी पार करनी होती है। यह नदी मानव मल-मूत्र, मरे हुए कीड़ों, हड्डियों, रक्त, मांस से भरी है। जिन लोगों के पाप अतुलनीय हैं, जिन्होंने पूरी जिंदगी अपनी शक्तियों का गलत प्रयोग किया है, दूसरों का दमन किया है, उन्हें मरने के बाद इसी नदी के घटकों पर जीवन जीना होता है।