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जानिए कौनसी गलती की किस नर्क में मिलेगी कैसी सजा

ईश्वर पर विश्वास करने वाले मानते हैं स्वर्ग और नर्क को हकीकत...

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sanjana kumar

Mar 16, 2016

garun puran

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भोपाल। बहुत से लोग मानते हैं कि अच्छे और बुरे कर्मों का लेखा-जोखा इसी जन्म में भुगतना होता है, जबकि कुछ इसे पुनर्जन्म के लिए छोड़ना पसंद करते हैं। लेकिन ईश्वर पर विश्वास करने वाले लोग मानते हैं कि भगवान के हाथ में हमारे हर कर्म का हिसाब होता है।

हिन्दू धर्म के अनुसार कहा जाता है कि हमारे अच्छे कर्म हमें जीवन की कठिनाइयों से मुक्त करेंगे, वहीं हमारे बुरे कर्म मृत्यु के बाद भी हमारा साथ नहीं छोड़ेंगे। गरुण पुराण, मृत्यु के पश्चात पढ़ा जाने वाला यह पुराण कर्मों के हिसाब का ही संकलन है। इसमें अलग-अलग नर्कों का जिक्र भी है, जहां हमें अपने पापों की सजा मिलती है। आइए जानें क्या हैं वो नर्क और कौन सी हैं वो सजाएं...

अंधात्मत्स्रम नर्क

यह नर्क उन पति-पत्नियों की आत्माओं के लिए हैं, जो अपने साथी को लाभ या उपभोग की वस्तु समझते थे। यहां भी उनकी आत्माओं को मारा जाता है, यह सिलसिला बहुत तेज गति से चलता है।

तमिश्रम नर्क

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वे लोग जो दूसरों की संपत्ति हड़प लेते हैं, उनकी आत्मा को बंदी बनाकर यमराज तमिश्रम नामक नर्क में लाते हैं। यहां उन्हें तब तक मारा जाता है जब तक कि वे बेहोश ना हो जाएं। होश में आने के बाद फिर से उन्हें लहूलुहान किया जाता है। यह सिलसिला तब तक चलता रहता है जब तक कि सजा का समय समाप्त ना हो जाए।

कुंभीपाकम नर्क

यह बहुत खतरनाक नर्क है, यहां उन लोगों की आत्माओं को लाया जाता है़, जिन्होंने अपने शौक के लिए जानवरों की हत्या की होती है। इस नर्क में उन्हें खौलते तेल में उबाला जाता है।

असितापत्रम नर्क

अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ने वाले, जिम्मेदारियों से भागने वाले लोगों की आत्माएं इस नर्क में लाई जाती हैं। यहां उन्हें तब तक चाकुओं से छलनी किया जाता है जब तक कि वे बेहोश नहीं हो जाते।


कलासूत्रम नर्क

इस नर्क की गर्मी बर्दाश्त करने लायक नहीं होती। यहां वे आत्माएं आती हैं, जिन्होंने अपने जीवन में कभी बड़ों का आदर-सम्मान नहीं किया होता। इस नर्क में उन्हें सजा सीमा समाप्त होने तक रखा जाता है।

सुकरमुखम नर्क

शासन करने वाले लोग जो दूसरों को सिर्फ अपने हाथ की कठपुतली समझते थे, उनके साथ निर्दयता से बर्ताव करते थे उनकी आत्माओं को इस नर्क में लाकर कुचला जाता है।

वैतरणी नर्क

शरीर छोड़ने के बाद अपने गंतव्य स्थान तक जाने के लिए आत्मा को वैतरणी नदी पार करनी होती है। यह नदी मानव मल-मूत्र, मरे हुए कीड़ों, हड्डियों, रक्त, मांस से भरी है। जिन लोगों के पाप अतुलनीय हैं, जिन्होंने पूरी जिंदगी अपनी शक्तियों का गलत प्रयोग किया है, दूसरों का दमन किया है, उन्हें मरने के बाद इसी नदी के घटकों पर जीवन जीना होता है।

तप्तमूर्ति नर्क

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हीरे, जवाहरातों, सोने आदि जैसे बहुमूल्य रत्नों की चोरी करने वाले व्यक्ति की आत्मा सजा पाने के लिए इस नर्क में आती है। यह नर्क आग से जलता रहता है।

पुयोडकम नर्क

यह नर्क एक प्रकार का कुंआ है जो मानव मल-मूत्र, रक्त और अन्य घृणित वस्तुओं से भरा है। वे पुरुष जिन्होंने विवाह किए बगैर दूसरी महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध बनाए, उन्हें धोखा दिया, इस नर्क में लाए जाते हैं।

अविसी नर्क

यह नर्क उन लोगों के लिए है जो झूठी गवाही देते थे, अपने फायदे के लिए दूसरे को फंसाते थे। इस स्थान पर लाकर उन्हें बहुत ऊंचाई से नीचे फेंका जाता है।

ललाभक्षम नर्क

यह सजा उन पुरुषों के लिए जो अपनी पत्नी को अपना वीर्य पीने के लिए मजबूर करते हैं। यह कुंआ वीर्य से भरा होता है, यहां आने वाली आत्माओं को सजा की सीमा समाप्त होने तक वीर्य पर ही जीवित रहना होता है।

रौरवम नर्क

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इस नर्क में वो आत्माएं लाई जाती हैं, जिन्होंने ताउम्र दूसरों के संसाधनों पर राज किया है। यहां उन्हें सांपों द्वारा कटवाया जाता है, सांपों के द्वारा उन्हें बेइंतहा प्रताड़ित किया जाता है।

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