इन राशियों पर रहती है श्री हनुमान की विशेष कृपा ! क्या आपकी भी है ये राशि

रामभक्त हनुमान को की बरसती है इन राशियों पर विशेष कृपा! क्या आप भी हैं इनमें शामिल...

By: दीपेश तिवारी

Published: 24 Apr 2018, 06:01 AM IST

भोपाल। हिन्दू देवी देवताओं के चालिसाओं में हनुमान चालीसा को सबसे विशेष स्थान दिया गया है। शिवजी के रुद्रावतार माने जाने वाले हनुमान जी को बजरंग बली, पवनपुत्र, मारुती नंदन, केसरी आदि नामों से भी जाना जाता है।

मान्यता है कि हनुमान जी अजर-अमर हैं। वहीं यह भी माना जाता है कि हनुमान जी को हरदिन याद करने और उनके मंत्र जाप करने से मनुष्य के सभी भय दूर होते हैं। हनुमान जी की साधना में हनुमान चालीसा को बेहद प्रभावशाली माना जाता है।

वहीं श्रीराम के परमभक्त श्री हनुमान को मंगलवार का कारक देव माना जाता है। माना जाता है कि हनुमानजी ना केवल विपत्तियों में अपने भक्त की रक्षा करते हैं बल्कि अष्ट सिद्धि व नौ निधि के दाता भी हैं।

वहीं श्री हनुमान के बारे में पंडित सुनील शर्मा का कहना है कि हम सभी जानते हैं कि श्रीराम भक्त हनुमान बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाने के साथ ही सभी पर कृपा करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी की 4 राशियों पर विशेष कृपा रहती है और वे इन चारों राशियों के जातकों से बहुत ही जल्द प्रसन्न होकर उन्हें चमत्कारी परिणाम देते हैं।

इन राशियों पर रहती है विशेष कृपा...
1. मेष राशि: माना जाता है कि सभी 12 राशियों में हनुमान जी सबसे ज्यादा मेष राशि पर ही अपनी कृपा बरसाते हैं। इस राशि के जातकों पर अगर कोई परेशानी आती है तो बजरंगबली तुरंत ही उसका निवारण कर देते हैं।

साथ ही यह भी माना जाता है कि इस राशि के लोगों की अपनी इच्छाशक्ति और ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता बहुत ही मजबूत होती है। हनुमान जी के आशीर्वाद से मेष राशि वाले अपनी बुद्धि कौशल और चतुराई भरी चाल से धन प्रवाह को अपने तिजोरी में समेटने में माहिर होते हैं।

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2. कुंभ राशि: श्री हनुमान के चमत्कार के दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा साक्षी कुंभ राशि के लोग होते हैं। इस राशि के लोग व्यावसायिक और व्यक्तिगत तौर पर अच्छी उपलब्धियां हासिल करते हैं। इनके पास हमेशा धन प्राप्त करने के लिए कई मौके आते हैं जिसका वह लाभ उठाते हैं। वाद-विवाद के मामले में इनकी जीत होती है और समाज में प्रतिष्ठा के पात्र होते हैं।

3. सिंह राशि: सिंह राशि वाले जातकों पर आने वाले संकटों से हमेशा बजरंग बली उनकी रक्षा करते हैं। किसी बड़ी दुर्घटना होने पर हमेशा वह अपने भक्तों को संकट से उबारते हैं। परिवार में हमेशा सामंजस्य रहता है। इस राशि के लोगों को हनुमानजी की कृपा से हमेशा धन लाभ होता है। नौकरी और व्यवसाय में हमेशा तरक्की होती है।

 

4. वृश्चिक राशि: हनुमान जी हमेशा इस राशि के लोगों पर धन और अपनी कृपा बरसाते हैं। जिसके चलते इस राशि के लोगों के किसी महत्वपूर्ण काम में एकाएक किसी भी तरह की कोई बड़ी बाधा नहीं आती है। नौकरी में हमेशा तरक्की मिलती है।

जानिये श्रीहनुमान की 'अष्टसिद्धियां', जो असंभव को भी बना देती हैं संभव :
'अष्‍ट सिद्धि नौ निधि के दाता, असवर वर दीन्‍ह जानकी माता'। गोस्‍वामी तुलसीदास जी द्वारा लिखी गई हनुमान चालीसा के इस दोहे को आपने ना जाने कितनी ही बार दोहराया होगा।

लेकिन, हममें से अधिकतर यह नहीं जानते हैं कि आखिर वे यहां किन-किन सिद्धियों की बात कर रहे हैं। या वे कौन सी हैं वो अष्‍ट सिद्धियां जिनके दाता महाबली हनुमान बताए गए हैं।

महाबली हनुमान ना सिर्फ 'अष्‍ट सिद्धियां' प्रदान करते हैं बल्‍कि नौ निधियों के प्रदाता भी हनुमान जी ही हैं। इन आठ प्रकार की सिद्धियों के बल पर इंसान ना सिर्फ भय और बाधाओं पर विजय प्राप्‍त करता है, बल्‍कि कई असंभव से लगने वाले कार्यों को भी बड़ी ही आसानी से पूरा कर सकता है।

ये हैं आठ प्रकार की सिद्धियां...
महाबली हनुमान द्वारा उपासकों को प्रदान की जाने वाली आठ प्रकार की सिद्धियां इस प्रकार हैं। (1) अणिमा (2) महिमा (3) गरिमा (4) लघिमा (5) प्राप्‍ति (6) प्राकाम्‍य (7) ईशित्‍व (8) वशित्‍व ।


1. अणिमा : महाबली हनुमान जी द्वारा प्रदान की जाने वाली ये सिद्धि बड़ी ही चमत्‍कारिक है। इस सिद्धि के पूर्ण हो जाने पर इंसान कभी भी अति सूक्ष्‍म रूप धारण कर सकता है। इस सिद्धि का उपयोग स्‍वयं महाकपि ने भी किया था।

हनुमान जी ने इस सिद्धि का प्रयोग करते हुए ही राक्षस राज रावण की लंका में प्रवेश किया था। महाकपि ने अणिमा सिद्धि के बल पर ही अति लघु रूप धारण करके पूरी लंका का निरीक्षण किया था। यही नहीं सुरसा नामक राक्षसी के मुंह में बजरंगबली ने इसी सिद्धि के माध्‍यम से प्रवेश किया और बाहर निकल आये।

2. महिमा: बजरंगबली द्वारा प्रदान की जाने वाली यह सिद्धि भी अत्‍यंत चमत्‍कारी है। इस सिद्धि को साध लेने वाला मनुष्‍य अपने शरीर को कई गुना विशाल बना सकता है। ये वही सिद्धि है जिसके प्रयोग से मारुतिनंदन ने सुरसा के मुंह से दुगना शरीर विस्‍तार किया था।

महिमा सिद्धि के बल पर ही महाकपि ने अपने शरीर को सौ योजन तक लंबा कर लिया था। और तो और लंका के अशोक वाटिका में उदास बैठी माता सीता को वानर सेना पर विश्‍वास दिलाने के लिए भी बजरंगबली ने इस सिद्धि का प्रयोग किया था।


3. गरिमा : अष्‍ट सिद्धियों के क्रम में तीसरी सिद्धि है 'गरिमा'। ये वो सिद्धि है जिसके पूर्ण होते ही इसके साधक अपना वजन किसी विशाल पर्वत से भी ज्‍यादा कर सकता है। महाभारत ग्रंथ में उल्‍लेख मिलता है कि अपने बल के घमंड में चूर कुंती पुत्र भीम के गर्व को हनुमान जी ने चूर-चूर कर दिया था। हनुमान जी एक वृद्ध वानर का रूप धारण कर के भीम के रास्ते में अपनी पूंछ फैलाकर बैठे हुए थे।

भीम ने देखा कि एक वानर की पूंछ रास्ते में पड़ी हुई है, तब भीम ने वृद्ध वानर से कहा कि वे अपनी पूंछ रास्ते से हटा लें। तब वृद्ध वानर ने कहा कि मैं वृद्धावस्था के कारण अपनी पूंछ हटा नहीं सकता, आप स्वयं हटा दीजिए। इसके बाद भीम वानर की पूंछ हटाने लगे, लेकिन पूंछ टस से मस नहीं हुई। भीम ने पूरी शक्ति ? का उपयोग किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस प्रकार भीम का घमंड टूट गया।


4. लघिमा : चौथी सिद्धि है 'लघिमा'। इस सिद्धि के पूर्ण हो जाने पर साधक अपना भार मयूर पंख से भी हल्‍का कर सकता है। अष्‍ट सिद्धियों के प्रदाता स्‍वयं हनुमान जी ने भी अशोक वाटिका में किया था, जब वह अशोक के पेड़ की शाखाओं में पत्‍तियों के बीच अपने शरीर को बेहद हल्‍का करते हुए राक्षसियों और रावण की नजर से छिपाए रखा था।


5. प्राप्ति : अष्‍ट सिद्धियों में से पांचवीं सिद्धि है 'प्राप्‍ति'। इसके बल पर साधक भविष्‍य में झांक सकता है और पशु-पक्षियों की भाषा समझ सकता है। सीता माता की तलाश में निकले महाबली हनुमान जी ने इसी सिद्धि को साधते हुए कई जंगली पशु-पक्षियों से माता सीता का पता भी पूछा था।

6. प्राकाम्य : छठी सिद्धि है 'प्राकाम्‍य'। यह सिद्धि बड़ी ही अनोखी और अविश्‍वसनीय चमत्‍कार करने की ऊर्जा प्रदान करती है। इसके प्रयोग से साधक पृथ्‍वी की गहराइयों में उतर सकता है, आकाश में उड़ सकता है और मनमुताबकि समय तक पानी के भीतर जीवित रह सकता है। ये वही सिद्धि है जिसके प्रताप के कारण स्‍वयं महाबली हनुमान जी चिरकाल तक युवा रहेंगे। अपनी इच्‍छा से किसी का भी देह धारण कर सकते हैं।


7. ईशित्व : सातवीं सिद्धि है 'ईशित्‍व'। इस सिद्धि को प्राप्‍त करने वाले मनुष्‍य में नेतृत्‍व के गुण पूरी तरह से निखर के सामने आते हैं। ईशित्व के प्रभाव से ही महाकपि ने पूरी वानर सेना का कुशल नेतृत्व किया था। इस सिद्धि के कारण ही उन्होंने सभी वानरों पर श्रेष्ठ नियंत्रण रखा। साथ ही, इस सिद्धि से हनुमानजी किसी मृत प्राणी को भी फिर से जीवित कर सकते हैं।


8. वशित्व : आठवीं और अंतिम सिद्धि का नाम है 'वशित्‍व'। ये सिद्धि अपने साधक को जितेंद्रिय बनाती है। इसके प्रभाव से साधक अपने मन पर पूरा नियंत्रण रख सकता है। ये वही सिद्धि है जिसके बल से इसके साधक किसी को भी अपने वश में कर सकते हैं। इसी के प्रभाव से महाकपि हनुमान ही अतुलित बल के धाम कहे गये हैं।

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दीपेश तिवारी
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