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भाई, मूछें हैं लेकिन मैं राजपूत नहीं हूं, मैं सुशांत सिंह… सावधान इंडिया वाला

सुशांत सिंह राजपूत के बॉलीवुड में कदम रखने के बाद सुशांत सिंह को कई बार परेशान होना पड़ता है

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भोपाल

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Vikas Verma

Jul 19, 2018

NEWS

Sushant Singh savdhaan india

भोपाल। जंगल, दम, लीजेंड ऑफ भगत सिंह, सत्या, बेबी, हेट स्टोरी-2 जैसी फिल्मों में दमदार अभिनय कर चुके बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह भले ही इंडस्ट्री में पिछले 18 सालों से हैं। लेकिन पांच साल पहले एक हमनाम एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के बॉलीवुड में कदम रखने के बाद उन्हें कई बार परेशान होना पड़ा। सुशांत सिंह इन दिनों स्टार भारत के शो सावधान इंडिया की शूटिंग के लिए भोपाल में थे। शूटिंग के आखिरी दिन सोमवार को उन्होंने पत्रिका से विशेष बातचीत की।

सुशांत ने बताया कि गूगल सर्च में ऐसी प्रॉब्लम होती है कि 50 फोटो उसके आते हैं तो 5 फोटो मेरे आते हैं। भले ही मैं इंडस्ट्री में पहले से हूं लेकिन आज की डेट में वो स्टार है, उसके पास हीरो का टैग है। एक जैसे नाम का खामियाजा मुझे कई बार भुगतना पड़ा है। उसके नाम का इनविटेशन मेरे घर आ जाता है, लोग मुझे व्हाट्सएप पर कहानी भेज देते हैं कि प्लीज हमारी फिल्म कर लीजिए। तब मैं कहता हूं भाई, एज ग्रुप ही गलत है आप राजपूत को ढूंढ रहे हैं। मैं और सुशांत सिंह राजपूत एक बार बस मानव विज के घर एक पार्टी में मिले थे। निकलते वक्त दूर से हाय-हेलो ही हुई है। जब तक वो छोटे पर्दे पर थे तब तक मैं नहीं जानता था, उन्हें मैं तब जाना जब वो फिल्मों में एंट्री ले रहे थे।

देखिए, हम दोनों का एज ग्रुप ही अलग है, शुरू में बहुत बहुत झुंझलाहट होती थी, एक्सप्लेन करना पड़ता था सुशांत सिंह, सावधान इंडिया वाला।थैंक गॉड, सावधान इंडिया ने मुझे एक आईडेंटिटी दे दी। वो राजपूत है और सावधान इंडिया। कई बार फैन भी बोलते हैं, सुशांत सिंह राजपूत, मैं कहता हूं भाई मूछें हैं लेकिन राजपूत नहीं हूं। सुशांत सिंह कहते हैं कि इससे पहले कई क्राइम शो थे लेकिन सावधान इंडिया में अवेयरनेस होती है जोकि बाकी शोज में नहीं है। इसके चलते ही मैंने इस शो को हां कहा था।

भोपाल के लोगों में दिखी हॉकिंग की नई बीमारी
भोपाल के बारे में सुशांत ने कहा कि ये 80 प्रतिशत बहुत साफ-सुथरा शहर है। यहां हरियाली है, मुंबई से तुलना करें तो भोपाल जन्नत है। भोपाल के लोग अ'छे हैं, शूटिंग फ्रैंडली हैं लेकिन अब भोपाल के लोगों को हॉकिंग की बीमारी लग गई है। जब मैं चार साल पहले आया था ट्रैफिक में इतना हॉर्न और हॉकिंग नहीं था। हम यहां ढूंढ रहे थे कि कोई खाली सड़क मिल जाए, लेकिन खाली सड़क पर भी एक आदमी अकेला स्कूटर पर चला हॉर्न बजाते हुए चला आ रहा है, अरे भाई, खुद की जिंदगी को बैकग्राउंड म्यूजिक क्यों दे रहा है। यह नई-नई बीमारी है उम्मीद करता हूं भोपाल के लोग इसे जल्द छोड़ देंगे।

एक्टर की इमेज में जुड़ गया है इंटेंस का टैग
सुशांत बताते हैं कि मैंने अपनी लाइफ में तीन तेलुगू फिल्म की हैं लेकिन डब करके टीवी पर इतनी बार दिखाई जा चुकी हैं कि आधे लोगों को लगता है कि मैं हैदराबाद शिफ्ट हो चुका हूं। फिलहाल में सावधान इंडिया के अलावा एक कन्नड़ मूवी कर रहा हूं। सुशांत बताते हैं कि मुझे ऑफर तो बहुत आते हैं लेकिन मैं कुछ अलग करना चाहता हूं, सिर्फ करना है और एक्टर बनकर दिखना है इसके लिए मैं फिल्में नहीं करना चाहता। मैं इंटेंस रोल करते-करते तंग आ गया हूं। मेरी कभी विलेन या हीरो की इमेज नहीं बनी बस एक एक्टर की इमेज है लेकिन उसके साथ इंटेंस का टैग लग गया।

ब्रिटिश आगे निकल गए तो हम क्यों अटके हुए हैं
आर्टिकल-377 के मुद्दे पर सुशांत ने कहा कि कोई भी अडल्ट अपने बेडरूम में क्या कर रहा है यह स्टेट का सब्जेक्ट नहीं है, यह उसका व्यक्तिगत विषय है। वो आदमी है आदमी से प्यार करे या औरत से प्यार करे, उसके प्यार पर किसी को पाबंदी लगाने का कोई हक नहीं है। यह कानून ब्रिटिश के जमाने का है, ब्रिटिश भी इससे आगे निकल चुके हैं तो क्यों अभी तक अटके हुए हैं। मोहब्बत से नफरत और नफरत से मोहब्बत... ऐसा देश है मेरा?