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बिना किसी वैध खदान के सीहोर के गांवों में हो रहा बड़े स्तर पर अवैध रेत उत्खनन, दूसरे स्थानों की रॉयल्टी रसीद पर कर रहे परिवहन

एनजीटी ने खनिज विभाग, माइनिंग कॉर्पोरेशन सहित सीहोर के कलेक्टर आदि को जारी किए नोटिस, एक माह में मांगा जवाब, जांच के लिए बनाई समिति

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भोपाल

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Sunil Mishra

Nov 04, 2023

sand mining

Government ban did not show effect, illegal sand mining going on indiscriminately

राजधानी से लगे सीहोर जिले में बड़े पैमाने पर नर्मदा के आसपास अवैध रेत उत्खनन हो रहा है। खास बात यह है कि यहां अभी एक भी वैध खदान नहीं है। जो लीज थी वह भी जून 2023 में खत्म हो चुकी है। खनन के लिए जेसीबी, पोकलेन जैसी मशीनों का भी धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। अवैध रूप से खनन के बाद इस रेत का परिवहन दूसरे क्षेत्र की रॉयल्टी रसीदों पर किया जा रहा है। एनजीटी ने खनन विभाग से इस संबंध में नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ जांच के लिए एक समिति भी गठित की है।
एनजीटी सेंट्रल जोन बेंच में चंदर सिंह भगवान ने इस संबंध में याचिका लगाई है। ट्रिब्यूनल ने इस संबंध में खनिज संसाधन विभाग, खनिज संचालनालय, माइनिंग कॉर्पोरेशन, कलेक्टर सीहोर, जिला खनिज अधिकारी, एमपी सिया और पॉवर मेक प्रोजेक्ट लिमिटेड को नोटिस जारी कर एक माह में जवाब तलब किया है। इसके साथ तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इसमें कलेक्टर, सीपीसीबी, और एमपीपीसीबी के एक-एक प्रतिनधि को शामिल किया गया है। समिति को मौके पर जांच कर प्रतिवेदन देने के लिए कहा गया है।

यहां हो रहा अवैध खनन

याचिकाकर्ता ने बताया कि सीहोर जिले के नर्मदा के पास वाले बड़ागांव, बाबरी, जाजना, चरूआ, नहलाई, मढगांव, जहाजपुर, जनवासम, सेमलवड़, महू कलां, निनोर, छीपानेर, अंबलाडीड, छिडगांवकाछी, नीलकंथ गांवों में रेत का बड़े स्तर पर अवैध खनन किया जा रहा है। जबकि मप्र सैंड माइनिंग पॉलिसी के अनुसार यहां पर कोई भी वैध खदान नहीं है। लीज खत्म होने के बावजूद पहले के लीजधारक द्वारा अवैध खनन किया जा रहा है। यह रेत आसपास के खेतों में एकत्रित की जाती है। इससे किसानों के खेतों की जमीन भी खराब हो रही है।

दूसरी जगहों के ईटीपी पर परिवहन


इन गांवों में कोई लीज स्वीकृत नहीं होने के कारण अन्य स्थानों के इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिट परमिट या रॉयल्टी रसीद पर रेत का परिवहन किया जा रहा है। जहां से मांग आती है वहां पर रेत भेज दी जाती है। याचिकाकर्ता ने ऐसे कई डंपरों की गूगल लोकेशन निकालकर पेश की है जो अन्य स्थान की रसीद के आधार पर रेत का परिवहन कर रहे थे। उनके फोटो भी दिए गए हैं।