
इस मंदिर की खास बात यह है कि रामायण के सभी पात्र यहां विराजमान हैं। भगवान राम और माता सीता की मूर्ति के साथ लक्ष्मण मौजूद है। वही ठीक सामने भगवान हनुमान की मूर्ति स्थापित है। इसके साथ ही रावण का परिवार भी शामिल है। रावण के साथ विभीषन , कुंभकर्ण , मेघनाथ , मंथरा और शूर्पणखा की मूर्तियां भी स्थापित है। मंदिर परिसर में हनुमान की 121 फुट की विशाल प्रतिमा है। पूरे मंदिर में राम-राम नाम लिखा हुआ है। इस मंदिर में सुबह-शाम पूजा-अर्चना होती है। इसके अलावा 24 घंटे रामायण का पाठ भी चलता रहता है।
नियम भी हैं अनोखे
खास बात यह है कि इस मंदिर में कोई पुजारी नहीं है। मंदिर में प्रवेश करने से पहले उसे केवल एक शर्त पूरी करनी होती है। मंदिर में प्रवेश करते समय आपको 108 बार जय श्री राम लिखना होता है। उसके बाद ही आपको मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति मिलती है। यहां आने वाले सभी श्रद्धालुओं को जय श्री राम लिखने के लिए कागज और पेन दिए जाते हैं। वीआईपी से लेकर आम नागरिक सभी के लिए यह नियम जरूरी है। इस मंदिर में न तो कोई दान किया जाता है और न ही कोई चढ़ावा समर्पित किया जाता है और न ही कोई प्रसाद लेकर जा सकता है। इसलिए इस मंदिर में भगवान के आगे एक भी दान पेटी नहीं रखी गई है। रोजाना करीब 200-300 भक्त आते हैं। त्योहारों के समय ज्यादा रौनक लगी रहती है।
भगवान खुद करते हैं सुरक्षा
मंदिर के निर्माण के बाद किसी भी कोई इंसान मंदिर की सुरक्षा के लिए नहीं रखा गया है। इस मंदिर का संरक्षण स्वयं भगवान श्रीराम करते हैं और सुरक्षा स्वयं यमराज संभालते हैं और अध्यक्ष पद का दायित्व महाबली हनुमान संभालते है।
तीन दर्जन मंदिर
मंदिर के आसपास लगभग 11 हजार वर्ग फीट में तीन दर्जन से अधिक मंदिर है, जिनकी हर कोने हर दीवारों पर श्रीराम भक्तों की ओर से जय श्रीराम लिखा हुआ है, जो श्रीराम के होने का अहसास कराता है।
1990 में शुरू हुआ था निर्माण
मंदिर के सेवादार प्रकाश बागरेचा का कहना है कि उनके सपने में हनुमान जी आए थे और कहा था कि खुद की जमीन पर मंदिर का बनवाओ। उसके बाद 1990 में मंदिर का निर्माण शुरू कराया थो, यह निर्माण आज भी चल रहा है।
Updated on:
16 Feb 2024 01:50 pm
Published on:
16 Feb 2024 01:48 pm
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