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पयुर्षण पर्व में सा​त्विक भोजन का होता है महत्व जो मन और तन की शुदि्ध के लिए होता है विशेष

- पयुर्षण की शुरुआत, आठ दिन श्रावक रखेंगे कठिन व्रत और भौतिकवादी सुख सुविधाओं से बनाएंगे दूरी इन पांच कर्तव्यों का करेंगे पालन - अहिंसा-- हिंसा से दूर रहना, मंदिर तक भी नंगे पांव आना ताकि जाने अनजाने में कोई जीव हिंसा न हो - सधार्मिक भक्ति- अगर समाज का कोई व्यक्ति आपके यहां आया है तो उसे सम्मान देना - ब्रह्मचर्य --भौतिक सुख, सुविधाओं से दूर रहना - क्षमापना--- क्षमा का भाव रखना, क्षमा मांगना - चैत्य परिपाटी-- सभी मंदिरों के दर्शन करना

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पयुर्षण की शुरुआत, आठ दिन श्रावक रखेंगे कठिन व्रत और भौतिकवादी सुख सुविधाओं से बनाएंगे दूरी

भोपाल. श्वेताम्बर जैन समाज के पर्युषण पर्व मंगलवार से शुरू हो गए। आठ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व के दौरान श्रद्धालु भौतिक सुख सुविधाओं से दूर रहकर तप, त्याग, संयम की साधना और कठिन व्रत कर रहे हैं। मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना और अनुष्ठान हो रहे हैं। जैन विद्वानों का कहना है कि पर्युषण के दौरान सात्विक भोजन का विशेष महत्व है। सात्विक भोजन मन के विकारों को दूर करने के साथ-साथ बीमारियों से भी बचाता है। इसलिए इसे सभी को अपनाना चाहिए।

श्वेताम्बर जैन समाज के पर्युषण पर्व की शुुरुआत हो गई है, इसी प्रकार दिगम्बर जैन समाज के पर्युषण 19 सितम्बर से प्रारंभ हो रहे हैं। इस बार अधिकमास के कारण श्वेताम्बर जैन समाज के पर्युषण पर्व दूसरी बार आयोजित हो रहे हैं। इसके पहले अगस्त माह में भी पर्युषण पर्व हुए थे। पर्युषण पर्व पर मंदिरों में प्रतिक्रमण, स्नात्र पूजा के बाद विधि विधान से अनुष्ठान हुए।

बाहर से आने वाले श्रावकों के लिए भोजन की व्यवस्था

शहर के श्वेताम्बर जैन मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना का सिलसिला जारी है। इस दौरान श्वेताम्बर जैन मंदिरों में बाहर से आने वाले श्रावकों के लिए मंदिर परिसर के भोजनशाला में सात्विक भोजन की व्यवस्था रहेगी। आदिनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर तुलसी नगर के वीरेंद्र कोठारी ने बताया कि पर्युषण के दौरान भोजनशाला में बाहर से जो भी श्रद्धालु आएंगे, उन्हें बिठाकर सात्विक भोजन कराया जाएगा। पर्युषण के दौरान यह व्यवस्था रहेगी।

सात्विक भोजन का है विशेष महत्व, सूर्यास्त के पहले होता है भोजन

श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ के अध्यक्ष राजेश तातेड़ ने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान सात्विक भोजन का विशेष महत्व है। वैसे भी जैन समाज सात्विक भोजन पद्धति अपनाता है। इसे सभी को अपनाना चाहिए। इससे मन की शुदि्ध के साथ-साथ बीमारियों से भी बचाव होता है। इस दौरान जमीन के अंदर पैदा होने वाली चीज जैसे शकरकंद, अदरक, आलू, प्याज, लहसून आदि का सेवन नहीं किया जाता है। इसी प्रकार हरि सब्जी भी नहीं खाई जाती। भोजन सूर्यास्त के पहले ही किया जाता है, वैसे भी सूर्यास्त के पहले ही भोजन करना चाहिए, जिससे दो तीन घंटे में भोजन पच जाए। अगर देर रात में भोजन करते हैं तो वह पच नहीं पाता और वह अनेक विकारों को जन्म देता है।