
भोपाल। उस्ताद अब्दुल लतीफ खां साहब की स्मृति में आयोजित तीन दिवसीय संगीत समारोह के पहले दिन उनके जीवन पर केन्द्रित किताब 'सारंगी का हमसफर' का विमोचन किया गया। इसी किताब के कुछ अंश लेखक श्याम मुंशी ने सभा की शुरुआत में पढ़े। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में साहित्यकार अशोक वाजपेयी और लीलाधर मंडलोई मौजूद रहे।
मुंशी, खां साहब के शार्गिदों में से एक थे। उनका कहना है कि जीवन के 50 बरस उनके साथ गुजारे। मैंने 1992 से उनकी बायोग्राफी लिखना शुरू कर दी थी। अक्सर उनके जीवन के किस्सों को उन्हें पढ़ाया भी करता था, लेकिन किताब पूरी होने से पहले 2003 में उनका इंतकाल हो गया। इसके बाद उनके जीवन के कई किस्सों को एक कड़ी में पिरोया।
110 पेज की किताब में 5 अध्याय हैं। मुंशी ने उनके जीवन का एक किस्सा सुनाते हुए बताया कि लतीफ खां साहब रेडियो में काम कर रहे थे। समर बहादुर सिंह डायरेक्टर बनकर आए। उन्होंने स्टाफ कलाकारों का बायोडाटा मंगवाया। सभी ने बढ़ा-चढ़ाकर लिस्ट तैयार की। लतीफ साहब की लिस्ट देख वे गुस्से से झल्ला उठे। उन्होंने लिस्ट में 20 साजों के नाम लिखे थे। वे बोले लिस्ट में सिर्फ वहीं नाम लिखो जो तुम बजा सकते हो।
लतीफ खां ने जवाब दिया, सभी बजा लेता हूं, एक-दो और हैं जिनके नाम नहीं लिखे। इस पर डायरेक्टर साहब गुस्से से तमतमा गए और सितार बजाने को कहा। उन्होंने सितार पर राग यमन बजाई और इसे सुनते ही डायरेक्टर साहब का गुस्सा काफूर हो गया।
रागश्री से की शुरुआत
कार्यक्रम में फारूख लतीफ खां ने जब सारंगी पर तान छेडी तो़ मौसम खुशनुमा बन गया। उन्होंने राग श्री से अपने वादन की शुरुआत की। फिर उन्होंने विलंबित एक ताल और ध्रुत तीन ताल में बंदिश पेश की। उनके साथ तबले पर उस्ताद अकरम खां ने संगत की। इसके बाद सावनी शेंडे ने राग मारू विहाग पर परफॉर्मेंस दी।
उनके साथ सारंगी पर सरवर हुसैन, हारमोनियम पर चिन्मय कोलहाटकर, तलबा पर उल्लास राजहंस ने संगत ती। अंतिम प्रस्तुति पंडित अंनिदा चटर्जी ने तबला वादन किया। उनके साथ सारंगी पर फारूख लतीफ खां और हारमोनियम पर चिन्मय कोलहाटकर ने संगत दी।
Published on:
25 Apr 2018 09:00 am
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