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21 अगस्त को है पूर्ण सूर्य ग्रहण, जानिए क्या करें इस दिन

इस साल यानि 2017 में 21 अगस्त (21 अगस्त,भारत) को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लग रहा है।

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Solar Eclipse 2017

भोपाल। भले ही ये भारत में दिखाई तो नहीं देगा लेकिन इसका असर राशियों पर होगा साथ ही ज्योतिष के जानकारों के अनुसार इसका सूतक भी भारत में लगेगा। वहीं नासा इस ग्रहण का लाइव टेलिकास्ट करेगा।

हिंदू धर्म में सूर्य को आदिदेव माना जाता है साथ ही ये ही कल्युग में प्रत्यक्ष देव माने जाते हैं, इसके अलावा सूर्य से ही इस पृथ्वी पर जीवन है। सूर्य का अर्थ होता है 'सर्व प्रेरक' अर्थात 'सर्व कल्याणकारी'। यजुर्वेद ने सूर्य को भगवान का नेत्र माना गया है तो वहीं ब्रह्मवैर्वत पुराण में सूर्य को परमात्मा का रूप कहा गया है।

गुरु जीवन तो सूर्य है आत्मा(21 अगस्त,भारत):
— ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा का दर्जा मिला है।
— वहीं ग्रह बृहस्पति को सूर्य का परम मित्र माना गया है, गुरु जीवन है तो सूर्य आत्मा।
— इसके अलावा हिंदू धर्म की सारी चीजें सूर्य से ही निर्धारित होती हैं।

सौर मंडल का सबसे बड़ा पिंड :
— सूर्य धरती पर ऊर्जा का श्रोत है और सौरमंडल के केन्द्र में स्थित एक तारा है। इसी तारे के चारों ओर पृथ्वी चक्कर लगाती है।
— सूर्य हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा पिंड है और उसका व्यास लगभग 13 लाख 90 हजार किलोमीटर है।

सतह का निर्माण :
सूर्य की बाहरी सतह हाइड्रोजन, हिलियम,ऑक्सीजन, सिलिकन, सल्फर, मैग्निशियम, कार्बन, नियोन, कैल्सियम, क्रोमियम तत्वों से बनी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक सूरज आकाश गंगा के केन्द्र की 251 किलोमीटर प्रति सेकेंड से परिक्रमा करता है। इस परिक्रमा में 25 करोड़ वर्ष लगते हैं इस कारण इसे 'एक निहारिका वर्ष' भी कहते हैं।

ठोस नहीं है सूर्य :
जानकारों के अनुसार सूर्य एक G-टाइप मुख्य अनुक्रम तारा है जो सौरमंडल के कुल द्रव्यमान का लगभग 99.86% समाविष्ट करता है। करीब नब्बे लाखवें भाग के अनुमानित चपटेपन के साथ, यह करीब-करीब गोलाकार है, इसका मतलब है कि इसका ध्रुवीय व्यास इसके भूमध्यरेखीय व्यास से केवल 10 किमी से अलग है। माना जाता है कि सूर्य प्लाज्मा का बना हैं और ठोस नहीं है, यह अपने ध्रुवों पर की अपेक्षा अपनी भूमध्य रेखा पर ज्यादा तेजी से घूमता है।

भारत में सूर्योपासना:
वैदिक काल से ही भारत में सूर्योपासना का प्रचलन रहा है। पहले यह सूर्योपासना मंत्रों से होती थी। बाद में मूर्ति पूजा का प्रचलन हुआ तो यत्र तत्र सूर्य मन्दिरों का नैर्माण हुआ। भविष्य पुराण में ब्रह्मा विष्णु के मध्य एक संवाद में सूर्य पूजा एवं मन्दिर निर्माण का महत्व समझाया गया है।

सोमवार(21 अगस्त,भारत) को है पूर्ण सूर्य ग्रहण, जानिये शिव से संबंध :-
21 अगस्त को साल 2017 का दूसरा सूर्य ग्रहण लग रहा है और इस दिन सोमवार है इसलिए धर्म के लिहाज से भी ये ग्रहण काफी खास है। पंडित सुनील शर्मा के मुताबिक सोमवार भगवान शिव का दिन होता है और सूर्य देव उन्हीं के रूप कहे जाते हैं इसलिए ये ग्रहण काफी महत्वपूर्ण है।

यह भी पढ़ें: 21 अगस्त को है सूर्यग्रहण: इन लोगों पर होगा ग्रहण का असर, कितने बजे से लगेगा सूतक

शिव पूजा में बिताएं दिन:
ग्रहण के दौरान और ग्रहण के पहले सूतक तक कोई भी शुभ काम नहीं होता है इसलिए पंडित शर्मा का कहना है कि 21 अगस्त का पूरा दिन भक्त शिव और सूर्य की पूजा में लगाएं, इससे आपको आर्थिक लाभ और मानसिक सुख हासिल होगा।

'सूर्य' को अर्घ्य:
धार्मिक ग्रंथों में 'सूर्य' का वर्णन सर्वशक्तिशाली, मोहक और तीव्र बुद्धि वाले देवता के रूप में हुआ है। इसलिए अगर इंसान को शक्ति या बुद्धि चाहता है तो उसे पंडित और ज्योतिष 'सूर्य' भगवान की उपासना करने और 'सूर्य' को अर्घ्य देने करने की सलाह देते हैं।

भारत में 'सूर्य' मंदिर :
जानकारों के अनुसार वैदिक काल में 'सूर्य' की उपासना के लिए मंत्रों का प्रयोग होता था, लेकिन उसके बाद मूर्ति पूजा आरंभ हुई जिसके बाद ही भारत में 'सूर्य' मंदिरों का निर्माण हुआ। इसलिए वैदिक साहित्य में 'सूर्य' के बारे में सबसे ज्यादा पढ़ने को मिलता है।

सूर्य और शिव:
सोमवार को शिव का दिन मानते हैं और शिवपुराण में सूर्यदेव को शिव का ही रूप बताया गया है, लिखा गया है कि ‘दिवाकरो महेशस्यमूर्ति दीप्तमण्डल:' यानी भगवान सूर्य महेश्वर की मूर्ति है, उनका आभामण्डल तेजोमयी है।
इसलिए इस ग्रहण पर दोनों की पूजा करनी चाहिए।

सारे उपवास और पूजा 'सूर्य' की चाल से :
मान्यता है कि'सूर्य' को नियमित जल देने से प्रतिष्ठा, सरकारी पद, समाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। हिंदुओं के सारे नियम 'सूर्य'से निर्धारित होते हैं, सारे उपवास और पूजा 'सूर्य' की चाल और चक्र के मुताबिक होते हैं।

जानिये क्या है सूर्यग्रहण :
जब चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य के मध्य से होकर गुजरता है तो उसे सूर्यग्रहण कहते हैं। ज्ञात हो कि पूरे 99 साल के बाद ऐसा अवसर आएगा जब अमेरिकी महाद्वीप में पूर्ण सूर्यग्रहण दिखाई देगा।