
भोपाल/ राजस्थान के पोखरण रेंज में भारतीय सेना युद्धाभ्यास कर रही है। यहां से पाकिस्तान की सीमा महज दस से पंद्रह किलोमीटर दूर है। यह दक्षिणी कमांड की भोपाल स्थित स्ट्राइक कोर सुदर्शन चक्र कॉर्प्स का सिंधू सुदर्शन युद्ध अभ्यास है। इसमें सेना के और दो कोर को शामिल किया है। साथ ही एयरफोर्स भी इसमें शामिल हुई। सुदर्शन चक्र कॉर्प्स इतिहास गौरवान्वित करने वाला रहा है।
दो वर्ल्ड वॉर में सुदर्शन चक्र कॉर्प्स की ताकत पूरी दुनिया ने देखी है। बाद में इसे भंग कर दिया गया था। उसके बाद फिर से इसकी स्थापना साल 1990 में हुई। इसी साल 17 मई 2019 को सुदर्शन चक्र कॉर्प्स ने अपना 30वां स्थापना दिवस मानाया है। सुदर्शन चक्र कॉर्प्स अपने वर्तमान रूप में शांति रक्षा बल से अपनी विरासत का दावा करता है। जिसने श्रीलंका संचालन में भी भाग लिया था।
थर्रा गया थार
सुदर्शन चक्र कॉर्प्स ने 20 अक्टूबर से राजस्थान के पोखरण में चालीस हजार जवानों के साथ युद्धाभ्यास शुरू किया है। लेकिन 21 अक्टूबर से मीडिया में तस्वीरें और वीडियो आना शुरू हुआ है। यह युद्धाभ्यास 5 दिसंबर तक चलेगा। सुदर्शन चक्र कॉर्प्स के रणबांकुरों के पराक्रम से पूरा थार का इलाका थर्रा रहा है। इसकी गूंज पाकिस्तान में भी सुनाई दे रही है।
तोपों की गर्जना से कांप रहा पाकिस्तान
दुश्मनों के काल्पनिक ठिकानों को भारतीय वीर पलक झपकते ही ध्वस्त कर दे रहे हैं। तोपों की गर्जना से पूरा इलाका कांप रहा है। इसकी गूंज पाकिस्तान तक सुनाई दे रही है। सुदर्शन चक्र कॉर्प्स की युद्धाभ्यास की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस बार टी-90 टैंकों, बीएमपी के साथ पहली बारी अत्याधुनिक के-9 वर्जा गन को भी शामिल किया गया है। जिसे भारत में ही तैयार किया गया है।
इसके साथ ही सुदर्शन चक्र कॉर्प्स के कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र ढिमरी भी वहां जवानों के साथ मौजूद हैं। पोखरण रेंज में बने काल्पनिक युद्ध मैदान को देख कोई भी दुश्मन कांप जाएगा। इस युद्धाभ्यास के जरिए भारतीय सेना एक रणनीति के तहत शक्ति प्रदर्शन भी कर रही है। जिसमें वायुसेना को भी अपना पराक्रम दिखा रही है। थार का इलाका एक के बाद धमाकों से थर्रा उठा है। चारों तरफ धूल के गुब्बार ही नजर आ रहे हैं।
वर्ल्ड वॉर में भी रही है भूमिका
ऐसे सुदर्शन चक्र कॉर्प्स की उत्पति 1917 में हुई थी। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मध्य-पूर्व और 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सुदर्शन चक्र कॉर्प्स का संचालन किया गया था। इन दोनों अभियानों में प्रमुख भूमिका निभाने वाले इस कोर को बाद में ध्वस्त कर दिया गया था। फिर से 17 मई 1990 को इसकी स्थापना की गई है। जिसका मुख्यालय भोपाल के बैरागढ़ इलाके में स्थित है।
मुख्यालय के बाहर बना है योद्धास्थल
वहीं, भारतीय सेना की पराक्रम की कहानी से लोगों को रूबरू करवाने के लिए सुदर्शन चक्र कॉर्प्स मुख्यालय के बाहर योद्धास्थल बना हुआ है। जिसमें भारतीय सेना की वीरता और गौरवगाथा अंकित है। साथ ही उन प्रमुख हथियारों की प्रदर्शनी भी है, जिनसे से दुश्मनों पर प्रहार किया गया है। यहां द्वितीय विश्वयुद्ध, भारत-चीन युद्ध, भारत-पाक युद्ध समेत कारगिल युद्ध में भारतीय सेना का साथ देने वाले साजो सामान को रखा गया है।
Updated on:
23 Oct 2019 03:05 pm
Published on:
22 Oct 2019 05:49 pm
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