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Indira Gandhi Birthday: ये थी इंदिरा गांधी से जुड़ी 5 बड़ी बातें, जो हमेशा याद रखी जाएंगी

- एक फैसले से बदल गई देश की पूरी बैंकिंग व्यवस्था

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Indira Gandhi Birthday

भोपाल। आज देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) का जन्मदिन है। उन्हें भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की चुनिंदा ताकतवर हस्तियों में शुमार किया जाता था। आज से 103 साल पहले 19 नवंबर को ही उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में इंदिरा का जन्म हुआ था। इंदिरा गांधी भारत की पहली और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री रही हैं।

जनवरी 1966 से लेकर मार्च 1977 तक और फिर जनवरी 1980 से लेकर अक्तूबर 1984 (जब इंदिरा की हत्या हुई) तक देश की प्रधानमंत्री रहीं। आज उनकी जयंती के मौके पर भोपाल कांग्रेस दफ्तर में आयरन लेडी इंदिरा गांधी को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इस खास मौके पर जानते हैं देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ी 5 खास बातें...

- इंदिरा में बचपन से ही एक अच्छी राजनेता होने के तमाम गुण विद्यमान थे। 21 वर्ष की आयु में वह कांग्रेस में शामिल होकर सक्रिय राजनीति में कूद पड़ी। उसके बाद उन्होंने आजादी के आन्दोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। 1942 में उन्होंने फिरोज गांधी से प्रेम विवाह किया किन्तु 1960 में फिरोज गांधी का अकस्मात् निधन हो गया। पिता जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद देश की बागडोर संभालने की जिम्मेदारी इंदिरा के कंधों पर आई तो अपनी दृढ़ता, दबंगता, निडरता और वाकपटुता से उन्होंने दुनियाभर को अपना लोहा मानने को विवश कर दिया।

- इंदिरा ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण का फैसला बहुत नाटकीय तरीके से लिया। 1966 में देश में बैंकों की केवल 500 के आसपास शाखाएं थीं।जिसका फायदा आमतौर पर धनी लोगों को ही मिलता था लेकिन बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद बैंकों का फायदा आम आदमी को भी मिलना शुरू हुआ। उन्होंने बैंक में पैसे जमा करने शुरू किए।

- प्रधानमंत्री बनने के बाद इंदिरा गांधी लगातार देश में खाद्यान्न और दूध की कमी की स्थिति को झेल रही थीं। इस दौरान ही उन्होंने कृषि में तकनीक सुधार, घाम-फूस निवारक प्रयोग और नए तरह के बीजों का प्रयोग शुरू करने के साथ कृषि और पैदावार क्षेत्र में कई संस्थाओं को खड़ा करने में बढ़ावा दिया। इसी समय दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा दिया गया। देश में श्वेत क्रांति हुई। देश ने जरूरत से ज्यादा दूध पैदा करना शुरू कर दिया।

- आपातकाल प्रधानमंत्री के तौर पर इंदिरा गांधी का सबसे विवादास्पद फैसला था, जिसके लिए आज भी उनकी आलोचना की जाती है। साल 1971 में रायबरेली में उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार राजनारायण ने इंदिरा पर चुनावों में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का मामला उठाया, जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 जून 1975 को उनका लोकसभा चुनाव ही रद्द नहीं किया बल्कि 06 साल तक उनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी. इसके बाद विपक्ष को उन्हें घेरने का मौका मिल गया. उनसे इस्तीफा मांगा जाने लगा. जयप्रकाश नारायण की अगुवाई में विपक्ष ने देशभर में प्रदर्शन करने शुरू किए, हड़ताल होने लगी। इसने इंदिरा गांधी को इतना डरा दिया कि उन्होंने आपातकाल की घोषणा कर दी।

- 31 अक्तूबर 1984 को सुबह करीब सवा नौ बजे उनके दो निजी अंगरक्षकों ने ही उन्हें उस वक्त गोलियों से छलनी कर दिया, जब वह अपने आवास से निकलकर विदेशी मीडिया को इंटरव्यू देने जा रही थी। इस हत्याकांड से जहां पूरे देश में शोक की लहर छा गई, वहीं दूसरी ओर इंदिरा जी का शहीदी रक्त रंग लाया और इस नृशंस हत्याकांड के बाद सिख समुदाय की ओर से सिख अलगाववादियों को मदद मिलनी बंद हो गई और इंदिरा जी की शहादत के साथ ही खालिस्तान की मांग भी गहरे दफन हो गई। इंदिरा जी अक्सर कहा करती थी कि उन कायरों और बुजदिलों पर मातम करो, जो दुनिया के जुल्मों से घबराकर इस तरह आंखें बंद कर लेते हैं, जैसे कि कुछ हुआ ही न हो।