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एक किस्सा: जब छलका था इंदिरा गांधी का दर्द, दिल्ली तक गर्मा गई थी राजनीति

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जयंती पर patrika.com आपको बताने जा रहा है एक ऐसा किस्सा जिसे आज भी याद किया जाता है...।

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भोपाल

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Manish Geete

Nov 19, 2019

INDIRA GANDHI

भोपाल। 37 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ( Indira Gandhi ) जब भोपाल आई थी, उस समय उनके एक वक्तव्य ने भोपाल से लेकर दिल्ली तक राजनीति गर्मा दी थी। इस बयान के बाद कला जगत में भी यह मुद्दा कई महिनों तक चर्चा का केंद्र बना रहा।

देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जयंती के मौके पर PATRIKA.COM/MADHYA-PRADESH-NEWS/ आपको बता रहा है उनसे जुड़ा ऐसा किस्सा, जिसे आज भी याद किया जाता है।

इंदिरा गांधी 13 फरवरी 1982 के दिन भोपाल में थीं। वे भोपाल में नए-नए बने भारत भवन का उद्घाटन कर रही थीं। तब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह थे। तब मध्यप्रदेश में संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भोपाल में भारत भवन का निर्माण किया गया था। अर्जुन सिंह के नेतृत्व में भोपाल को तब सांस्कृतिक राजधानी कहा जाने लगा था।

डिजाइन देख हैरान हो गई थीं इंदिरा
भारत भवन का डिजाइन चार्ल्स कोरिया ने तैयार किया था। उद्घाटन के मौके पर भोपाल आईं इंदिरा गांधी इसकी डिजाइन देख आश्चर्य में पड़ गई थीं। क्योंकि भारत भवन की डिजाइन इस तरीके से बनाई गई थी कि यह कभी भी एक इमारत जैसे न लगे, लेकिन संस्कृति और कला का एक केंद्र लगे।

यह था इंदिरा का दर्द
भारत भवन का उद्घाटन करने आई इंदिरा गांधी ने इस भवन की बारीकियां देखीं, विभिन्न कला-संस्कृति की झलक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से प्रभावित हो गईं। उन्हें यहां तक कह देना पड़ा था कि जो दिल्ली में नहीं हो सका, वो भोपाल में हो रहा है। राजनीतिक जानकार कहते थे कि इंदिरा की बातों से स्पष्ट है कि वे चाहती थीं कि कला और संस्कृति का ऐसा भवन दिल्ली में हो। इसके बाद कई लोग इंदिरा गांधी के वक्तव्य से घबरा गए थे। तरह-तरह की बयान सुर्खियों में बनने लगे और आधिकारिक रूप से सफाई दी जाने लगी।

ऐसा है भारत भवन
- भोपाल में बड़े तालाब के किनारे बना है भारत भवन।
- इसकी स्थापना 1982 में हुई थी।
- भारत भवन के पांच अंग हैं।
- इनमें से 'रूपंकर' ललित कला का संग्रहालय है।
- 'रंगमंडल' का सम्बन्ध रंगमंच से है
- 'वागर्थ' कविताओं का केन्द्र है।
- 'अनहद' शास्त्रीय और लोक संगीत का केन्द्र है।
- 'छवि' सिनेमा से जुड़ी गतिविधियों के लिए है।
- भारत भवन चार्ल्स कोरेया द्वारा डिजाइन किया गया है।
- इमारत/बिल्डिंग के बजाए यह भवन जमीन के समानांतर है।
- खासियत यह भी है कि इसे किसी एक स्थान से पूरा नहीं देखा जा सकता है।
-यहां तीन ऑडिटोरियम हैं, जहां विभिन्न कार्यक्रमों और रंगदर्शनियों में चित्रों की प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता रहता है।