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पशु-पक्षी भी इंसानों से प्यार करते हैं, प्यार में वो ताकत है, जिससे शेर भी वश में हो जाता है…

इंसानों से ज्यादा प्रिय पशु-पक्षी होते है क्योंकि इनमें स्वार्थ कम होता है। ये हम इंसानों की तरह बोल नहीं पाते लेकिन इन में भी समक्ष होती है।

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भोपाल. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के अरेरा कॉलोनी निवासी सीएम के पूर्व विधिक सलाहकार जस्टिस शांतिलाल लोढ़ा के जीवन में भी पशु-पक्षियों से अधिक लगाव है। जस्टिस लोढ़ा हमेशा सुबह जल्दी उठकर घर की छत पर पक्षियों के लिए दाना-पानी और घर के बाहर पशुओं के लिए पानी रखते रहे हैं।

कोई भी मौसम हो उन्होंने पशु-पक्षियों को घर में आश्रय दिया है, चाहे फिर वो बूढ़ी गाय हो अथवा कोई घायल पक्षी। अपने घर में काम करने वालों को इन जीवों का ध्यान रखने के स्पष्ष्ट निर्देश हैं। पशु-पक्षी भी जस्टिस लोढ़ा की आवाज और स्पर्श पहचानते हैं। वे उनसे डरते नहीं। पक्षी उनके हाथ से दाना चुगते हैं।

जस्टिस शांतिलाल लोढ़ा कहना है कि पशु-पक्षी भी प्यार और अपनत्व को महसूस करते हैं। प्यार में वो ताकत है, जिससे इंसान तो क्या, शेर भी वश में हो जाता है। उनका कहना है कि सांइस भी पशु-पक्षियों की उपयोगिता के बारे में बता चुका है। गाय आदि कुछ जीवों के शरीर पर हाथ फेरने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।

पक्षियों के पंखों से निकली हवा मानव स्वास्थ्य के लिए बेहतर होती है। जहां गाय पाली जाती है, वहां कैंसर, टीबी आदि के कीटाणु नहीं पनपते। उनका कहना है कि प्रदेश के अन्य हिस्सों की तो बात ही छोडि़ए, राजधानी में भी पशु-पक्षियों के लिए गर्मी में पानी के इंतजाम नहीं किए गए हैं। पालतू जानवरों से इतर पशु-पक्षीधन को बचाने के लिए भी व्यवस्थाएं करनी जरूरी हैं।

पशु-पक्षियों के वध की जगह उनका बचाव और संरक्षण वक्त की आवाज है। यदि ऐसा न किया गया तो आने वाले समय में भारत की दशा भी अरब देशों जैसी हो जाएगी। इस साल की भीषण गर्मी में लोगों को पक्षियों के लिए घर की छत पर दाना-पानी रखना चाहिए। पक्षियों के कलरव से आत्मिक शांति मिलती है। पशुओं के लिए घर के बाहर सीमेंट के पात्र में पानी रखें। पशु-पक्षी रक्षा करना एक धार्मिक कार्य है। इससे आपको जीवन में चमत्कार दिखेगा।

इधर, इंसानों से ज्यादा प्रिय पशु-पक्षी होते है क्योंकि इनमें स्वार्थ कम होता है। ये हम इंसानों की तरह बोल नहीं पाते लेकिन इन में भी समक्ष होती है। इंसान के साथ रहते-रहते पशु-पक्षी में भी हम इंसानों की भाषा समझ जाते हैं। ये कहना है कोलार के हरिमोहन का। 56 साल के हरिमोहन राजधानी भोपाल के कोलार में पंचर की दुकान चलाते है।

कहते हैं कि बचपने से कबूतर पालने का शौक था। अब इन्ही से लगाव हो गया है। गर्मी में आम इंसानों को कूलर की हवा नसीब नहीं लेकिन हरिमोहन ने बढ़ती गर्मी देख इन कबूतरों के लिए दुकान में कूलर भी लगवा दिया है।