
Poonam Chauksey
भोपाल। बचपन से घर में सेवा का माहौल देखा, जब शादी होकर आई तो ससुराल में भी पंखों को उड़ान भरने का मौका मिला। मुझे जिदंगी और समाज से बहुत कुछ अच्छा मिला है, बस वही मैं समाज को लौटा रही हूं। यह कहना है पूनम चौकसे का। पूनम एलएनसीटी ग्रुप में वाइस चेयरपर्सन की भूमिका निभाने के साथ ही एक समाजसेवी के रूप में भी जानी जाती हैं। यह अब तक 1000 से अधिक बच्चों को फ्री एजुकेशन मुहैया करा चुकी हैं। वहीं बीमारों की जनसेवा का आंकड़ा अनकाउंटेबल है।
पूनम कहती हैं - मैं आगरा में पली-बढ़ी। उस जमाने में जब बेटियों की शिक्षा को महत्व ही नहीं दिया जाता था, पिताजी ने मुझे पोस्ट ग्रेजुएशन कराया। उस वक्त मुझे शिक्षा के महत्व का पाठ पिताजी से मिला। वहीं दूसरी तरफ मैं देखती थी कि घर में मां की भूमिका हमेशा सेवाभावी नारी की रही। गांव से हमारे काफी परिचित लोग बीमारी की अवस्था में आगरा आते तो हमारे घर में उनके रहने से लेकर हर तरह की तिमारदारी की पूरी व्यवस्था मां करके रखती थी। मां, हमेशा हमें भी जनसेवा के लिए प्रेरित करती। बस यह दोनों गुण बचपन में ही अंकुरित हो गए थे, जिसे ससुराल में आकर फलने- फूलने का मौका मिला।
हॉस्पिटल शुरू होने पर बेहद खुश थी
पूनम बताती हैं - जब ससुराल आई तो सास-ससुर दोनों शिक्षक थे। जब मैंने आगे पढ़ने की इच्छा जताई तो पति और पूरे परिवार ने सहयोग दिया। मैंने एमए एमबीए किया। हालांकि, एक ख्वाहिश हमेशा दिल में बनी रही कि दूसरों तक शिक्षा का प्रकाश पहुंचाना है। उसी दौरान पति के सहयोग से हमने स्कूल खोला जिसमें गरीब लेकिन शिक्षा की चाह रखने वाले बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाने लगी। इसके साथ ही मैंने अपनी इच्छा से अनाथ आश्रम और वृद्धा आश्रम में सेवा का काम और अस्पतालों में मरीजों के लिए मुफ्त दूध बांटने की व्यवस्था शुरू की। इसी बीच लगभग आठ साल बीत गए। कहते हैं ना जहां चाह होती है, वहां राह होती है। मेरे साथ भी यही हुआ। हमारा खुद का जेके हॉस्पिटल हम शुरू कर पाए। उस दिन मेरे लिए खुशी का सबसे बड़ा दिन था, क्योंकि यहां मैं अपने जनसेवा के ख्वाब को बखूबी पूरा कर सकती थी। आज मेरे 750 बेड के हॉस्पिटल में बेसहारा व निर्धन मरीजों की चाय-नाश्ता व खाना और उनका इलाज भी निशुल्क रहता है।
सफर जारी है...
पूनम चौकसे कहती हैं कि यह सफर अनवरत चल रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी एलएनसीटी लगातार अग्रसर है, जहां बच्चों को निशुल्क और कम फीस में शिक्षा मुहैया हो रही है। वह कहती हैं - जब अपने स्कूल कॉलेज के बच्चों को अच्छे पदों पर काम करते देखती हूं और जब मरीजों के चेहरे पर खुशी के भाव नजर आते हैं तो लगता है कि मेरा सपना पूरा हो रहा है। मैं बिना रूके बस इसी काम में लगे रहना चाहती हूं।
Published on:
08 Mar 2019 07:43 pm
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