
भोपाल/ राज्य के सरकारी उपक्रमों, निगम-मण्डलों की सोमवार से जांच शुरू हो गई है। वित्त विभाग ने पहले दिन 9 उपक्रमों और निगम-मण्डलों के रिकार्ड को खंगाला। जांच में यह देखा जा रहा है कि इन उपक्रमों को निरंतर रखे जाने का औचित्व क्या है। जांच के दौरान यदि किसी उपक्रम की उपयोगिता नजर नहीं आती तो इन्हें बंद किए जाने का निर्णय भी लिया जाएगा। हालांकि यह जांच अभी प्रारंभिक है।
वित्त विभाग ने पहले दिन मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम, नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट कंपनी, ऊर्जा विकास निगम, राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम, पिछड़ा वर्ग एवं अल्प संख्यक वित्त विकास निगम, राज्य कृषि उद्योग विकास निगम, मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम, राज्य खनन निगम, जेपी मिनरल लिमिटेड का रिकार्ड देखा। जेपी मिनरल का अधूरा रिकार्ड होने पर जानकारी दोबारा देने को कहा गया।
खनन निगम में राज्य सरकार की अंशपूजी लगी है, इसलिए यह देखा गया कि यह निगम से लाभांश कितना मिल रहा है। बैठक में इस बात पर संतोष जताया गया कि निगम का कार्य इस मामले में निरंतर है। पिछड़ा वर्ग अल्प संख्यक वित्त विकास निगम, हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम के बारे में बताया गया कि इनकी आर्थिक सेहत ज्यादा अच्छी नहीं है। हस्तशिल्प निगम का रिस्ट्रीचिरिंग कर आय बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं।
इन बिन्दुओं पर हो रही पड़ताल -
- वित्तीय वर्ष 2016-2017 से 2018-19 तक लाभ हानि की बैलेंस शीट।
- उपक्रम के बैंक खातों की स्थिति, इनमें कितनी रकम जमा है और ये कितने अपडेट हैं।
- पिछले तीन साल में सरकार ने इनको कितनी आर्थिक मदद दी और उन पर कर्ज की स्थिति। इन तीन सालों में इन्होंने सरकार को कितना लाभांश दिया।
- यदि उपक्रम हानि में है तो उसे लाभ में लाने की क्या योजना है।
- पिछले तीन में ऑडिट आपत्तियां और इनके निराकरण की स्थिति।
- यहां कर्मचारियों के स्वीकृत एवं रिक्त पदों की जानकारी। सातवां वेतनमान दिया या नहीं।
Published on:
05 Nov 2019 09:04 am
