21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

UNDERWORLD: कभी दाउद के खास इकबाल मिर्ची का था ये बंगला

मुख्यमंत्री निवास के पास पहाड़ी पर एक भूत बंगला है, जो अंडरवल्र्ड डॉन दाउद के खास इकबाल मिर्ची का अड्डा हुआ करता था।

2 min read
Google source verification

image

Nitesh Tripathi

Jan 15, 2016

(MP.PATRIKA.COM अंडरवर्ल्ड सीरीज में आपको मध्य प्रदेश के उन डॉन से रूबरू करवाएगा, जिनके खौफ के साये में 80 और 90 के दशक में माया नगरी मुंबई सरकती थी.)


मुख्यमंत्री निवास के पास पहाड़ी पर एक भूत बंगला है, जो अंडरवल्र्ड डॉन दाउद के खास इकबाल मिर्ची का अड्डा हुआ करता था। इसे अंग्रेजन का बंगला भी कहा जाता था, क्योंकि, मिर्ची ने इसे अंग्रेजन मैम से हड़पा था। टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार के हत्यारे का शव भी यहीं मिला था। खंडहर हो चुके बंगले के बारे में कहा जाता है कि यहां भूतों का डेरा है। इसमें जाने से लोग डरते हैं।

धोखे से लिया था इकबाल ने बंगला
यह वही नवाबी बंगला है, जिसे विश्व के 10 बड़े ड्रग स्मगलर में शामिल मिर्ची ने शातिराना चालों से अपने कब्जे में ले लिया था, लेकिन बाद में यह सरकार के कब्जे में चला गया और फिर नीलाम हो गया। इसकी छत पर बड़े-बड़े पेड़ उग आए हैं। श्योरविन कंपनी ने कुछ साल पहले होटल बनाने के लिए साढ़े सात करोड़ रुपए में खरीदा था, लेकिन वह पलटकर नहीं आए।

नवाब मंसूर अली खान पटौदी के बड़े नाना
भोपाल की श्यामला पहाड़ी पर जिस जगह पर यह भूत बंगला बना है, वह भोपाल नवाब हमीदुल्ला खां के बड़े भाई औबेदुल्ला खां को बंटवारे में मिली थी, जो नवाब मंसूर अली खान पटौदी के बड़े नाना थे। जमीन बाद में औबेदुल्ला खां के बेटे नवाबजादा राशिदउल्ला के नाम हुई। उन्होंने इसे मुंबई निवासी देवराज सरद को बेचा। यहां 10 हजार वर्गफीट में उन्होंने बंगला बनाया।

bhopal

बाद में वर्ष 1971 में ये बंगला ज्वॉय पेटर्सन नामक एक एंग्लो इंडियन महिला के नाम से खरीदा गया। इसका पति रेलवे का ठेकेदार था और मुंबई में रहता था। महिला कुत्ते पालती थी, इसलिए उसे कुत्तेवाली मेमसाब के नाम से भी पहचाना जाता था। कहा जाता है कि महिला की बेटी मुंबई में थी और वह मिर्ची के संपर्क में आई।

मिर्ची ने पहले उसे झांसे में लिया और ज्वॉय पेटर्सन को इलाज के बहाने मुंबई ले जाकर बंगला अपने नाम करा लिया। एक समय था जब दिन में भी किसी की हिम्मत नहीं होती थी कि कोई यहां से निकल जाए। यहां अंग्रेजी मेम अकेले ही रहती थी और उनके पास तीन बड़े-बड़े कुत्ते भी थे। उनके पति मुंबई में रहते थे और हर महीने यहां आते थे।

ये भी पढ़ें

image