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रात को बंद रहती है संजय गांधी अस्पताल की इमरजेंसी

सीएमओ सहित डॉक्टरों को खोजते रहे मरीज, कई बगैर इलाज के लौटे

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Udaipur City

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Suresh Mishra

Nov 04, 2015

रीवा

संजय गांधी अस्पताल की चिकित्सीय सेवाएं पूरी तरह पटरी से उतर चुकी हैं। सुबह ओपीडी में डॉक्टर जहां देरी से पहुंच रहे वहीं, रात में इमरजेंसी विभाग में एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं रहता। सोमवार रात को पत्रिका टीम ने पड़ताल की। आकस्मिक चिकित्सक कक्ष में एक भी डॉक्टर नहीं दिखा। वार्ड के बेड खाली पड़े थे। गोविन्दगढ़ के मोहम्मद रफीक बच्चे जुबेर को लेकर चक्कर लगा रहे थे। उन्होंने बताया कि बेटे को तेज बुखार है। इमरजेंसी की भर्ती पर्ची कटवाने के बाद उन्हें सीधे पीडियाट्रिक वार्ड जाना पड़ा। इसी तरह अन्य मरीजों को भी इमरजेंसी की सेवाएं नहीं मिली। रात 10.30 बजे से भोर 4 बजे तक इमरजेंसी ओपीडी के नाम पर 42 मरीजों के पंजीयन हुए। जिसमें से 19 ही भर्ती हुए। जबकि 23 मरीज अस्पताल आने के बाद वापस हो गए।


दवाओं को तरस गए मरीज


रात में अस्पताल में मरीज दवाओं के लिए भी भटक रहे थे। दरअसल, अस्पताल के दवा वितरण केंद्र में ताला लगा हुआ था। देर रात मेडिकल स्टोर बंद होने से रेडक्रॉस के स्टोर से दवालानी पड़ी।

सीसीटीवी का भी खौफ नहीं: इमरजेंसी विभाग में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन रात को ड्यूटी पर रहने वाले डॉक्टरों को इसका खौफ नहीं है। अस्पताल के सुरक्षा गार्डों की माने तो रोजाना 10.30 बजे के बाद डॉक्टर इमरजेंसी से उठ जाते हैं।


सीधी बात- डॉ. एसके पाठक, विभागाध्यक्ष इमरजेंसी


पत्रिका : सोमवार-मंंगलवार दरम्यान रात ड्यूटी में इमरजेंसी में कौन-कौन डॉक्टर थे।

जवाब : सीएमओ डॉ. अखिलेश तिवारी की रात में ड्यूटी थी। वार्ड में 8 .30 बजे तक दो सर्जरी के रेसीडेंट डॉक्टर थे। इसके बाद की जानकारी नहीं है।

पत्रिका: दवा वितरण केंद्र 24 घंटे खोलने का नियम है, लेकिन रात में दवा केंद्र बंद क्यों था।

जवाब :नर्सों की हड़ताल थी। उनकी जगह नर्सिंग प्रशिक्षण संस्थान की दो स्टूडेंट लगाए गए थे। एक सुरक्षा गार्ड दिया गया था। इसके बावजूद दवा वितरण केंद्र बंद क्यों हुआ। इसकी जानकारी लेंगे।