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कड़वा बोलकर सच्ची राह दिखाने वाले नहीं रहे जैन मुनि तरुण सागर

Jain Muni tarun Sagar का निधन, कड़वा बोलकर सच्ची राह दिखाते थे जैन मुनि तरुण सागर

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कड़वा बोलकर सच्ची राह दिखाने वाले नहीं रहे जैन मुनि तरुण सागर

भोपाल. राजकीय अतिथि का दर्जा प्राप्त कड़वे प्रवचन के लिए प्रसिद्ध‌ जैन समाज के प्रसिद्ध‌ मुनिश्री तरुण सागर नहीं रहे। जैन समाज अनुयायियों का कहना है कि कड़वा बोलकर सच्ची राह दिखाने वाले गुरु महाराज ने शनिवार की सुबह समाधिमरण ली है।

महाराज के स्वास्थ्य सुधार के लिए जैन समाज द्वारा कई दिनों से प्रार्थना की जा रही थी। तरुण क्रांति मंच गुरु परिवार के अध्यक्ष अमर जैन ने बताया कि टीन शेड जैन मंदिर समेत कई जिनालयों में आत्मिक शांति मंत्र किया जा रहा है।

मप्र विधानसभा व पीएचक्यू में दिया था प्रवचन
मुनिश्री तरुण सागर महाराज कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। जैन मुनि का सोमवार की सुबह करीब 3 बजे 51 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से जैन श्रद्धालु उनके प्रवास स्थल पर जुटने लगे हैं।

उनके अनुयायियों की संख्या मध्यप्रदेश से लेकर देश-विदेश सबसे ज्यादा है। मुनिश्री टीन शेड जैन मंदिर में वर्ष 2010 में चातुर्मास कर चुके हैं। तब उनके मप्र विधानसभा व पीएचक्यू में भी प्रवचन हुए थे।

अंतिम दर्शन के लिए दिल्ली रवाना हुए जैन अनुयायी

अंशुल जैन ने बताया कि समाज के कई लोग उनके अंतिम दर्शन और सेवा के लिए दिल्ली रवाना हो चुके हैं। जैनमुनियों ने बताया कि दो दिन पहले गुरुवार की सुबह उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। जिसके बाद उन्हें स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया था। वहां शाम डॉक्टरों की निगरानी में उनकी सेहत में थोड़ा सुधार हुआ था।

बयानों को लेकर चर्चा में रहते थे मुनि महाराज

जैन मुनि महाराज तरुण सागर अपने बयानों को लेकर हमेश चर्चा में रहे है। जैन मुनि ने मध्यप्रदेश सहित देश की कई रज्यों की विधानसभाओं में प्रवचन दिया है। जैन मुनि तरुण सागर का जन्‍म मध्य प्रदेश के दमोह में 26 जून, 1967 को हुआ था। उनकी मां का नाम शांतिबाई और पिता का नाम प्रताप चंद्र था। तरुण सागर ने आठ मार्च, 1981 को घर छोड़ दिया था। जिसके बाद मुनि महाराज ने छत्तीसगढ़ में दीक्षा ली थी।