राष्ट्रीय जलजीवन मिशन के तहत जिले में नलजल योजना के कार्यों में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 32 योजनाओं में ठेकेदारों द्वारा भ्रष्टाचार किए जाने के कारण विभाग को दोबारा से टेंडर कॉल करने पड़े हैं।
केस- 01-भैंसदेही ग्राम पंचायत गोरेगांव में 94 लाख 51 हजार की लागत से नलजल योजना स्वीकृत हुई है, लेकिन एक-डेढ साल बीत जाने के बाद भी योजना पूर्ण रूप से शुरू नहीं हो पाई। जिससे ग्रामीणों में योजना के क्रियांवयन को लेकर रोष पनपने लगा है।
केस 02- चिचोली के ग्राम रोझड़ा में विगत दो सालों से जलजीवन मिशन के तहत पानी की टंकी बनाने और पाइप लाइन बिछाने का काम चल रहा हैं, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हो सका है। पीने के पानी को लेकर गांव में संकट की स्थिति बनी हुई है। पाइप लाइन बिछाने के लिए ठेकेदार ने गांव में जगह-जगह गड्ढें खोद रखे हैं लेकिन लाइन बिछाने काम भी अधूरा है।
केस03- समीपस्थ ग्राम सेहरा में ही नलजल योजना का काम अधूरा पड़ा है। नलजल योजना पूर्ण नहीं होने से गांव में पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण सरपंच के नेतृत्व में शिकायत करने जनसुनवाई में पहुंचे थे।ठेकेदार ने अभी तक काम पूरा नहीं किया है। जिसके कारण योजना का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है।
बैतूल। राष्ट्रीय जलजीवन मिशन के तहत जिले में नलजल योजना के कार्यों में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 32 योजनाओं में ठेकेदारों द्वारा भ्रष्टाचार किए जाने के कारण विभाग को दोबारा से टेंडर कॉल करने पड़े हैं। वहीं 14 ठेकेदारों को ब्लैक लिस्टेड करने की कार्रवाई तक की गई है। इस स्थिति के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के आज तक पूर्ण नहीं हो सके हैं। कुछ योजनाओं में जल निगम और पीएचई दोनों संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। यही कारण है कि जिन गांवों में पानी की टंकिया बना दी गई है, वहां पेयजल की सप्लाई नहीं हो रही है, तो कहीं पाइप लाइन का काम अधूरा पड़ा है।
ब्लैक लिस्टेड किया पर धरोहर राशि जब्त नहीं की
नलजल योजना में भ्रष्टाचार के मामलों की शिकायत के बाद मजबूरन विभाग को ठेकेदारों के विरूद्ध मजबूरन कार्रवाई करना पड़ी है। कार्रवाई के चलते 14 ठेकेदारों को ब्लैक लिस्टेड भी किया गया और कुछ के टेंडर निरस्त किए गए। ऐसे में ठेकेदारों की गारंटी के तौर रखी गई धरोहर राशि को राजसात भी किया जाना था, लेकिन अभी तक राशि राजसात करने की प्रक्रिया नहीं की गई है। बताया गया कि करीब 35 से 40 लाख रुपए की राशि राजसात की जाना है। विभाग का कहना है कि राजसात की कार्रवाई चल रही है।
348 योजनाएं ही पूर्ण हो सकी
जिले में कुल 1338 गांव है। इनमें से 1096 गांवों में पीएचई और 220 गांवों में जल निगम द्वारा नलजल योजना पर काम किया जा रहा है। जबकि 22 गांव योजना के दायरे में नहीं आते हैं। पीएचई विभाग ने कुल 1096 नलजल योजनाएं स्वीकृत की है। इनमें से 348 योजनाओं पर काम पूरा होना बताया जा रहा हैं। जबकि 718 योजनाएं प्रगतिरथ होना बताई जाती है। वहीं 204 योजनाएं टेंडर प्रक्रियाधीन बताई जाती है। वहीं 25 योजनाओं के काम जो अधूरे पड़े हैं उनमें रि-टेंडर की प्रक्रिया की जा रही है। देखा जाए तो योजना को शुरू हुए करीब तीन साल का लंबा अरसा हो चुका हैं और तीन सालों में कई जगहों पर योजना का काम अधूरा पड़ा है।
नल कनेक्शन देने में विभाग प्रदेश में छटवें नंबर
जिले में नलजल योजनाओं की कहानी भले ही कोई ओर हकीकत बयां कर रही हो, लेकिन पीएचई विभाग की माने तो घर-घर नल कनेक्शन देने के मामले में बैतूल जिला प्रदेश में छटवें नंबर पर हैं। जिले में 2 लाख 67 हजार 413 घरों में नल कनेक्शन दिए जाना है, इसमें से विभाग ने अभी तक 1 लाख 91 हजार 966 घरों में नल कनेक्शन जारी कर दिए हैं, लेकिन इसमें भी सच्चाई यह है कि ठेकेदारों ने पाइपलाइन बिछाकर नल कनेक्शन तो घर-घर बांट दिए हैं पर आज तक लोगों को वहां पीने के लिए पानी नसीब नहीं हो सका है। जिसके कारण लोगों को हैंड़पंप से पानी भरना पड़ता है।
इनका कहना
-जिन योजनाओं के काम अधूरे पड़े थे और ठेकेदारों द्वार काम नहीं किया जा रहा था, उनमें ठेकेदारों को ब्लैक लिस्टेड करन की कार्रवाई विभाग ने की है। 32 योजनाओं के पुन: टेंकर कर काम भी शुरू करा दिया गया है। ठेकेदारों की अमानत राशि भी जब्त की जा रही है।
- आरएन सेकवार, ईई पीएचई विभाग बैतूल।