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astrology; नवसंवत्सर के राजा होंगे शनि और मंत्री होंगे गुरु, न्याय व्यवस्था में आएगी कसावट

astrology; हिन्दू नववर्ष विक्रम संवत 2079 का आगाज 2 अप्रैल से, इस बार नवसंवत्सर की शुरुआत राक्षस नाम संवत्सर से होगी लेकिन 28 अप्रैल से शुरू हो जाएगा अनल नाम का संवत्सर  

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astrology; नवसंवत्सर के राजा होंगे शनि और मंत्री होंगे गुरु, न्याय व्यवस्था में आएगी कसावट,

astrology; नवसंवत्सर के राजा होंगे शनि और मंत्री होंगे गुरु, न्याय व्यवस्था में आएगी कसावट,

भोपाल. हाल ही में देश में पांच राज्यों में चुनावी प्रक्रिया के बाद अब अगले माह आकाशीय निर्वाचन भी होगा। यह आकाशीय निर्वाचन हर साल होता है और अलग-अलग ग्रह साल की सत्ता संभालते हैं। आने वाले हिन्दू नववर्ष में सत्ता के राजा अर्थात राष्ट्रपति शनि और मंत्री अर्थात प्रधानमंत्री गुरु होंगे। इसी प्रकार अन्य ग्रहों के पास भी अलग-अलग भूमिका रहेगी। साल के राजा शनि होने से न्याय व्यवस्था में कसावट आएगी, इसी प्रकार कई तरह की सम और विषम परिस्थितियों का सामना देश दुनिया को करना पड़ेगा।

हिन्दू नववर्ष विक्रम संवत 2079 का आगाज 2 मार्च से होगा। इस बार नवसंवत्सर की शुरुआत राक्षस नाम संवत्सर से होगी, लेकिन 28 अप्रेल से एक और संवत्सर अनल प्रारंभ हो जाएगा, जो पूरे वर्ष पर्यंत रहेगा। पं. विष्णु राजौरिया के अनुसार इस बार राजा शनि होने के कारण शासकों के प्रति अविश्वास बढ़ेगा। न्याय का शिकंजा कसेगा। अपराधियों को दंड देने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। इसी प्रकार पश्चिमी देशों और मध्यपूर्व एशिया में संघर्ष की स्थिति बनेगी। इसके कारण कई वस्तुओं की महंगाई बढ़ेगी।

इस बार अच्छी बारिश के बनेंगे योग

पं. प्रहलाद पंड्या के अनुसार आने वाले नवसंवत्सर में अच्छी बारिश के योग बनेंगे। वर्षा सामान्य होगी और फसलों के लिहाज से अच्छी बारिश होगी। अगले साल मेघेष बुध होंगे और तम नाम का मेघ वर्षा कराएगा, रोहिणी का वास सागर में होगा और समय का वास माली के घर पर होगा। इस लिहाज से अच्छी बारिश के संकेत मिल रहे हैं।

60 प्रकार के होते हैं संवत्सर, यह रुद्र बीसी का 9वां वर्ष

ज्योतिष मठ संस्थान के पं. विनोद गौतम ने बताया कि संवत्सर की शृंखला में 60 प्रकार के संवत्सर होते हैं, जो हर साल अलग अलग नामों से आते हैं। इस बार राक्षस नाम का संवत्सर में साल का आगाज होगा और अप्रेल में नल नामक संवत्सर आएगा। संवत्सर की शृंखला में तीन बीसी होती है, जो बीस-बीस साल की होती है। इसमें ब्रह्म बीसी, विष्णु बीसी और रुद्र बीसी होती है। इस समय रुद्र बीसी चल रही है। रूद्र बीसी रुद्र अर्थात शिव को समर्पित है, जो प्रलयकारी होती है। इसलिए रुद्र बीसी का यह 9 वां वर्ष है। पिछले सालों में रुद्र बीसी में ही केदारनाथ त्रासदी, अमरनाथ में बाढ़ के हालात, नेपाल में भूकंप, पिछले दो सालों से कोरोना संक्रमण जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। रुद्र बीसी के अभी 11 साल बाकि है।

आकाशीय व्यवस्था के अनुसार साल में ऐसी होगी स्थिति