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छूट की ओट से अंधाधुंध कटाई

काटे पड़े बबूल के, औषधि कहां से आए

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Krishna singh

Sep 11, 2016

kaate ped babool ke..., wood sindicate cut tree da

kaate ped babool ke..., wood sindicate cut tree day and nights, bhopal

भोपाल. प्रदेश में बहुत तेजी के साथ बबूल और नीम के पेड़ों की संख्या कम हुई है। सरकार ने किसानों की बेहतरी के लिए नीम और बबूल सहित 53 प्रकार के वृक्षों को काटने की अनुमति क्या दी, इसकी ओट में लकड़ी माफियाओं ने बबूल और नीम जैसे पेड़ों पर बेखौफ होकर आरा चलवाना शुरू कर दिया है। हालात यह है कि औषधि बनाने के लिए बबूल और नीम के पेड़ों की किल्लत महसूस होने लगी है।

लकड़ी माफिया किसानों के नाम की आड़ में बड़े पैमाने पर बबूल-नीम के पेड़ काटने में जुटे हैं। उक्त वृक्षों की लकड़ी का हिसाब नहीं देना होता है। माफिया किसानों से साठगांठ कर मनमाने तरीके से वृक्षों को काटकर लकड़ी राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में भेजकर मोटी कमाई कर रहे हैं। राज्य सरकार ने कई मर्तबा आवाज उठने के बावजूद टीपी से बाहर शेष पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर अंकुश के इंतजाम नहीं किए।

कटाई-छंटाई बंद नहीं हुई तो बड़ा संकट खड़ा होगा
आयुर्वेदाचार्य डॉ. राकेश पाण्डेय के अनुसार नीम और बबूल एेसे वृक्ष हैं, जिनका पुरातनकाल से ही बहुतायत में औषधीय कार्यों में प्रयोग होता रहा है। दंत रोग, स्किन रोग, रक्त शुद्धता, कील-मुहासे जैसे रोगों पर इनका प्रयोग तो किया ही जाता है। हाल ही में अमेरिका और भारत में किए गए एक शोध में यह पाया गया है कि नीम और बबूल के वृक्षों से निकलने वाली खुशबू के चलते दिन में मच्छर पास नहीं आते हैं। इन वृक्षों से निकलने वाली विशेषगंध इन मच्छरों को दूर रखती है। एेसे में यदि इस तरह के पौधे शहर और ग्रामीण क्षेत्र से कट जाएंगे, तो बड़ा संकट खड़ा होगा।

विधायक हनी भी जता चुके हैं आपत्ति
कुक्षी से विधायक सुरेंद्र सिंह हनी बघेल सरकारी आदेश कि खिलाफ आपत्ति जता चुके हैं। 21 जुलाई 2015 को वनमंत्री को पत्र लिखकर उन्होंने इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग उठाई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। विधायक के अनुसार 19 फलदार वृक्षों को अनुमति से बाहर करने की बात कही गई थी, लेकिन आज तक कोई आदेश नहीं मिला।

भोपाल में होती जबरदस्त चिराई
टिंबर एसोसिएशन के अध्यक्ष बदर आलम के अनुसार भोपाल में 100 से 125 आरा मशीनें हैं। यहां औसतन 50 से 55 घनमीटर लकड़ी एक आरा मशीन में आती है। ऐसे में रोजाना 7000 घनमीटर लकड़ी की रोजाना चिराई होती है।