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अंतिम सांसें गिन रही कलियासोत नदी

राजधानी के लोग खुशकिस्मत हैं कि उन्हें तालाब और नदी अपने पुरखों से विरासत में मिली हैं। धीरे-धीरे यह खुशी काफूर हो रही है। जमीन की भूख और लालच के कारण अब यह विरासत अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहीं हैं। बड़ा तालाब धीरे-धीरे सिमट रहा। कई तालाबों का अस्तित्व खत्म हो गया। और शहर की एकमात्र नदी कलियासोत अंतिम सांसें गिन रही है।

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योगेंद्र सेन@ भोपाल. राजधानी के बीच से बहने वाली 36 किलोमीटर लंबी कलियासोत नदी का अस्तित्व खतरे में हैं। कभी इसमें भरपूर पानी हुआ करता था। लोग अपनी प्यास बुझाते थे, लेकिन धीरे-धीरे इसके करीब 24 लाख मीटर ग्रीन बेल्ट पर लोगों ने कब्जा कर निर्माण कर लिया है। आज हालत ऐसे हैं कि नदी के प्राकृतिक जलभराव क्षेत्र और केचमेंट एरिया कलियासोत का वन क्षेत्र, कोलार, बावडिय़ाकलां, सलैया में निर्माणों ने नदी में आने वाले बारिश के पानी की राह रोक दी। जगह-जगह इसे कूड़े से पाट दिया। शहर के बीच जहां से भी यह गुजरती है, वहां नदी की जगह एक बड़ा नाला नजर आती है। लोगों ने इसका पानी इतना प्रदूषित कर डाला, कि अब यह पीने योग्य भी नहीं बचा। नदी में पानी के प्राकृतिक जलस्रोत ही खत्म कर दिए। नतीजा सामने है। अब नदी का अस्तित्व सिर्फ बड़े तालाब पर ही निर्भर है। बरसात में जब घनघोर पानी आता है और कलियासोत डैम के गेट खोलने की नौबत आती है तब कलियासोत नदी अपने रौद्र रूप में दिखाई पड़ती है। और जिन लोगों ने नदी के किनारों को छलनी कर अपना आशियाना बना लिया है, उनकी दहलीज को छूकर करुण रुदन करती है।

नदी की दुर्दशा के लिए ये हैं जिम्मेदार
1- नेता, बिल्डर, अफसरों का गठजोड़
नदी के केचमेंट एरिया, उसके ग्रीन बेल्ट एरिया में आलीशान बिङ्क्षल्डगें, बंगले, मकान तान दिए
2 - वोट बैंक की 'खेतीÓ
नेताओं की शह पर ही नदी किनारे पूरी दामखेड़ा झुग्गी बस्ती बसा दी गई।
3 - अफसरों की लापरवाही
कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों का सख्ती से पालन नहीं किया। ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण, कब्जे नहीं रुके। कॉलोनियों-झुग्गियों का सीवेज सीधा नदी में डाल रहे हैं।
3 - शहरवासियों की चुप्पी
शहर की एकमात्र नदी है, लेकिन इसे बचाने के लिए कोई आवाज नहीं उठती।

नदी को बचाना है तो हमें यह करना होगा
- एनजीटी ने कलियासोत नदी का संरक्षण गंगा बेसिन की तर्ज पर करने के निर्देश दिए थे, इसका पूरी तरह पालन
करना होगा
- ग्रीन बेल्ट एरिया को सुरक्षित रखना होगा
- ग्रीन बेल्ट एरिया को बचाने के लिए पौधरोपण करना होगा
- नदी के दोनों किनारों पर अवैध निर्माण रोकना और जो हो चुके हैं उन्हें
हटाना होगा
- प्राकृतिक जल स्रोत बचाना होगा, जहां से पानी आकर नदी में मिलता है
- नदी में मिल रहे सीवेज को रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने होंगे
(जैसा कि एक्सपर्ट डॉ. सुभाष सी पांडे ने बताया)

एनजीटी ने 6 साल पहले दिया था यह आदेश
- वर्ष 2014 में एनजीटी ने आदेश दिया था कि कलियासोत नदी के किनारे पर दोनों ओर 33 मीटर दायरे की पहचान और सीमांकन किया जाए। वहां पर चिन्ह भी लगाए जाएं। इसमें किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं किया जाए।
- इस 33 मीटर के दायरे में ग्रीन बेल्ट विकसित किया जाए।
- कलियासोत नदी का पानी प्रदूषित है, इसलिए इसमें केवल ट्रीटेड पानी ही आए यह सुनिश्चित किया जाए।
(दु:खद: इन आदेशों का पालन नहीं हुआ।)