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फसल कटाई की खुशी में करमा नृत्य

भारत भवन में बसंत पर्व 'आया बसंत छाया बसंत' का आयोजन

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फसल कटाई की खुशी में करमा नृत्य

भोपाल। उस्ताद अल्लाउद्दीन खां अकादमी एवं आदिवासी लोक कला एवं बोली विकास अकादमी और भारत भवन के सहयोग से वसंत पर्व का आयोजन किया गया। जिसमें शास्त्रीय और लोक कला रूपों को खूबसूरती के साथ संयोजित कर प्रस्तुत किया गया। भारत भवन में संस्कृति विभाग द्वारा रविवार को बसंत पंचमी के अवसर पर बसंत पर्व 'आया बसंत छाया बसंत' का आयोजन किया गया।

इस दौरान ओडिसी समूह नृत्य, करमा नृत्य और बरेदी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम की शुरुआत छन्दक नृत्य अकादमी से आए डालिया दत्ता एवं कलाकारों ने ओडिसी नृत्य की से की। इस दौरान उन्होंने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया।

डिंडौरी से आए बैगा जनजाति के कलाकारों ने करमा नृत्य को प्रस्तुत किया। यह नृत्य फसल कटाई की खुशी में किया जाता है। इस नृत्य को महिला-पुरुष मिलकर करते हैं। इस नृत्य की खास बात यह है करमा गीत पुरूष गाने की कड़ी गाता है और उस कड़ी को महिला को भी गाना पड़ता है। कलाकारों का कहना है कि इस नृत्य को नए सदस्यों को अलग से सीखाया नहीं जाता। सभी एक-दूसरे को देखकर ही सीखते हैं। 15 मिनट की इस प्रस्तुति में 11 पुरूष और 5 महिलाओं ने शानदार नृत्य प्रस्तुत किया।

ठुमक कन्हैया रेंगत चले...
सागर से आए कलाकारों ने बुंदेलखंड का बरेदी लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। इस नृत्य को कार्तिक माह में दीवाली के समय गाय और गोवर्धन पर्वत की पूजा के साथ किया जाता है। इस नृत्य को अमावस्या से पूर्णिमा तक घर-घर पर जाकर प्रस्तुत किया जाता है। वहीं अगली प्रस्तुति में 'ठुमक कन्हैया रैंगत चले घर गोकुल की रेल रे, कौन गुजरिया की नजर लगी जे हमको डाले दूध रे...' बोल पर 15 मिनट की प्रस्तुति में 15 कलाकारों ने नृत्य से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया।