
भोपाल। लगातार तीन साल से प्रमोशन का इंतजार कर रहे राज्य के 70 हजार से अधिक अधिकारी, कर्मचारियों को अभी और इंतजार करना होगा। सरकार ने इसके लिए कर्नाटक फार्मूले पर काम शुरू कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक में प्रमोशन के लिए नए नियम बनाने की अनुमति दी है। प्रदेश सरकार भी इसी फार्मूले पर काम करते हुए नए नियम बना कर कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता निकाल रही है।
असल में राज्य सरकार ने इस मामले में कानूनी राय मांगी थी। सरकार को सलाह दी गई है कि सुप्रीमकोर्ट में चल रहे मामले का निराकरण तक होने तक इंतजार किया जाए या फिर सरकार नए नियम बनाकर प्रमोशन दे सकती है। सरकार ने इसी दोनों फार्मूला पर काम शुरू किया है।
इसके लिए सुप्रीमकोर्ट से आग्रह किया जा रहा है कि मामले का जल्द निराकरण के लिए जल्द से जल्द सुनवाई शुरू हो। वहीं दूसरी ओर सामान्य प्रशासन विभाग से नए नियम बनाकर जल्द से जल्द ड्राफ्ट तैयार कर पेश करने को कहा गया है। इसके पीछे तर्क दिया गया कि चूंकि प्रमोशन में आरक्षण के वर्ष 2002 के नियम खारिज हो चुके हैं, इसलिए नए नियम बनाए जाने में कोई आपत्ति नहीं है।
कर्नाटक राज्य के फार्मूला पर विचार -
प्रमोशन में आरक्षण का विवाद अधिकांश राज्यों में है। सभी मामलों की सुनवाई सुप्रीमकोर्ट में हो रही है। कर्नाटक मामले में सुप्रीमकोर्ट ने नए नियम बनाकर प्रमोशन दिए जाने को कहा है। मध्यप्रदेश इसी को आधार बनाकर काम कर रहा है।
सशर्त प्रमोशन का सुझाव -
राज्य सरकार के विधि मंत्री पीसी शर्मा ने मुख्यमंत्री कमलनाथ एक नोटशीट भी लिखी है। इसमें उन्होंने भोपाल जिला अदालत में कर्मचारियों को दिए गए प्रमोशन का हवाला देते हुए लिखा गया है कि यहां के कर्मचारियों को सशर्त प्रमोशन दिया गया है। प्रमोशन में शर्त यह है कि यदि सुप्रीमकोर्ट भी हाईकोर्ट की तरह प्रदेश सरकार के वर्ष 2002 के प्रमोशन में आरक्षण के नियम को खारिज कर देती है तो प्रमोट किए गए कर्मचारी डिमोट हो जाएंगे। क्योंकि सभी को वर्ष 2002 के नियम के तहत प्रमोशन दिया गया है।
40 हजार से ज्यादा कर्मचारी सेवानिवृत्त -
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा 30 अप्रैल 2016 को 'मप्र लोक सेवा (पदोन्नति) अधिनियम 2002 खारिज किए जाने के बाद से अब तक 30 हजार से ज्यादा कर्मचारी बिना प्रमोशन के सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इनमें करीब 22 हजार कर्मचारी ऐसे हैं, जिनकी पदोन्नित के लिए डीपीसी हो चुकी थी या डीपीसी की तैयारी चल रही थी। जबकि 70 हजार से ज्यादा कर्मचारी प्रमोशन के इंतजार में हैं।
शिवराज सरकार ने भी किए थे प्रयास -
प्रमोशन में आरक्षण का नियम रद्द होने के बाद कर्मचारियों की नाराजगी को दूर करने के लिए तत्कालीन शिवराज सरकार ने बीच का रास्ता निकालने के लिए प्रयास किए थे। इसके लिए सरकार ने नए नियम भी तैयार हो गए थे, लेकिन सरकार के यह प्रयास सफल नहीं हो सके। कानूनी राय भी ली गई लेकिन मामला सुप्रीमकोर्ट में होने के कारण मामला अटक गया। परिणाम स्वरूप बिना प्रमोशन पाए कर्मचारी रिटायर होते जा रहे हैं।
विधानसभा अध्यक्ष ने किया था समिति का ऐलान-
विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कर्मचारियों को प्रमोशन देने का मामला सदन में उठा था। इस पर विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने व्यवस्था दी थी कि वे स्वयं, मुख्यमंत्री और पक्ष-विपक्ष के कुछ सदस्य बैठकर इसका रास्ता निकालेंगे। सत्र समाप्त हुए दस दिन गुजर जाने के बाद भी अभी तक विधानसभा सचिवालय ने इसमें कोई कदम नहीं उठाया है।
यह सही है कि राज्य के अधिकारी-कर्मचारियों को लम्बे समय से प्रमोशन नहीं मिल पा रहे हैं। इसके लिए सरकार ने उन्हें वचन दिया है। इसी वचन के तहत प्रयास शुरू हुए हैं। प्रमोशन का रास्ता जल्द निकलेगा।
- डॉ. गोविंद सिंह, सामान्य प्रशासन मंत्री
Updated on:
04 Aug 2019 02:29 pm
Published on:
04 Aug 2019 01:53 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
