
यह कहना है मधुसूदनन नायर का, वे यहां नयापुरा कोलार रोड पर रहते हैं। मधुसूदनन नायर अपनी मां और परिवारजनों से मिलने ८ अगस्त को भोपाल से केरल के लिए रवाना हुए थे, और वे १० अगस्त को राममी पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि १२ और १३ को वहां बहुत ही खतरनाक बारिश हुई, उस समय मैं वहीं था, बारिश के बाद पम्बा नदी से प्रलय जैसा पानी आया, और बड़े-बड़े मकान, टाउनशिप आदि सब धराशाही हो गई। बारिश से बचने के लिए कोई पहले माले से दूसरे माले पर सामान पहुंचाता और पानी दूसरे माले तक आ जाता,
एेसे में लोगों को अपना घर बार छोडक़र सुरक्षित स्थान तक जाने के अलावा कोई चारा नहीं था। हमारा घर ऊं चाई पर होने के कारण नुकसान नहीं हुआ, लेकिन घर तक पानी आ गया था, नीचले इलाकों में पानी ही पानी नजर आ रहा था। जेसीबी से हटाई गाद, पानी में समा गई सामग्री बारिश के कारण राममी की टाउनशिप जहां कई दुकाने हैं, वह पानी में डूब गई थी। चार पांच दिन बाद बाढ़ उतरने पर सडक़ और पानी में डूबे घरों में गाद जमा हो गई थी, जिसमें कई प्रकार के जलीय जीव थे, घरों से भी जेसीबी के जरिए गाद हटाई जा रही थी, और पूरा सामान खाक हो चुका था। कई दुकानों में किराना सामान, दवाईयां आदि से दुर्गंग्ध आ रही थी।
स्थिति यह थी कि राहत दल को मुंह पर मॉस्क लगाकर वह सामान गाद से निकालना पड़ रहा था। सेना के जवान जगह-जगह राहत कार्यों में जुटे हुए थे। बाढ़ के बाद भी सडक़ों पर चार पहिया वाहन नहीं चला पा रहे थे, मैंने बाईक से आसपास के कुछ स्थानों पर गया, सभी जगह बर्बादी का मंजर दिखाई दे रहा था। वहां की स्थिति देखकर मुझे भी अपना रिजर्वेशन दो बार केंसिल करवाना पड़ा और मैं २६ अगस्त को ही वापस भोपाल लौटा हूं।
Published on:
28 Aug 2018 01:36 pm
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