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पूर्व जज गिरिबाला सिंह पर कैसे कसा कानूनी शिकंजा, हाईकोर्ट के फैसले की 5 अहम बातें

Giribala Singh- ऐसी नौबत क्योें आई, इसे जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश में उ​ल्लेखित बिंदुओं से समझा जा सकता है, कोर्ट ने फैसले का आधार पूरी तरह स्पष्ट किया
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Twisha mother-in-law Giribala Singh held considerable clout in the court

Twisha mother-in-law Giribala Singh held considerable clout in the court

Twisha Sharma Case- भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा केस में जबलपुर हाईकोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त कर दी। इसी के साथ हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के​ आरोपी को राहत ​देने के निर्णय पर भी गंभीर सवाल उठाए। अग्रिम जमानत निरस्त होने के साथ ही भोपाल की पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह पर गिरफ़्तारी की तलवार लटक गई है। ऐसी नौबत क्योें आई, इसे जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश में उ​ल्लेखित बिंदुओं से समझा जा सकता है। कोर्ट ने अपने फैसले का आधार पूरी तरह स्पष्ट किया है।

अग्रिम जमानत निरस्त करने संबंधी अपने आदेश में ट्रायल कोर्ट के आधारों पर सवाल

हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत निरस्त करने संबंधी अपने आदेश में ट्रायल कोर्ट के आधारों पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने मान लिया कि केवल शादी के सात साल में हुई मौत के आधार पर अग्रिम जमानत नहीं देना न्यायोचित नहीं होगा।

मुख्य शिकायत पति समर्थ सिंह के खिलाफ

निचली अदालत ने इस बात पर भी विचार किया कि मुख्य शिकायत पति समर्थ सिंह के खिलाफ है। व्हाट्सऐप चैट्स में यही तथ्य सामने आया। इसके अलावा ट्रायल कोर्ट ने यह भी देखा कि आरोपी पक्ष ट्विशा के खाते में लगातार पैसे भेजते रहा था।

केस की गहराई से जांच करने पर तस्वीर बदल रही

भोपाल कोर्ट ने इन्हीं आधारों पर सास पूर्व जिला जज को अग्रिम जमानत दे दी। हाईकोर्ट के मुताबिक, केस की गहराई से जांच करने पर तस्वीर बदल रही है। इसी के साथ कोर्ट ने अग्रिम जमानत निरस्त करने संबंधी दोनों याचिकाएं स्वीकार कर लीं।

अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा:

  1. नवविवाहिता की मौत का मामला बेहद गंभीर है। अभी तक उपलब्ध साक्ष्य और जांच को देखते हुए पूर्व जज गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत न्यायोचित नहीं थी।
  2. एम्स की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में फांसी के अलावा ट्विशा के शरीर पर कई चोटें मिलीं। अहम बात यह है कि ये चोटें सिर्फ शव उतारने से नहीं हो सकतीं।
  3. भोपाल के 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने केस डायरी और सबूतों पर उचित व पर्याप्त विचार नहीं किया।
  4. हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देना सही नहीं था। इसका लाभ केवल विशेष स्थिति में ही दिया जाना चाहिए।
  5. जबलपुर हाईकोर्ट ने भोपाल कोर्ट द्वारा 15 मई 2026 को दिया गया अग्रिम जमानत आदेश रद्द कर दिया।