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कुचिपुड़ी के माध्यम से महाभारत के चीरहरण प्रसंग का वर्णन

उत्तराधिकार में हुईं सुगम संगीत व कुचिपुड़ी समूह नृत्य की प्रस्तुतियां  
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Kuchipudi

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भोपाल। मप्र जनजातीय संग्रहालय में गायन, वादन व नृत्य गतिविधियों पर केंद्रित शृंखला 'उत्तराधिकार' में रविवार को सुगम संगीत व कुचिपुड़ी समूह नृत्य की प्रस्तुतियां संग्रहालय के सभागार में हुईं। कार्यक्रम में एस. लक्ष्मीशंकर ने अपने साथी कलाकारों के साथ राग हंसध्वनि आदि ताल में 'जयमु-जयमु' पर केंद्रित कुचिपुड़ी नृत्य प्रस्तुत कर प्रस्तुति की शुरुआत की।

इसके बाद राग रागेश्वरी आदि ताल में 'नंदकधरा' पर कलाकारों ने कुचिपुड़ी नृत्य प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति में कलाकरों ने कृष्ण के बाल स्वरुप को, उनके नटखट स्वभाव को और महाभारत कालीन चीरहरण के प्रसंग को अपने नृत्य कौशल से दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया।

मां लक्ष्मी के आठ स्वरुपों का वर्णन

इसके बाद राग मलिका आदि ताल 'अष्टलक्ष्मी स्तुति' पर कुचिपुड़ी नृत्य प्रस्तुति हुई। इस प्रस्तुति में कलाकारों ने मां लक्ष्मी के आठ स्वरुप को मंच पर नृत्य माध्यम से प्रस्तुत किया। नृत्य प्रस्तुति के अंत में एस. लक्ष्मीशंकर ने साथी कलाकारों के साथ 'बाल गोपाल तरंगम' पर कुचिपुड़ी नृत्य प्रस्तुत करते हुए अपनी नृत्य प्रस्तुति को विराम दिया।

इस प्रस्तुति में कृष्ण के बाल रूप को, मक्खन चोरी और गोपियों को परेशान करने के प्रसंग को कलाकारों ने प्रस्तुत किया। नृत्य प्रस्तुति के दौरान एस. लक्ष्मीशंकर का साथ मंच पर आश्रिता, अक्षरा, अंजलि, कौस्तुभा, संतोषी कुमारी, सृष्टि निधि, वेदा और वेंकट ने दिया।

मशहूर शायरों की गजलों से गुलजार हुई महफिल

सुगम संगीत की शुरुआत भोपाल के संदीप शर्मा ने अपने साथी कलाकारों के साथ ताजुद्दीन ताज की गज़़ल 'ये खनकते हुए सागऱ नहीं देखे जाते...प्यास में डूबे समंदर नहीं देखे जाते' से की। इसके बाद कलाकारों ने फिऱाक गोरखपुरी की गज़़ल 'शाम-ए-ग़म कुछ उस निगाहे नाज़ की बातें करो...बेख़ुदी बढऩे लगी है राज़ की बातें करो', हसरत जयपुरी की गज़़ल 'मेरी नाजऩीं तुम मुझे भूल जाना...मुझे तुमसे मिलने जा देगा ज़माना' और दाग़ देहलवी की गज़़ल 'आपका ऐतबार कौन करे...रोज़ का इंतज़ार कौन करे' प्रस्तुत की।

इसके बाद बशीर बद्र की गज़़ल 'सरे राह कुछ भी कहा नहीं... कभी उसके घर मैं गया नहीं' प्रस्तुत करते हुए अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। गायन प्रस्तुति के दौरान हारमोनियम पर श्रवण कुमार ने, तबले पर अमजद खान ने, वायलिन पर महेश मालिक ने सहयोग किया।