मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में लाए गए चीतों की मौत से चिंतित है सरकार...।
मध्यप्रदेश के कूनो में साउथ अफ्रीका और नामीबिया से लाए गए चीतों की मौत के बाद केंद्र सरकार भी हरकत में आ गई है। केंद्र ने चीता प्रोजेक्ट की समीक्षा और निगरानी के लिए 11 सदस्यीय उच्च स्तरीय संचालन समिति का गठन किया है। ग्लोबल टाइगर फोरम के महासचिव राजेश गोपाल की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया गया है।
मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में करीब दो माह में तीन व्यस्त चीते और नामीबिया की मादा चीता सियाया से पैदा हुए चार शावकों में से तीन की मौत हो गई है। इस कारण कई विशेषज्ञों ने कूनो के रहवास अनुकूलता और वन्य जीव प्रबंधन के संबंध में सवाल उठाए थे।
क्या है चीता प्रोजेक्ट
पीएम नरेंद्र मोदी साल 17 सितंबर 2022 को अपने 72वें जन्म दिन के मौके पर कूनो आए थे और नामीबिया से आए 8 चीतों के पहले बैच को कूनो में छोड़ा था। इसी प्रकार 18 फरवरी को 12 और चीते दक्षिण अफ्रीका से लाए गए थे, उन्हें भी कूनो में छोड़ा गया था।
एक नजर
25 मई को दो चीता शावकों की मौत हो गई।
23 मई को एक चीता शावक की मौत हो गई थी।
9 मई को चीता दक्षा की मौत हो गई थी।
23 अप्रैल को चीता उदय की मौत हो गई।
27 मार्च को मादा चीता साशा की मौत हो गई थी।
कूनो में क्या है खास
दावा किया गया था कि पहले कूनो नेशनल पार्क चीता का ही घर हुआ करता था।
कूनो राष्ट्रीय पार्क के आसपास गांव भी नहीं है।
यहां उनके शिकार के लिए अनुकूल जगह है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ कहते हैं कि चीतों की इस तरह की मौत विशष चिंता का विषय नहीं है। तीन में से एक की मौत सांप काटने से हुई थी और एक चीते की मौत आपसी लड़ाई में हुई थी। ऐसी घटनाएं प्रकृति में होती रहती हैं। एक मामला किडनी की बीमारी का था। शावकों की मौत के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। अफ्रीका में भी नवजात चीतों की जीवित रहने की दर काफी कम है। विशेषज्ञों की माने ती केवल 10 से 20 प्रितशत शावक ही जीवित रह पाते हैं।
एक नजर
चीता छोटी-सी छलांग मारकर 120KM प्रति घंटे की रफ्तार में दौड़ सकता है।
इसी स्पीड से 460 मीटर तक लगातार दौड़ सकता है।
3 सेकंड में ही 103 की रफ्तार पकड़ लेता है। चीता शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द चित्रकायः से हुई है।