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जानिए क्यों आरोपों से घिरे लक्ष्मीकांत आज भी हैं भक्तों के गुरूजी

लक्ष्मीकांत शर्मा सिरोंज के सरस्वती शिशु मंदिर में प्रायमरी कक्षा के बच्चों को पढ़ाया करते थे।

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Juhi Mishra

Dec 19, 2015


भोपाल। बच्चों के आचार्य जी, भक्तों के गुरूजी, राजनीति के महाराज और व्यापमं घोटाले में मुख्य आरोपी लक्ष्मीकांत शर्मा जल्दी ही जमानत पर रिहा हो सकते हैं। उन्हें एसटीएफ ने जून 2014 में गिरफ्तार किया था, तब से अब तक दर्जनों बार जमानत की गुहार लगा चुके लक्ष्मीकांत शर्मा की अंतत: कामना पूरी हो गई है। जबलपुर हाईकोर्ट ने उन्हें 7 मामलों में जमानत दे दी है। यह फैसला आने के बाद आचार्य जी के गांव और विधानसभा क्षेत्र सिरोंज में खुशी की लहर दौड़ गई है। सिरोंज से लोगों का भोपाल सेंट्रल जेल आना शुरू हो गया है। मिठाईयां, आतिशबाजी और ढ़ोल तैयार कर लिए गए हैं। समर्थक फूल मालाएं लेकर स्वागत का इंतजार कर रहे हैं।


इतने बड़े घोटाले में शामिल लक्ष्मीकांत शर्मा के स्वागत का ऐसा जोरदार इंतजाम, लोगों में ऐसी खुशी क्यों? ऐसा क्या है उनमें कि तमाम आरोपों में घिरे होने के बाद भी लोगों में उनके प्रति श्रृद्धा कम नहीं हुई है। आइए जानते हैं लक्ष्मीकांत शर्मा के जीवन से जुड़े वे पहलू जिन्होंने आज भी लोगों के दिलों में पुरानी छवि को जीवित रखा हुआ है।


आचार्य जी से मंत्री जी तक
लक्ष्मीकांत शर्मा सिरोंज के सरस्वती शिशु मंदिर में प्रायमरी कक्षा के बच्चों को पढ़ाया करते थे। इस दौरान वे आरएसएस से भी जुड़े और सक्रीय कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहे। इस बाद राजनीति के क्षेत्र में कदम रखने का मौका मिला और भाजपा में रहते हुए अपने क्षेत्र की आवाज बन गए। लक्ष्मीकांत शर्मा ने सिरोंज विधानसभा से पहली बार 1993 में चुनाव जीता। विधायक बनने के बाद उन्होंने लोगों के बीच जमकर लोकप्रियता हासिल की। इसके बाद 1998 और फिर 2003 में भी विधायक पद पर अपनी दावेदारी कायम की। उनके काम से प्रभावित होकर उमाभारती ने 2004 में राज्य मंत्री बनने का मौका दिया। इसके बाद 2008 के चुनाव में भी उन्होंने अपना प्रभाव छोड़ा। हालांकि 2013 आते-आते तक सिरोंज में उनकी चमक कुछ कम पड़ी और वे चुनाव हार गए।


हर नेता के पंसदीता
लक्ष्मीकांत शर्मा के काम का देखते हुए उमा भारती, बाबू लाल गौर और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें अपने मंत्रीमंडल में जगह दी। इस दौरान वे जनसंपर्क मंत्री, संस्कृति मंत्री, धर्मास्व और उच्च शिक्षा एवं तकनीति मंत्री रहे। लक्ष्मीकांत को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का दायां हाथ और खास राजदार भी कहा जाता है। यही वजह है कि व्यापमं घोटाले के आरोप में जब उनकी गिरफ्तारी हुई उस वक्त मुख्यमंत्री विदेश यात्रा पर थे।


ब्राम्हणों के चहेते
लक्ष्मीकांत शर्मा तीन भाईयों में दूसरे नम्बर पर हैं। उनके बड़े भाई नलनीकांत शर्मा आज भी सिरोंज में रहते हैं और मंदिर में पुजारी हैं। उनका जीवन बहुत सादा है और राजनीति से दूर हैं। जबकि छोटे भाई उमाकांत शर्मा बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। परिवार में पत्नी और तीन बेटियां हैं। लक्ष्मीकांत ने अपने परिवार को राजनीति से दूर रखा है, इसलिए वे परिवार के साथ राजनीति और सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखायी नहीं देते हैं। उनके परिवार के सिरोंज में दो मंदिर हैं। पहला महामायी मंदिर और दूसरा गणेश की अथाई। इन मंदिरों की पूरी जिम्मेदारी शर्मा परिवार की है।


सिरोंज के नायक
सिरोंजवासी आज भी लक्ष्मीकांत शर्मा की तारीफ करते नहीं थकते। जब उन्हें व्यापमं मामले में आरोपी बनाया गया था तब सिरोंज में जमकर बवाल हुए थे। लोगों का कहना है कि विधायक पद पर रहते हुए शिवराज सिंह ने अपने क्षेत्र विदिशा में जितने विकास कार्य नहीं करवाए उससे कहीं ज्यादा लक्ष्मीकांत शर्मा ने सिरोंज में करवाएं हैं। आज भी सिरोंज में राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित की जाती है जो उन्ही की देन है। लक्ष्मीकांत शर्मा जब संस्कृति मंत्री थे तब उन्होंने सिरोंज में कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करवाया।

चुप्पी है जो बचाए हुए है
एसटीएफ और सीबीआई की पूछताछ में लक्ष्मीकांत शर्मा ने आज तक घोटाले के सूत्रधार का नाम नहीं खोला है। राजनीतिक विशेषज्ञ बताते हैं कि लक्ष्मीकांत उमा भारती और शिवराज सिंह के खास राजदार रहे हैं। कई विवादित मामलों से लक्ष्मीकांत ने ही उन्हें बाहर निकाला है।