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आदिवासियों से कोरे कागज पर दस्तखत करवाकर ले ली जमीन

पातालकोट का सौदा : खेलकूद के नाम पर लेकर निजी कंपनी को सौंपी

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 patalakot deal

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छिंदवाड़ा. आदिवासी बहुल पातालकोट के ऊपरी हिस्से बीजाढाना की जमीन को दिल्ली की यूरेका कंपनी को 11 लाख रुपए में देने के मामले में एक और चौकाने वाला तथ्य सामने आया है। ये जमीन पर्यटन विभाग ने 2011 में आदिवासियों से अधिग्रहीत की थी। जमीन के मालिक रहे आदिवासी झम्मीलाल उइके ने बताया कि उनसे तत्कालीन पटवारी और तहसीलदार ने कोरे कागज पर दस्तखत कराए थे। उन्होंने कहा था कि सरकार इस जमीन का उपयोग साल में एक बार खेलकूद के लिए करेगी। इसके बाद आप खेती कर सकेंगे। झम्मीलाल का दावा है कि 2013 में उसे साढ़े 16 लाख का चैक देकर अधिकारियों ने जमीन पर्यटन विभाग के नाम करा दी। उसे पता ही नहीं चला कि जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव कब तैयार कर लिया गया। वह अपनी जमीन वापस चाहता है।

- तारबंदी के बाद पातालकोट महोत्सव बंद
पर्यटन विभाग ने 2009 में बीजाढाना के रातेड़ प्वॉइंट पर पातालकोट महोत्सव की शुरुआत की थी। इसका सिलसिला 2017 तक चला। झम्मीलाल के अनुसार उनका परिवार तब तक इस जमीन पर खेती भी करता रहा। पर्यटन विभाग ने 2018 में जमीन दिल्ली की यूरेका कैम्पआउट्स को 11 लाख रुपए में 20 साल के लिए लाइसेंस एग्रीमेंट पर दे दी। उसके बाद कंपनी ने यहां तारबंदी कर दी। इससे पर्यटकों और आदिवासियों का रास्ता बंद हो गया। बीजाढाना आने वाले पर्यटकों का आवागमन बंद होने से आदिवासियों के रोजगार पर भी बुरा असर हुआ है। वे पर्यटकों को जड़ी-बूटी बेचते थे।
- दोषियों पर हो कार्रवाई : अलावा
कांग्रेस के आदिवासी विधायक और जयस नेता डॉ. हीरालाल अलावा ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर पातालकोट में यूरेका कंपनी के निर्माण पर रोक लगाने की मांग की है। अलावा ने लिखा है कि ये निर्माण कार्य अनुच्छेद 244 एक और पांचवीं अनुसूची का उल्लंघन है। इसमें दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग भी की है।