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रोहित गृह निर्माण सोसायटी में प्लॉट की हेराफेरी कर भू माफिया घनश्याम ने बनाई करोडों की संपत्ति

- वर्ष 2003 में दो प्लॉट लेकर की थी सोसायटी में घुसपैठ, दो साल बाद संचालक मंडल में हो गया शामिल, इसके बाद शुरू हुआ पूर्व सदस्यों के साथ फर्जीवाड़ा

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रोहित गृह निर्माण सोसायटी में प्लॉट की हेराफेरी कर भू माफिया घनश्याम ने बनाई करोडों की संपत्ति

र्ष 2009 में ईओडब्लयू में फर्जीवाड़े की शिकायत पहुंची, जांच में संस्था के अकाउंट से 22.70 करोड़ की हेराफेरी के प्रमाण मिले थे।

भोपाल. राेहित गृह निर्माण सोसायटी में पूर्व सदस्यों के साथ घपले घोटाले कर करोड़ों रुपए की संपत्ति बनाने वाले भू माफिया घनश्याम राजपूत को सीबीआइ कोर्ट ने चार साल की सजा और 65 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इसमें पत्नी संध्या को भी एक साल की सजा सुनाई है। रेलवे में क्लर्क रहते हुए घनश्याम ने करोड़ों रुपए की संपत्ति का सफर वर्ष 2003 से शुरू किया। रोहित गृह निर्माण सोसायटी में पहले दो प्लॉट खरीदे और इसके दो साल बाद वर्ष 2005 में खुद संचालक मंडल में शामिल हो गया। इसके बाद तो सोसायटी में उठापटक शुरू हो गई। जो पुराने सदस्य थे, उनमें से कइयों को बाहर कर दिया गया। उनकी जगह नए सदस्य बनाकर कई प्लॉटों की दो या इससे अधिक रजिस्ट्री कराई। इससे प्लॉटों में विवाद होने लगे। रोहित गृह निर्माण शहर की सबसे ज्यादा चर्चित और भ्रष्टाचार वाली सोसायटी में शामिल हो गई।

वर्ष 2009 में ईओडब्लयू में फर्जीवाड़े की शिकायत पहुंची, जांच में संस्था के अकाउंट से 22.70 करोड़ की हेराफेरी के प्रमाण मिले थे। इस आधार पर कुछ लोगों के खिलाफ एफआइआर भी दर्ज हुई। तमाम शिकायतों के बाद 2012 में घनश्याम राजपूत ने सहकारिता अफसरों के समक्ष 300 से ज्यादा पात्र सदस्यों को प्लॉट देने की बात कही और इसके एवज में लोगों से कुछ राशि भी ली। इसके बाद भी उसने प्लॉट नहीं दिए और जो राशि जमा की गई थी, उसे भी उसने खाते से निकाल लिया।

भाजपा नेताओं से संपर्क में आ गया

राेहित गृह निर्माण सोसायटी में लगातार हो रहे फर्जीवाड़ों के बीच घनश्याम सिंह राजपूत भाजपा नेताओं के संपर्क में आ गया। समाज सेवी संस्थाओं में अध्यक्ष बना दिया। इसी बीच सीबीआइ में उसकी शिकायत हुई। कार्रवाई करते हुए सीबीआइ ने बेनामी संपत्ति के दस्तावेज जब्त किए। घनश्याम ने पत्नी और यहां तक की ड्राइवर के नाम पर प्लॉट करा दिए थे। इनके संबंध में आज कइ लोगों की दूसरी पीढ़ी कोर्ट में केस लड़ रही है।

बसंत गृह निर्माण सहकारी समिति को अंतिम अवसर

इधर बसंत गृह निर्माण सोसायटी के अध्यक्ष एवं संचालक मंडल को सुनवाई के लिए अंतिम अवसर दिया गया है। उपायुक्त सहकारिता विनोद सिंह ने बताया कि संस्था को पूर्व में भी तीन अवसर प्रदान किए गए थे किन्तु संस्था की ओर से न तो कोई उपस्थित हुआ और न ही कोई लिखित उत्तर आया। उन्होंने बताया कि समिति को अंतिम अवसर प्रदान करने के लिए 29 दिसंबर का समय दिया है। इस दिन कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष समर्थन, मय दस्तावेजों सहित एंव उत्तर प्रस्तुत करना होगा। अनुपस्थिति की दशा में एक पक्षीय कार्रवाई करते हुए आदेश जारी कर दिये जायेंगे।

इस मामले में आज भी हैं हाथ खाली

भोपाल मेमोरियल अस्पताल के पास स्थित कोरल लाइफ कॉलोनी आदर्श गृह निर्माण सोसायटी में हुई गड़बड़ी को लेकर सहकारिता विभाग के अफसर आज भी खाली हाथ हैं। कारण है कि सहकारिता निरीक्षकों को न तो संस्था के पदाधिकारी घरों पर मिल रहे हैं और न ही रिकाॅर्ड। ऐसे में पदाधिकारियों को ढूंढने और रिकाॅर्ड जब्त करने के लिए सहकारिता विभाग अब पुलिस की मदद लेगा।